
Rajasthan Night Shelter Reality Check (Patrika Photo)
जयपुर: कोटा में रैन बसेरों में अपर्याप्त व्यवस्थाओं के चलते लोग खुले में सोने को मजबूर हैं। कई लोगों के पास आधार कार्ड नहीं होने से रैन बसेरों में नहीं सो पा रहे हैं। कोटा में तापमान 8.8 डिग्री पर पहुंच गया।
पत्रिका टीम सोमवार रात को किशोर तालाब की पाल पर बनाए गए रैन बसेरे पहुंची तो वह खचाखच भरा हुआ था। ऐसे में करीब 24 श्रमिक रैन बसेरे के निकट तालाब की पाल पर खुले में सो रहे थे। रिक्शा चालक धन्नालाल ने बताया कि रैन बसेरे में जगह नहीं बचती, ऐसे में बाहर ही सोना पड़ता है। यहां ऊपर पुलिया की छत काफी नीचे है। ऐसे में सर्दी में गिरने वाले ओस से बच जाते हैं।
हमारे पास आधार कार्ड नहीं है। तलवंडी के रैन बसेरे में महिला और पुरुषों के लिए अलग-अलग सोने की व्यवस्था तो की गई थी, लेकिन इसके ठीक सामने महिलाएं बच्चों को लेकर फ्लाईओवर के नीचे सर्द रात में अलाव तापते हुए रात काटती नजर आई। रैन बसेरे में सोने के लिए पूछने पर शाहाबाद निवासी कालीबाई ने कहा कि आधार कार्ड नहीं है, इसलिए रैन बसेरे में नहीं घुसने देते।
भरतपुर में रेलवे स्टेशन पर सो रहे आगरा निवासी दिव्यांग रवि कुमार ने बताया कि आधार कार्ड नहीं है। इसलिए रैन बसेरे में मना कर दिया। हलैना के धर्मेंद्र मीणा ने बताया कि आधार कार्ड नहीं होने से रैन बसेरे में आसरा देने से मना कर दिया गया।
निगम के चारों आश्रय स्थलों में क्षमता के मुकाबले महज 50 प्रतिशत लोग ही ठहरे हुए हैं, जबकि पीबीएम अस्पताल परिसर में संचालित निजी आश्रय स्थल पूरी तरह भरे हुए हैं। इन सबके बीच, शहर के कई हिस्सों में अब भी परिवार खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर हैं। पीबीएम परिसर में संचालित आश्रय स्थल में सुरक्षा कारणों से आईडी प्रूफ जमा कराने के बाद ही ठहरने की अनुमति दी जाती है। ऐसे में लोग ठिठुरते हुए रात बिताने को मजबूर हैं।
भीलवाड़ा में सोमवार देर रात पत्रिका टीम ने शहर के रैन बसेरे का रियलिटी चेक की तो कहीं सुरक्षा के नाम पर ताले लटके थे, तो कहीं नशेड़ियों ने डेरा डाल रखा था। तेजाजी चौक के रैन बसेरे पर ताला लटका था। काशीपुरी अंडरपास समेत कई रैन बसेरे बंद मिले।
जोधपुर रैन बसेरे अव्यवस्थाओं से जूझ रहे हैं। स्टेशन रोड स्थित रैन बसेरे में क्षमता से अधिक लोगों के आने पर पूरे बिस्तर नहीं हैं। यहां नगर निगम की ओर से केवल 20 बिस्तरों की सुविधा दी गई है। एक ही बिस्तर पर दो-दो लोग सोने को मजबूर दिखे।
अलवर के कंपनी बाग स्थित रैन बसेरे में व्यवस्थाएं चाक-चौबंद मिली। यहां लोगों को साफ रजाई दी जाती है, जिसके पास आधार कार्ड नहीं है, उन्हें भी रात गुजारने की परमिशन देते हैं। लोगों को आश्रम स्थल तक ले जाने के लिए नि:शुल्क बसेरा वाहिनी का भी संचालन किया जा रहा है। ये वाहन खुले में सो रहे लोगों को तलाश करके आश्रय स्थल तक पहुंचाती है। पत्रिका टीम ने रात में जायजा लिया तो ये बेसरा वाहिनी शहर में घूमती मिली।
Published on:
06 Jan 2026 02:54 am
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