जयपुर

Rajasthan University: राजस्थान विश्वविद्यालय में पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में बड़ा बदलाव, इस बार नहीं होगी लिखित परीक्षा

Rajasthan University PHD Admission: राजस्थान विश्वविद्यालय में पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए इस बार लिखित परीक्षा हटा दी गई है। अब अभ्यर्थियों का चयन नेट स्कोर और इंटरव्यू के आधार पर किया जाएगा।

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Mar 30, 2026
राजस्थान विश्वविद्यालय। फाइल फोटो- पत्रिका

जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय में पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। इस बार विश्वविद्यालय प्रशासन ने लिखित प्रवेश परीक्षा को समाप्त करते हुए सीधे इंटरव्यू के आधार पर प्रवेश देने का निर्णय लिया है, जिससे हजारों अभ्यर्थियों के लिए नई राह खुल गई है।

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सीटों की संख्या 400 से अधिक

विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रोफेसर अल्पना कटेजा ने प्रवेश प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक समिति का गठन किया है। समिति ने सभी विभागों को रिक्त पीएचडी सीटों का विवरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। विश्वविद्यालय अधिकारियों के अनुसार इस वर्ष विभिन्न विभागों में कुल सीटों की संख्या 400 से अधिक रहने की संभावना है। अप्रैल माह तक रिक्त सीटों का पूरा आंकलन कर आवेदन प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

जल्द शुरू होंगे प्रवेश

कुलगुरु ने बताया कि पीएचडी प्रवेश जल्द शुरू किए जाएंगे और प्रयास है कि जून तक पूरी प्रक्रिया पूर्ण कर ली जाए, ताकि नए शैक्षणिक सत्र से शोध कार्य शुरू हो सके। इस वर्ष प्रवेश प्रक्रिया यूजीसी के नए नियमों के अनुसार नेट स्कोर और इंटरव्यू के आधार पर होगी। नए नियमों के तहत केवल वही अभ्यर्थी पात्र होंगे जिन्होंने यूजीसी नेट, सीएसआईआर नेट या जेआरएफ परीक्षा उत्तीर्ण की है।

अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा

इसके अलावा यूजीसी नेट, यूजीसी-सीएसआईआर नेट, गेट, सीड जैसे राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में प्राप्त पर्सेंटाइल के आधार पर अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। प्रत्येक विभाग में घोषित सीटों की संख्या के दोगुने अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए आमंत्रित किया जाएगा। इंटरव्यू कुल 100 अंकों का होगा।

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कई अभ्यर्थियों की जेआरएफ पात्रता समाप्त

वहीं, पिछले दो वर्षों से प्रवेश प्रक्रिया में देरी के कारण कई अभ्यर्थियों की जेआरएफ पात्रता समाप्त हो चुकी है, जिससे उन्हें निजी विश्वविद्यालयों का रुख करना पड़ा। इस कारण 2024 और 2025 शैक्षणिक सत्र ‘जीरो सेशन’ घोषित होने की स्थिति में पहुंच गए हैं। इसी बीच, पिछले वर्ष अगस्त में विश्वविद्यालय की अकादमिक परिषद ने शोधार्थियों को पढ़ाई के साथ नियमित कक्षाएं लेने की अनुमति देने की सिफारिश भी की थी। इसका उद्देश्य फैकल्टी की कमी को दूर करना और शैक्षणिक गुणवत्ता को मजबूत करना है, क्योंकि वर्तमान में 60 प्रतिशत से अधिक शिक्षण पद रिक्त हैं।

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