जयपुर

Jaipur: बागेश्वर धाम गए थे सांगानेर से भागे बच्चे, घूमने के लिए 400 रुपए में साइकिल बेची, माता-पिता के छलके आंसू

Jaipur News: 14 अगस्त को घर से निकलने के बाद मोहित, नितिन और अरमान गांधी नगर स्टेशन पर मिले। यहां कपड़े बदलने के बाद बिना पूछताछ किए ही ट्रेन में चढ़ गए। यह भी सामने आया कि अरमान ने घूमने के लिए 400 रुपए में अपनी साइकिल बेच दी थी।

2 min read
Aug 23, 2025
घर लौटे बच्चे (फोटो-पत्रिका)

जयपुर। सांगानेर सदर और करणी विहार थाना इलाकों से घर छोड़कर भागे बच्चों की कहानी लगभग एक जैसी निकली। पढ़ाई के लिए टोकना उन्हें अच्छा नहीं लगता था। सांगानेर के बच्चों की इच्छा बागेश्वर धाम घूमने की थी। तीनों ने राखी वाले दिन ही वहां जाने का कार्यक्रम बना लिया।

14 अगस्त को घर से निकलने के बाद मोहित, नितिन और अरमान गांधी नगर स्टेशन पर मिले। यहां कपड़े बदलने के बाद बिना पूछताछ किए ही ट्रेन में चढ़ गए। रास्ते में पता चला कि ट्रेन बरेली जा रही है, तो वे रेवाड़ी उतर गए। यह भी सामने आया कि अरमान ने घूमने के लिए 400 रुपए में अपनी साइकिल बेच दी थी। वहीं रेवाड़ी में मोहित ने ई-मित्र पर आधार कार्ड दिखाकर खाते से 1300 रुपए निकाले। इसके बाद वे ट्रेन से बांदीकुई पहुंचे और 15 अगस्त को खजुराहो होते हुए बागेश्वर धाम पहुंच गए।

ये भी पढ़ें

Jaipur: ‘पत्रिका’ पढ़ पसीजा दिल…गलती का हुआ एहसास, घर लौट आए बच्चे, परिवार की तस्वीरें देख हुए भावुक

भंडारे में खाई खीर-पूड़ी, निःशुल्क मिला कमरा

बच्चे पांच दिन तक बागेश्वर धाम में रुके। यहां उन्हें भंडारे में खीर-पूड़ी मिली और रहने के लिए निःशुल्क कमरा। एक-दो बार माता-पिता के बारे में पूछा भी गया तो उन्होंने कहा कि वे तीनों साथ ही घूमने आए हैं।

रेलवे की बड़ी चूक

चौंकाने वाली बात यह रही कि, बच्चों की इस पूरी बेटिकट यात्रा में कहीं भी उनसे रेलवे टीटी या प्लेटफॉर्म पर टिकट नहीं मांगा गया। ऐसा होता तो वे पहले ही दिन पकड़ में आ जाते। 20 अगस्त को वे भरतपुर स्टेशन पहुंचे और रातभर रुके। 21 अगस्त को पिता के साथ काम करने वाले खलासी सुखवीर को फोन किया। सुखवीर ने उन्हें डीग बुलाया और वहां से तीनों को घर पहुंचाने के बाद बच्चों के पिता विजय सिंह को सूचना दी।

मोहित की थी हैंडराइटिंग

विजय सिंह पुलिस को जानकारी देने के बाद बच्चों को लेकर कुलदेवता के ढोक दिलवाने गए और शुक्रवार शाम जयपुर लौटे। मोहित ने बताया कि घर पर छोड़ा गया पत्र उसी की हैंडराइटिंग में था। घर वाले अब भी हैरान हैं कि जितनी मेहनत पत्र लिखने में की, उतनी पढ़ाई में करते तो शायद बात यहां तक नहीं पहुंचती। पिता विजय सिंह ने कहा-पढ़ाई के लिए टोकना अच्छा नहीं लगता था तो अब नहीं टोकेंगे।

ये भी पढ़ें

कहां हो मेरे लाल: जयपुर में मासूमों की गुमशुदगी और मौत से मातम, हर घर में पसरा सन्नाटा, परिजनों की आंखों में इंतजार

Published on:
23 Aug 2025 10:26 am
Also Read
View All

अगली खबर