Jalore Railway News: बाकरारोड रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों के ठहराव और सुविधाओं की मांग को लेकर ग्रामीणों ने आवाज उठाई है। इस संबंध में ग्रामीणों का प्रतिनिधिमंडल जयपुर में मंत्री किरोड़ीलाल मीणा से मिलकर ज्ञापन सौंपा।
जालोर। समदड़ी-भीलड़ी ब्रॉडगेज रेलखंड के बाकरारोड रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों के ठहराव और सुविधाओं की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। क्षेत्र के ग्रामीणों ने इस संबंध में जयपुर पहुंचकर मंत्री किरोड़ीलाल मीणा को ज्ञापन सौंपा।
मीटर गेज से वर्ष 2010 में ब्रॉडगेज में परिवर्तित हुए इस महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन पर एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनों के ठहराव के साथ कम्प्यूटरीकृत आरक्षण विंडो शुरू करने की मांग को लेकर बाकरारोड समेत आसपास के 20 से अधिक गांवों के ग्रामीणों का प्रतिनिधिमंडल जयपुर में मंत्री किरोड़ीलाल मीणा से मिला। ग्रामीणों ने ज्ञापन में बताया कि मीटर गेज के समय भी यह स्टेशन काफी महत्वपूर्ण था और सायला क्षेत्र तक के यात्री इसी स्टेशन से यात्रा करते थे।
ब्रॉडगेज होने के बाद क्षेत्रवासियों को उम्मीद थी कि बाकरारोड एक प्रमुख स्टेशन के रूप में विकसित होगा, लेकिन लंबी दूरी की ट्रेनों का ठहराव नहीं होने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ज्ञापन में बताया गया कि मीटर गेज के समय यहां स्टेशन मास्टर और एएसएम के पद भी स्वीकृत थे। साथ ही आमान परिवर्तन से पहले यहां मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव होता था।
ग्रामीणों ने बताया कि इस क्षेत्र में मंडी होने के कारण बाकरारोड स्टेशन पहले एग्रो हब के रूप में भी पहचान रखता था। इसके अलावा यहां पारसनाथ भगवान का प्रसिद्ध जैन तीर्थ, अन्य धार्मिक स्थल और गोसंवर्धन केंद्र भी स्थित हैं, जिससे यहां यात्रियों की आवाजाही बनी रहती है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि बाकरारोड और आसपास के गांवों के अधिकांश लोग व्यापार और मजदूरी के लिए गुजरात, महाराष्ट्र सहित दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों में निवास करते हैं। करीब 50 प्रतिशत लोग बाहर रहते हैं और उनकी आवाजाही का मुख्य साधन यही रेलवे स्टेशन है। साथ ही स्थानीय लोग धानेरा, डीसा, पालनपुर और पाटण जैसे शहरों में चिकित्सा सेवाओं के लिए भी इसी रेलमार्ग पर निर्भर हैं।
ग्रामीणों ने चैन्नई-भगत की कोठी, जोधपुर-दादर, यशवंतपुर-बाड़मेर एक्सप्रेस, जोधपुर-साबरमती सुपरफास्ट, जैसलमेर-साबरमती और भगत की कोठी-दादर ट्रेनों के ठहराव की मांग रखी। इस दौरान जितेंद्रदास वैष्णव, ओटसिंह राजपुरोहित, खेतसिंह सोलंकी, अमरसिंह, राणसिंह और नारायणसिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।