Ghat ki Guni Tunnel Accident: हादसा सिर्फ सड़क पर नहीं हुआ, यह लापरवाही, व्यवस्था और घर की ढील, तीनों की संयुक्त त्रासदी थी।
Minor Boy Died In Accident: घाट की गुणी टनल में हुए इस हादसे ने एक बार फिर व्यवस्था की वो दरारें सामने ला दीं, जिनसे होकर नाबालिग बच्चे आसानी से बाइक तक पहुंच जाते हैं और सड़कें उनका खेल का मैदान बन जाती हैं।
टनल में दुपहिया वाहनों का जाना पहले से प्रतिबंधित है, फिर भी नाबालिग बाइक लेकर टनल के अंदर तक पहुंच गया। पुलिस खुद मान रही है कि बाइकर्स बार-बार रोकने के बावजूद घुस जाते हैं। तो फिर कड़ाई कहां है? रोकने का सिस्टम कहां है? क्या सिर्फ हादसे के बाद कुछ घंटे खड़े रहना ही कार्रवाई है?
नाबालिग के नाम पर लाइसेंस जारी नहीं किए जाते, लेकिन सड़क पर नाबालिगों की रफ्तार खुलेआम दौड़ती है। आरटीओ के पास अभियान चलाने का अधिकार है, पर जमीनी स्तर पर इसकी झलक क्यों नहीं दिखती? हर साल सैकड़ों नाबालिग सड़क पर बाइक चलाते हुए पकड़े जाते हैं, लेकिन सजाएं इतनी मामूली हैं कि न कोई डर, न कोई रोक।
जो बाइक नाबालिग को मिली, वह किसी ने दी। घर से ही मिली। मां-बाप का यह तर्क कि बच्चा जिद करता है, क्या यह जिद जान से ज्यादा बड़ी है? बिना लाइसेंस, बिना हेलमेट, स्पीड और स्टंट और ऊपर से सोशल मीडिया पर वीडियो डालना, ये सब घर वालों की जानकारी के बिना संभव ही नहीं है।
समय-समय पर स्कूली बच्चों के वाहन चलाने के खिलाफ विशेष अभियान चलाए जाते हैं। ऐसे वाहनों को जब्त भी किया जाता है। लेकिन सबसे बड़ी आवश्यकता अभिभावकों के जागरूक होने की है। यही दुर्घटनाओं को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है।
-रानू शर्मा, एडिशनल ट्रैफिक डीसीपी, साउथ
नाबालिग का वाहन चलाना अपराध है। लाइसेंस भी 18 वर्ष की उम्र के बाद जारी किया जाता है। परिवहन विभाग और यातायात पुलिस की ओर से समय-समय पर कार्रवाई की जाती है।
-राजेंद्र सिंह शेखावत, आरटीओ प्रथम