Suspended Lecturer Suicide: जालोर के सस्पेंड व्याख्याता मनोहर लाल भादू ने जयपुर में ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली। आत्महत्या से पहले उन्होंने दोस्तों को भेजे संदेशों में एसओजी की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए।
जालोर। मूल रूप से करड़ा थाना क्षेत्र के खारा गांव निवासी सस्पेंड व्याख्याता मनोहर लाल भादू ने जयपुर के महेश नगर इलाके में ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली। मनोहर ने आत्महत्या से पूर्व अपने दोस्तों को ग्रुप में मैसेज करते हुए एसओजी की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाए। मैसेज में लिखा कि उसे जबरन फंसाया गया।
बता दें कि मनोहर रीट-2021 भर्ती परीक्षा में डमी कैंडिडेट बैठाने के मामले में कार्रवाई के बाद निलंबित चल रहा था। आरोपी की पोस्टिंग जालोर जिले के भीनमाल में थी। वर्तमान में मनोहरलाल महेश नगर में किराए के मकान में रहकर दूसरी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा था।
आत्महत्या से पहले मनोहर ने अपने दोस्त को व्हाट्सएप पर सुसाइड नोट भेजा, जिसमें एसओजी अधिकारी श्याम सुंदर विश्नोई (वर्तमान जांच अधिकारी, अजमेर) और मुकेश सोनी पर पैसे मांगने के गंभीर आरोप लगाए हैं। सुसाइड नोट में लिखा कि पुलिस ने मेरी इरादतन हत्या कर दी। एसओजी ने मुझे उस भट्टी में डाल दिया, जहां रोज नए खुलासे हो रहे थे। जिन मामलों में मेरा नाम घसीटा जा रहा है, उनमें मैं कहीं भी शामिल नहीं हूं।
एसओजी ने चित्तौड़गढ़ स्थित मेवाड़ यूनिवर्सिटी से फर्जी डिग्री बनवाने में सहयोग के आरोप में मनोहर लाल को जुलाई 2024 में गिरफ्तार किया था। इस संबंध में अजमेर के सिविल लाइंस थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी।
मैं मरा नहीं हूं, पुलिस नाम की चीज ने मेरी इरादतन हत्या कर डाली। एसओजी के जोशीले तेवर ने मुझे उस भट्टी में डाल दिया, जहां नित-रोज खुलासे हो रहे थे, लेकिन मैं इन मामलों में इतना शरीक नहीं था। हां, कुछ गलतियां थीं, वर्ष 2022 या उससे पहले की। अब मेरा जीवन नए सवेरे की तरह था। लेकिन… बात यह है।
अजमेर एसओजी ब्रांच में दर्ज रमेश कुमार (हिंदी विषय ग्रेड-2) की एफआईआर में मेरा कोई नाम नहीं है। उसके बाद रमेश के गिरफ्तार होने पर उसके चालान में भी मेरा कहीं नाम नहीं था। उस समय के जांच अधिकारी मुकेश सोनी ने मेरे बारे में 6-7 जनों से पूछा, जो उस समय कार्रवाई में पकड़े गए थे (जैसे डॉ. सुरेश, शैलेश खींचड़ आदि और भी नाम हैं) कि मनोहर कौन है, इसके पास कितना पैसा है, यह अब क्या करता है। इन्होंने मुझसे रुपए ऐंठने की खूब कोशिश की, लेकिन मेरे पास कितना रुपया है, यह सब जानते हैं। मैं पिछले चार साल से प्रतिमाह दोस्तों से 5 हजार से 20 हजार रुपए तक की मदद लेता आया हूं।
तब तक उसका ट्रांसफर हो गया और मामला सालभर के लिए ठंडे बस्ते में चला गया। लेकिन जब रमेश राणा के चालान में दिनेश कुमार (वर्तमान पदस्थापित केवीएस टीचर टीजीटी हिंदी, जम्मू-कश्मीर) गिरफ्तार हुआ, तब उससे मेरा नाम उगलवाया गया।
श्याम सुंदर विश्नोई (हाल जांच अधिकारी, अजमेर एसओजी) को मुकेश सोनी ने स्पष्ट व्हाट्सएप कॉल पर कहा कि इस मामले में मनोहर भादू के अलावा किसी का नाम मत डालना। उसको चार मामलों में घसीट सकते हो, उससे डरा-धमकाकर कुछ भी करवा सकते हो। मैं उसे पकड़ लेता, लेकिन तब तक मेरा ट्रांसफर हो गया। इसके बाद श्याम सुंदर ने जबरन मेरा नाम दो और मामलों में डलवाया। देखिए कि मूल कैंडिडेट कहीं भी मेरा नाम नहीं ले रहा है और नीचे से मुझे मल्टी एंगल तरीके से आरोपी बनाया जा रहा है।
