जगदलपुर

‘भारत-पाकिस्तान जैसा माहौल बनाया’, इंदिरा वार्ड में 436 वोटों से हार के बाद महापौर ने कह डाली ये बड़ी बात

Indira Ward By Election Result: 436 वोटों से मिली करारी हार के बाद महापौर संजय पांडेय ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने पूरे चुनाव को "भारत-पाकिस्तान जैसा माहौल" बनाने की कोशिश की और भाजपा प्रत्याशी के खिलाफ गलत प्रचार किया।

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Jun 05, 2026
Jagdalpur Indira Ward Election Result
कांग्रेस ने 436 वोट से मारी बाजी (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Jagdalpur Indira Ward Election Result: जगदलपुर इंदिरा वार्ड का किला अभेद ही साबित हुआ। सारे आंकलन धरे रह गए जब उपचुनाव के नतीजे सामने आए। 100-150 वोट की मार्जिन से हार जीत की संभावना जताने वाले कांग्रेस-भाजपा के नेता भी 436 बोट का भारी अंतर देख अचंभित नजर आए। कांग्रेस के रामकृष्ण तिवारी ने मनोहर दत्त को 436 बीटी के भारी अंतर से हराकर एक नया रेकॉर्ड अपने नाम कर लिया। इंदिरा बार्ड पिछले 30 साल से कांग्रेस का अभेद किला बना हुआ था और उपचुनाव में वार्ड से जो जनादेश कांग्रेस को मिला उसने कई तरह की चर्चा शुरू कर दी।

दरअसल इस वार्ड से पूर्व कांग्रेसी पार्षदों ने भी इतनी बड़ी जीत कभी दर्ज नहीं की थी। पूर्व पार्षद अब्दुल रशीद के निधन के बाद हुए इस उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मुन्नू तिवारी ने भाजपा प्रत्याशी मनोहर दत्त तिवारी को हराकर हराकर वार्ड में पार्टी के राजनीतिक वर्चस्व को सुरक्षित रखा। यह चुनाव 'तिवारी बनाम तिवारी' मुकाबले के रूप में चर्चित रहा। भाजपा ने जीत के लिए पूरी ताकत झोंकी, लेकिन मतदाताओं जनादेश देकर पार्टी के गढ़ को अटूट बनाए रखा।

बूथवार परिणाम

  • बूथ क्रमांक-1
  • कांग्रेस: 483
  • भाजपा: 157
  • आप: 18 आप
  • नोटा: 5
  • बूथ क्रमांक-2
  • कांग्रेस 331
  • भाजपा 221
  • आप: 4
  • नोटा: 4

कुल परिणाम

  • रामकृष्ण तिवारी काग्रेसः 814 वोट
  • मनोहर दत्त तिवारी भाजपाः 378 वोट
  • आम आदमी पार्टीः 22 वोट
  • नोटाः 9 बोट

कांग्रेस भवन में भांगड़ा भाजपा कार्यालय में मायूसी

कलेक्ट्रेट में सुबह 9.30 बजे तक ही परिणाम घोषित कर अपर कलेक्टर ने जीत का प्रमाण पत्र कांग्रेस के नवनिर्वाचित पार्षद रामकृष्ण तिवारी को सौंप दिया। इसके बाद कांग्रेसियों के जीत का जान शुरू हुआ जो दोपहर तक जारी रहा। विजयी पार्षद को कांग्रेसी बाइक रैली के साथ कांग्रेस भवन लेकर पहुंचे। इसके बाद कांग्रेस भवन में कांग्रेसी भांगड़ा करते नजर और फिर वरिष्ठ नेताओं के साथ विजय जुलूस निकालकर वार्ड के मतदाताओं के बीच पहुंचकर आभार जताया गया। इस बीच भाजपा कार्यालय में मायूसी का नजारा रहा।

भाजपा के बड़े चेहरों पर भारी पड़ी कांग्रेस की एकजुटता

इंदिरा वार्ड के परिणाम ने कांग्रेस और भाजपा दोनों को सीख दी। कांग्रेस जहां पूरे चुनाव में एकजुट होकर पूरी अक्रामता के साथ भीषण गर्मी में पसीना बहाती रही। बस्तर भाजपा के सभी बड़े चेहरों ने इंदिरा वार्ड में प्रचार किया लेकिन कांग्रेस की एकजुट टीम सभी चेहरों पर भारी पड़ी। चुनाव प्रबार के दौरान सामने आए। वीडियो ने भी भाजपा की चिंता बढ़ा दी और परिणाम भी अंत में भाजपा के लिए निराशाजनक ही रहे।

पूर्व विधायक रेखचंद बोले- भाजपा से नाराज है जनता

जगदलपुर के पूर्व विधायक रेखाचंव जैन खुद इंदिरा वार्ड के यौटर हैं और उन्होंने भी चुनाव में खूब पसीना बहाया। वार्ड के सामाजिक समीकरणों को साधने में भी वे कामयाब रहे और पार्टी के लिए बड़ी जीत लेकर आए। जिलाध्यक्ष सुशील मौर्य और रेखचंद जैन की जोड़ी पूरे चुनाव में रणनीतिक रूप से एक सफल जोड़ी के रूप में उभरी। ऐतिहासिक जीत के बाद रेखचंद जैन ने कहा कि परिणाम भाजपा सरकार के खिलाफ भारी नाराजगी का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि यह 2028 का ट्रेलर है।

