जयपुर

Jaipur: मेड इन जयपुर पतंगें उड़ाता है इंडिया, हवा में रंग भरने वालों की जेब में फिर भी उड़ता खालीपन

kite festival in Jaipur: जयपुर। मेड इन जयपुर पतंगें अब सिर्फ परकोटे तक सीमित नहीं रहीं, वे देश के अलग-अलग राज्यों के आसमान में रंग भर रही हैं। जगन्नाथ शाह का रास्ता पतंग उद्योग का ऐसा केंद्र बन गया है, जहां 400 से अधिक परिवार सालभर इस कला में जुटे रहते हैं।
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Jan 06, 2026
जयपुर का प्रतिष्ठित पतंग उद्योग, पत्रिका फोटो

kite festival in Jaipur: जयपुर। मेड इन जयपुर पतंगें अब सिर्फ परकोटे तक सीमित नहीं रहीं, वे देश के अलग-अलग राज्यों के आसमान में रंग भर रही हैं। जगन्नाथ शाह का रास्ता पतंग उद्योग का ऐसा केंद्र बन गया है, जहां 400 से अधिक परिवार सालभर इस कला में जुटे रहते हैं। कई लोगों का यह पुश्तैनी कारोबार है।

पतंग उद्योग से कई परिवारों को रोजगार मिल रहा है। यहां की बनी पतंगें मध्य भारत में मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ से लेकर पूर्व में बंगाल से पश्चिम में गुजरात तक और दक्षिण में तमिलनाडु से उत्तर में पंजाब के आसमां तक में परवाज भरती हैं।

मोहल्ला-ए-पतंग उद्योग

जगन्नाथ शाह का रास्ता में हांडीपुरा, मोहल्ला मोमिनान, मोहल्ला नाहरवाड़ा, मोहल्ला चीतावालान, मोहल्ला पेगान व साहू का मोहल्ला में घर-घर में पतंग बनाने का काम हो रहा है। पतंग कारीगर मोहम्मद गफूर खान ने बताया कि पहले छोटी-छोटी पतंगें बनाते थे, अब बड़ी पतंगें अधिक बन रही हैं। पहले एक पतंग को एक आदमी ही तैयार कर लेता था, अब एक पतंग 7-8 लोगों के हाथों से होकर निकलती है, तब वह तैयार होती है। यह आजीविका का माध्यम बना हुआ है।

हजार पतंगों पर 400 से 600 तक मेहनताना

जिन हाथों से ये उड़ान मिलती है, वे अब भी ज़मीन से जुड़े हैं। व्यापारी पतंग बनवाने के लिए कच्चा माल लाकर देते हैं। कारीगर को एक हजार फैंसी पतंग बनाने पर 600 से 700 रुपए और सादा पतंग बनाने पर 400 से 500 रुपए मिल रहे हैं। साढ़े 21 इंच से लेकर 42 इंच की पतंगें अधिक बन रही हैं। सरकारें कहती हैं कि हुनर को बढ़ावा देंगे, लेकिन पतंग बनाने वालों का कहना है कहते हैं कि हम हवा में रंग तो भरते हैं, मगर जेब में खालीपन ही उड़ता है।

यूं आकार लेती है पतंग

पतंग का कागज मुंबई से आता है, जबकि ठड्डा (बांस की कांप) कोलकाता से आ रहा है। सबसे पहले कागज की कटिंग कर उसे डिजाइन दी जाती है। उसके बाद महिलाएं डोरा डालकर कागज की जुड़ाई का काम करती हैं। फिर उसमें कांप डाला जाता है। सबसे आखिरी में पतंग में पत्ता लगाने का काम होता है।

बरेली के बाजार में…

पतंग कारीगरों ने बताया कि मकर संक्रांति पर शहर में बरेली व अहमदाबाद की पतंगें भी उड़ती है, वैसे ही वहां पर भी पतंग उत्सव में जयपुर की पतंगें जाती हैं। वहां भी लोग जयपुर की पतंगों को पंसद करते हैं।

कब, कहां उड़ती हैं पतंगें

राज्यप्रमुख शहरपर्वतिथि
राजस्थानजयपुर, बीकानेर, जोधपुरमकर संक्रांति, आखा तीज, रक्षाबंधनक्रमशः
गुजरातअहमदाबाद, सूरत, वडोदराउत्तरायण (मकर संक्रांति)14 जनवरी
दिल्लीदिल्लीस्वतंत्रता दिवस15 अगस्त
पंजाबलुधियाना, अमृतसरलोहड़ी13 जनवरी
तमिलनाडुचेन्नई, मदुरैपोंगल14–17 जनवरी
मध्य प्रदेशइंदौर, उज्जैनमकर संक्रांति14 जनवरी
उत्तर प्रदेशबरेली, वाराणसी, लखनऊमकर संक्रांति, स्थानीय मेले14 जनवरी (मुख्य)
महाराष्ट्रमुंबई, पुणेमकर संक्रांति14 जनवरी
हरियाणारोहतक, हिसारमकर संक्रांति14 जनवरी
पश्चिम बंगालकोलकातावसंत पंचमी, सरस्वती पूजाजनवरी–फरवरी (तिथि परिवर्तनीय)

कारीगर ये बोले

अभी जयपुर व पंजाब के लिए पतंगे बना रहे हैं। मकर संक्रांति के बाद बीकानेर का सीजन शुरू हो जाएगा। उसके बाद दिल्ली के लिए पतंगें बनाने लग जाएंगे। ऐसे सालभर पतंग बनाने का काम करते हैं।

-रामस्वरूप साहू, पतंग कारीगर

Updated on:
06 Jan 2026 01:50 pm
Published on:
06 Jan 2026 10:33 am