पहली बार मुझे जब मेरा खुद का एग्जाम देते पकड़ा गया (सितंबर 2021), तब से लेकर मेरी तीसरी चार्जशीट तक मेरे पर सभी आरोप लगाए गए। उसमें यह बयान देख लो कि मनोहर लाल को एग्जाम देते पाया गया। मुझे बाहर से उठाकर मुल्जिम बनाया जाता रहा और आज भी वह सिलसिला खत्म नहीं हुआ है।
आप लोग मेरे घर जाकर मेरी मां-बाप, मेरे पांचों प्यारे लाड़ले बच्चे (तीन मेरे और दो भाई के), पत्नी, भाई रमेश-भाभी और तीनों बहनों (एलची, गंगा और बबीता) की हालत देख लेना। उचित लगे तो इस कच्ची उम्र की मौत के बदले घर वालों को न्याय दिलवाना। मेरी मां, तू चिंता मत करना, जरूर न्याय मिलेगा। मेरी व्याख्याता पोस्ट पर किसी न किसी को अनुकंपा मिलनी चाहिए, वरना 70-80 वर्ष की उम्र के मां-बाप का क्या होगा।
डियर रमेश भाई, हम खूब लड़ते थे, मगर प्यार से। कोई ना, परिवार से मिलजुलकर प्रेम से रहना। यहां आकर रोना आ रहा है मुझे। हाथ कांप रहे हैं, लेखनी ठहर रही है या कलम की स्याही खत्म हो रही है, वह ईश्वर जानता है।
एक बात पुनः कहना चाहता हूं, मेरा शरीर समाप्त हुआ है, लेकिन आत्मा में मुझे याद रखना। मैं हाजिर मिलूंगा। यह ब्रह्मांड असीम है और इसी में आगे समाहित रहूंगा। कहीं नहीं जा सकता, क्योंकि मेरा व्हील पावर आज भी बच्चों जैसा है। भला मेरी आत्मा को कैसे शांति मिल सकती है। मेरे खूब अच्छे मित्र हैं, सब अच्छी नेक नियति के हैं, आपको भविष्य में सपोर्टिव रखेंगे। मित्रों, मैं अपने घर के 20 सदस्यों में अकेला था, जो सबको लेकर चलता था। आप मेरी जगह लेकर बच्चों का भविष्य उज्ज्वल करना। मेरे सभी बच्चे पढ़ाई में टैलेंट रखते हैं, आजमाकर देखना। यह मेरा वादा है, भूलना मत। यह बच्चे बड़े होकर आपका एहसान जरूर चुकाएंगे।
मेरी क्षमता छीन ली गई, खत्म कर दी गई। अब मेरे हाथ में कुछ नहीं है, वरना इतना बड़ा पाप करने जा रहा हूं, शर्म की बात है। मैं इतना कमजोर नहीं हूं, लेकिन गलत तरीके से मुझ पर लगाए गए आरोप सहन नहीं हो रहे। आरोप तो पहले भी थे, उनसे मैं नहीं मरा। रही कसर कोर्ट-कचहरी के खर्चे, इस महंगाई में अब संभव नहीं है। विकट हालात के साथ बढ़ती आर्थिक समस्याएं, ऊपर से इतने केस डाल दिए कि हर 10-20 दिन में एक कोर्ट तारीख। अकेला इंसान क्या करे।
मैं मरा नहीं हूं, क्योंकि पुलिस नाम की चीज ने मेरी इरादतन हत्या कर डाली। पुलिस ने ऐसा औरों के साथ भी किया है। 3-4 ऐसे लोग हैं, जिनकी कोई गलती नहीं थी। विश्वास नहीं हो तो सेंट्रल जेल जाकर देख लेना। बार-बार इनके हाथों मरने से बेहतर है एक बार खुद ही खत्म हो जाना।
व्हाट्सएप ग्रुप चैट के दौरान मनोहरलाल की ओर से शाम 6.02 बजे ये मैसेज ग्रुप में डाला गया। इसके बाद 6.05 बजे एक ग्रुप सदस्य ने लिखा कि ऐसा मत करो, पागल हो क्या, मैं हूं ना साथ, सब मानेंगे, हो जाएगा, ऐसे मत लिखो मनसा। बताया जा रहा है कि ग्रुप के कई सदस्यों ने कॉल कर अनहोनी को टालने का प्रयास भी किया, लेकिन मनोहर ने एक नहीं सुनी और लगभग शाम 7 बजे ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली।
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घटनाक्रम के विरोध में गुरुवार को परिजन और मनोहर के परिचित जयपुर पहुंचे। इस दौरान आरोपी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने तक शव उठाने से इनकार किया गया। आरोप लगाया गया कि नकल के हर मामले में मनोहर को जबरन घसीटा जा रहा था, जिससे आहत होकर मनोहरलाल ने आत्महत्या कर ली।