धनबल-सत्ताबल सब बुरी तरह फेल हो गयाः सुशील

शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुशील मौर्य ने इसे कांग्रेस की ऐतिहासिक जीत बताते हुए कहा कि भाजपा ने इस उपचुनाव को जीतने के लिए प्रदेश अध्यक्ष, महापौर और अन्य वरिष्ठ नेताओं सहित पूरी ताकत झोंक दी थी। इसके बावजूद जनता ने कांग्रेस के विकास कार्यों पर मुहर लगाई। उन्होंने कहा कि इंदिरा वार्ड के लोगों के मन में पूर्व पार्षद रशीद खान के प्रति सम्मान आज भी कायम है और जनता ने रामकृष्ण तिवारी को समर्थन वेकर उनके कार्यों को आगे बढ़ाने का संदेश दिया है।

जनता के विश्वास व विकास की जीत: चौधरी

नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष राजेश चौधरी ने कहा कि इंदिरा वार्ड की जनता ने विकास, विश्वास और जनहित के पक्ष में अपना स्पष्ट जनादेश दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा द्वारा बनाए गए सभी राजनीतिक समीकरण और चुनावी रणनीतियां पूरी तरह विफल साबित हुई। चौधरी ने इस जीत को पूर्व पार्षद अब्दुल रशीद के कार्यों के प्रति जनता की श्रद्धांजलि बताते हुए कहा कि मतदाताओं ने विकास और जनसेवा को प्राथमिकता दी है।

भारत-पाकिस्तान जैसा माहौल बनायाः महापौर

भाजपा को मिली करारी हार के बाद हली प्रतिक्रिया महापौर संजय पांडेय की सामने आई। उन्होंने कहा कि हम इंदिरा वार्ड के जनादेश का सम्मान करते हैं और हार के कारणों की समीक्षा करेंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने पूरे सुनाव को भारत-पाकिस्तान के माहौल जैसा बनाने की कोशिश की। भाजपा के प्रत्याशी के लिए गलत प्रचार कांग्रेस ने किया।

@ मनीष गुप्ता। कांग्रेस को छोटे चुनाव से बड़ी संजीवनी

बस्तर संभाग के चार नगरीय निकायों जगदलपुर, फरसगांव, पखांजूर और चारामा में हुए पार्षद उपचुनावों में कांग्रेस को 4 तो वहीं भाजपा को एक पार्षद मिला है। चुनव भले ही छोटा था लेकिन इनके राजनीतिक मायने बड़े है। चार सीटों पर कांग्रेस की जीत ने जहां पार्टी कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भर दिया है, वहीं भाजपा खेमे में निराशा दिखाई दे रही है। इन परिणामों की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि भाजपा और कांग्रेस दीनों के प्रदेशाध्यक्ष बस्तर संभाग से आते हैं।

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष किरण सिंहदेव जगदलपुर से है, जबकि कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष दीपक बैज का राजनीतिक आधार भी बस्तर ही है। ऐसे में इन उपचुनावों को दोनों दलों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न माना जा राय था। एल के वर्षों में विधानसभा और लोकसभा चुनावों में लगातार झटके डोलने वाली कांग्रेस के लिए ये परिणाम किसी संजीवनी से कम नहीं है।

खासकर जगदलपुर के इंदिरा वाई के चुनाव प्रचार में भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपनी पूरी ताकत झोंकी थी। भाजपा की ओर से प्रदेशाध्यक्ष किरण सिंह देव, मंत्री केदार कश्यप, सांसद महेश कश्यप, बस्तर महाराजा कमल चंद्र भंजदेव और महापौर संजय पांडे मैदान में उतरे थे। वहीं कांग्रेस से पीसीसी चीफ दीपक बैज, पूर्व विधायक रेखाचद जैन, पूर्व क्रेडा अध्यक्ष मिथलेश स्वर्णकार, पूर्व महापौर जतिन जायसवाल एवं शहर कांग्रेस अलाक्ष सुशील मौर्य ने अपने प्रत्याशी के प्रचार में पूरी तरह जुटे थे। जगदलपुर के इंदिरा वार्ड में 436 वोटों के बड़े अंतर से मिली जीत यह संकेत देती है कि शहरी क्षेत्रों में कांग्रेस का आधार पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

जगदलपुर में डेढ़ साल पहले ही भाजपा ने शहर की सत्ता बड़े अंतर के साथ हासिल की थी। महापौर संजय पांडेय समेत 30 से ज्यादा भाजपा के पार्षद जीतकर आए थे। पखांजूर और चारामा जैसी सीटों पर भी कांग्रेस ने जीत दर्ज कर यह संदेश देने की कोशिश की है कि संगठन अभी भी जमीनी स्तर पर सक्रिय है और स्थानीय मुद्दों पर जनता का भरोसा बनाए हुए है। इन परिणामों से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नया जोश आया है। कांग्रेस पार्टी इसे बस्तर में अपनी वापसी की शुरुआत बता रही है।

दूसरी ओर भाजपा के लिए यह परिणाम कई सवाल छोड़ गए है। प्रदेश और केंद्र दोनों जगह सत्ता होने के बावजूद पार्टी इन चारों सीटों को बचाने या जीतने में सफल नहीं रही। खासकर जगदलपुर जैसे शहर में मिली हार राजनीतिक रूप से अधिक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि भाजपा के नेता इन चुनावों को स्थानीय परिस्थितियों और वार्ड स्तरीय समीकरणों का परिणाम वता रहे हैं, लेकिन नगरीय निकायों के तीन सीटों पर हार यह संकेत देती है कि भाजपा की प्रत्याशी चयन, चुनावी रणनीति एवं मुद्दे तथा कार्यकर्ताओं की सक्रियता को लेकर आत्ममंथन की दरकार है।

Published on:
05 Jun 2026 09:43 am