Ganpat Singh Murder: जालोर के मांडोली में 18 माह पुराने गणपतसिंह हत्याकांड का पुलिस ने खुलासा कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि ब्लैकमेलिंग के चलते इस वारदात को अंजाम दिया गया।
जालोर। मांडोली में बहुचर्चित गणपतसिंह हत्याकांड का पुलिस ने 18 माह की लंबी मशक्कत के बाद मंगलवार को चौंकाने वाला खुलासा किया। मामला ब्लैकमेलिंग से जुड़ा हुआ सामने आया है। पुलिस ने वारदात में मांडोली निवासी गजेंद्रसिंह राजपूत, वागाराम भील और लच्छु देवी पत्नी सवाराम चौधरी को गिरफ्तार किया है।
पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि महिला लच्छु देवी और गजेंद्रसिंह के पिता सुरेंद्रसिंह के बीच अवैध संबंध थे, जिनके आधार पर मृतक गणपतसिंह उन्हें ब्लैकमेल कर रहा था। यही उसकी हत्या का कारण बना। इस प्रकरण में पुलिस गजेंद्रसिंह के पिता की भूमिका, खातों में संभावित लेनदेन और वारदात में अन्य किसी की भूमिका की जानकारी जुटा रही है।
गठित टीम ने मामले के खुलासे के लिए करीब 150 संदिग्धों से पूछताछ की। संदिग्धों की कॉल डिटेल का पुनः विश्लेषण करने के बाद गजेंद्रसिंह राजपूत, वागाराम भील और लच्छु देवी चौधरी को हिरासत में लेकर गहन पूछताछ की गई। पूछताछ में तीनों ने वारदात करना स्वीकार कर लिया।
अनुसंधान अधिकारी भूपेंद्रसिंह ने बताया कि संदिग्धों पर नजर रखने पर उनके बीच आपसी कनेक्शन सामने आया। आरोपियों को आशंका थी कि गणपतसिंह के पास एक कथित वीडियो क्लिप है। मुख्य आरोपी गजेंद्रसिंह को शक था कि यह क्लिप महिला और उसके पिता से जुड़ी हो सकती है। पुलिस जांच में महिला और गजेंद्रसिंह के पिता सुरेंद्रसिंह के संबंधों की जानकारी भी सामने आई। पुलिस के अनुसार इसी आधार पर गणपतसिंह उन्हें ब्लैकमेल कर रहा था।
अनुसंधान अधिकारी के अनुसार महिला का घर गणपतसिंह की दुकान के सामने ही है। वह शाम को दुकान पर पहुंची और उसे 27 अगस्त की रात 8 बजे घटना स्थल पर बुलाया। रात में गणपतसिंह वहां पहुंचा, जहां पहले से मौजूद गजेंद्रसिंह से उसकी कहासुनी हुई। इसके बाद गजेंद्रसिंह और वागाराम ने मिलकर उसकी हत्या कर दी। मामले में हत्या में प्रयुक्त हथियार की बरामदगी के प्रयास किए जा रहे हैं।
वर्ष 2024 से मामले के खुलासे की मांग को लेकर लगातार धरना-प्रदर्शन होते रहे, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। मृतक की 80 वर्षीय मां हवा कंवर, पत्नी भारती कंवर सहित अन्य परिजन 27 फरवरी को धरने पर बैठे और बाद में भूख हड़ताल शुरू की। 6 वर्षीय पुत्र भी इसमें शामिल हुआ। 13 मार्च को कलेक्ट्रेट के सामने उग्र प्रदर्शन हुआ और 14 मार्च से क्रमिक अनशन शुरू हुआ। इसके बाद पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए 15 और 16 फरवरी को आरोपियों को डिटेन कर पूछताछ की, जिसमें मामले का खुलासा हुआ।
हत्या की रात गणपतसिंह अपनी दुकान से शराब की दुकान तक गया था। उस रात उस क्षेत्र में करीब 300 लोगों की लोकेशन सामने आई। ऐसे में आरोपियों तक पहुंचना पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण था। लंबी जांच के बाद पुलिस को सफलता मिली। मृतक के भाई कल्याणसिंह ने 28 अगस्त को रिपोर्ट दी कि उसका भाई 27 अगस्त 2024 की रात 7.30 बजे मोटरसाइकिल लेकर दुकान से निकला था। अगले दिन मांडोली के कोलाया नाडा जाने वाले ग्रेवल मार्ग पर उसकी मोटरसाइकिल के साथ शव मिला। उसके सिर पर गंभीर चोट कर हत्या की गई थी।
मामले के खुलासे के बाद शिव विधायक रविंद्रसिंह भाटी ने वीडियो कॉल के जरिए मृतक की मां और पत्नी से बात कर भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील की। बाद में रानीवाड़ा के पूर्व विधायक नारायणसिंह देवल, भाजपा नेता रवींद्रसिंह बालावत, दिलीपसिंह मांडाणी, करणसिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधियों की समझाइश के बाद हड़ताल समाप्त करवाई गई। दिलीपसिंह मांडाणी ने पीड़ित परिवार को 1 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता और पुत्र को नौकरी देने की मांग की।
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प्रारंभिक पूछताछ में महिला और गजेंद्रसिंह के पिता के बीच अवैध संबंध सामने आए हैं। इसी आधार पर गणपतसिंह द्वारा ब्लैकमेलिंग की जा रही थी। मोबाइल डेटा रिकवर किया जाएगा और खातों की भी जांच की जा रही है कि कोई लेनदेन हुआ या नहीं। अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच जारी है।