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Jodhpur: जोधपुर में 9,500 से ज्यादा मकानों पर नहीं चलेगा बुलडोजर! प्रशासन ने तलाशा नया रास्ता, लोगों को मिली राहत

Jodhpur Encroachment News: शहर के सात वनखंडों में फैले 210.43 हेक्टेयर अतिक्रमण को लेकर प्रशासन ने अब वनभूमि डायवर्जन का रास्ता तलाशना शुरू किया है। न्यायालय के निर्देश के बाद 28 अप्रेल तक वन विकास योजना पेश करने की तैयारी से इस मुद्दे पर हलचल तेज हो गई है।

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जोधपुर

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Rakesh Mishra

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नंदकिशोर सारस्वत

Apr 02, 2026

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रावटी वन क्षेत्र में वनविभाग की सुरक्षा दीवार के भीतर बने मकान। फाइल फोटो- पत्रिका

जोधपुर। शहर के सात वनखंडों में अतिक्रमित करीब 210.43 हेक्टेयर वनभूमि को डायवर्जन प्रस्ताव के माध्यम से मुक्त कराने के लिए अब प्रशासन ने वनभूमि डायवर्जन का रास्ता तलाशना शुरू कर दिया है। न्यायालय के निर्देशों के बाद राज्य सरकार को 28 अप्रेल तक प्रस्तावित वन विकास योजना रिकॉर्ड पर प्रस्तुत करनी है, जिससे इस दिशा में हलचल तेज हो गई है।

हालांकि इस पूरी प्रक्रिया में कानून के सख्त प्रावधान, पर्यावरणीय स्वीकृतियां, सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश, बहु-स्तरीय प्रशासनिक प्रक्रिया और बराबर क्षेत्रफल की वैकल्पिक भूमि की व्यवस्था जैसी व्यावहारिक परेशानियां सबसे बड़ी चुनौती होंगी। बता दें कि वन विभाग के अनुसार शहर के सात प्रमुख वनखंडों में वनभूमि पर अतिक्रमण कर कुल 9,526 मकान बन चुके हैं, जिन्हें हटाया जाना प्रस्तावित था। फिलहाल नई पहल से लोगों ने राहत की सांस ली है।

राज्य सरकार को वनभूमि उपयोग बदलने का अधिकार नहीं

वनभूमि डायवर्जन कोई आसान प्रक्रिया नहीं है। वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के तहत राजस्थान सरकार को भी किसी भी वनभूमि का उपयोग बदलने का अधिकार नहीं है। इसके लिए केन्द्र सरकार की पूर्व मंजूरी अनिवार्य होती है। साथ ही जितनी भूमि का डायवर्जन किया जाएगा, उतनी ही जमीन अन्य स्थान पर वन विभाग को देनी होगी और उपयोगकर्ता एजेंसी (नगर निगम अथवा जेडीए) को प्रति हेक्टेयर लाखों रुपए एनपीवी (नेट प्रजेंट वैल्यू) के रूप में वन विभाग में जमा कराने होंगे।

क्या है वनभूमि डायवर्जन

वन संरक्षण अधिनियम 1980 के तहत वनभूमि के गैर-वानिकी उपयोग के लिए एक निर्धारित ऑनलाइन प्रक्रिया अपनाई जाती है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के 'रिवेश पोर्टल 2.0' पर आवेदन कर आवश्यक दस्तावेज अपलोड किए जाते हैं। उप वन संरक्षक की ओर से जांच के बाद प्रस्ताव प्रधान मुख्य वन संरक्षक (नोडल) को भेजा जाता है। उच्च स्तर पर सभी औपचारिकताओं व निरीक्षण के बाद सक्षम प्राधिकारी की ओर से वनभूमि उपयोग की अंतिम स्वीकृति प्रदान की जाती है।

डायवर्जन के प्रमुख नियम

  • केन्द्र सरकार की पूर्व मंजूरी जरूरी।
  • बराबर भूमि पर पुनर्वनीकरण अनिवार्य।
  • प्रति हेक्टेयर एनपीवी राशि जमा।

जोधपुर में वनभूमि की स्थिति

  • कुल वन क्षेत्र: 23664.51 हेक्टेयर।
  • राजस्व रिकॉर्ड में वन विभाग के नाम से वंचित: 13750.78 हेक्टेयर।
  • राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज वन क्षेत्र: 10619.95 हेक्टेयर।
  • करीब 210.43 हेक्टेयर वनभूमि पर 9,526 अतिक्रमण।

न्यायालय के निर्देशानुसार वन सुरक्षा दीवार के भीतर अतिक्रमण हटाए जाएंगे। अतिक्रमण के वैकल्पिक वनीकरण के प्रस्ताव के संबंध में जिला प्रशासन के सहयोग से आकलन कर आगामी 28 अप्रेल तक विधिसम्मत प्रकरण तैयार कर प्रस्तुत किया जाएगा। अतिक्रमण से प्रभावित 210.43 हेक्टेयर वनभूमि के डायवर्जन प्रस्ताव के लिए लैंड बैंक से भूमि चिह्नित की जाएगी।

  • एन. एस. शेखावत, उप वन संरक्षक

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