
Rajasthan Politics: निकाय और पंचायत चुनाव की रणनीति और शहर के मुद्दों को लेकर आयोजित जयपुर शहर कांग्रेस की बैठक चुनावी रणनीति से ज्यादा पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी और नेताओं की नाराजगी के कारण चर्चा में रही। प्रदेश सह-प्रभारी पूनम पासवान की मौजूदगी में हुई बैठक में पूर्व विधानसभा प्रत्याशियों ने अपनी चुनावी हार के लिए भाजपा नहीं, बल्कि कांग्रेस के नेताओं को जिम्मेदार ठहराया।
हवामहल से कांग्रेस प्रत्याशी रहे आर.आर. तिवाड़ी और मालवीय नगर से प्रत्याशी रहीं अर्चना शर्मा ने खुले मंच से आरोप लगाया कि उन्हें पार्टी के ही लोगों ने चुनाव हराया। बैठक के दौरान नेताओं के बीच बहस की नौबत भी आ गई, जिसे अन्य वरिष्ठ नेताओं ने शांत कराया। चुनावी तैयारियों के बीच सामने आई यह तल्खी कांग्रेस के सामने संगठनात्मक एकजुटता की चुनौती भी उजागर कर गई।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए शहर कांग्रेस अध्यक्ष सुनील शर्मा ने कहा कि निकाय चुनाव में टिकट सिफारिशी नेताओं को नहीं मिलेगा। पार्टी जिताऊ और साफ छवि वाले नेताओं को प्राथमिकता देगी। इसके लिए शहर में एक गुप्त सर्वे भी कराया जाएगा। इसके साथ ही शहर कांग्रेस अगले हफ्ते से भ्रष्टाचार, अतिक्रमण, गंदगी और टूटी सड़कों के खिलाफ आंदोलन शुरू करने जा रही है। कार्यक्रम को विधायक रफीक खान, अमीन कागजी, पुष्पेन्द्र भारद्वाज सहित कई पदाधिकारियों ने संबोधित किया।
हवामहल से कांग्रेस प्रत्याशी रहे आर.आर. तिवाड़ी ने कहा कि वे चुनाव लड़ना नहीं चाहते थे, लेकिन पार्टी के निर्देश पर मैदान में उतरे। उन्होंने आरोप लगाया कि वे करीब 600 वोटों से इसलिए हार गए क्योंकि कांग्रेस के कुछ नेताओं ने मतदान से एक दिन पहले लगभग 600 समर्थकों को अजमेर दरगाह जियारत के नाम पर भेज दिया। उनका कहना था कि कांग्रेस को भाजपा या आरएसएस नहीं, बल्कि कांग्रेस के लोग ही हराते हैं। उधर, मीडिया से बातचीत में तिवाड़ी ने कहा कि दिल्ली का हाईकमान अलग हो सकता है, लेकिन राजस्थान कांग्रेस में अशोक गहलोत ही सबसे बड़े नेता हैं। उन्होंने कटाक्ष किया कि भरी मटकी नहीं, आधी भरी मटकी ज्यादा छलकती है।
मालवीय नगर से कांग्रेस प्रत्याशी रहीं अर्चना शर्मा ने कहा कि उन्हें हर चुनाव में भाजपा से ज्यादा कांग्रेस के नेताओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने दावा किया कि लगातार तीन चुनावों में उन्हें पार्टी के भीतर से नुकसान पहुंचाया गया। उनके बयान पर कांग्रेस नेता संगीता गर्ग ने आपत्ति जताई, जिसके बाद दोनों नेताओं के बीच नोकझोंक हुई।
पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने संकेत दिया कि निकाय-पंचायत चुनाव में उन नेता-कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता मिलेगी जिन्होंने संघर्ष किया और संगठन के साथ खड़े रहे। इस बार बगावत करने वालों और पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल नेताओं को टिकट नहीं मिलेगा।