BSP Candidate Declared: पूर्वांचल में बसपा सुप्रीमो मायावती ने सियासी पत्ते खोलने शुरू कर दिए हैं। जानिए जुल्फेकार अहमद गामा के बारे में जिन्हें शाहगंज सीट से प्रत्याशी बनाया गया है।
BSP Candidate Declared:बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने आगामी चुनावों को लेकर अपनी तैयारियां तेज करते हुए उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसी क्रम में पार्टी ने BJP और सपा (समाजवादी पार्टी) से पहले जौनपुर की अहम शाहगंज विधानसभा सीट से अपने प्रत्याशी के नाम का ऐलान कर चुनावी बिगुल फूंक दिया है।
पार्टी ने जुल्फेकार अहमद गामा को शाहगंज सीट से आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया है। जौनपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रयागराज, वाराणसी और अयोध्या मंडल के जोन इंचार्ज दिनेश चंद्रा ने इसकी औपचारिक घोषणा की।
कार्यक्रम में दिनेश चंद्रा ने कहा कि बसपा सुप्रीमो मायावती के निर्देशानुसार जुल्फेकार अहमद गामा को प्रत्याशी बनाया गया है।उन्होंने कहा कि गामा में सर्वसमाज को साथ लेकर चलने की क्षमता है और वे बहुजन समाज के साथ-साथ सभी वर्गों के बीच मजबूत पकड़ रखते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर और कांशीराम के सपनों को साकार करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है।
जुल्फेकार अहमद गामा मूल रूप से आजमगढ़ के पवई थाना क्षेत्र के गोधना गांव के निवासी हैं। वे लंबे समय से बसपा की नीतियों से जुड़े रहे हैं और शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका के लिए भी जाने जाते हैं। बताया जा रहा है कि कुछ समय पहले ही उन्हें शाहगंज विधानसभा सीट का प्रभारी बनाया गया था और अब पार्टी ने उन पर चुनावी दांव लगाया है।
उम्मीदवार घोषित होने के बाद गामा ने पार्टी नेतृत्व का आभार जताते हुए कहा कि पार्टी ने उन पर जो भरोसा जताया है, उसे पूरी निष्ठा से निभाएंगे। उन्होंने कहा कि वे मायावती के विकासवादी विजन को घर-घर तक पहुंचाने का काम करेंगे और शाहगंज सीट पर जीत दर्ज करने के लिए पूरी ताकत से चुनाव लड़ेंगे।
एक ओर बसपा नए चेहरों को मौका दे रही है, तो दूसरी ओर संगठन में अनुशासन को लेकर भी सख्त रुख अपनाती दिख रही है। पार्टी ने वरिष्ठ नेता और पूर्व MLC धर्मवीर सिंह अशोक को पार्टी से निष्कासित कर दिया है।
जानकारी के मुताबिक, बुलंदशहर जिलाध्यक्ष रविंद्र प्रधान की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि धर्मवीर सिंह अशोक लंबे समय से पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त पाए गए थे। आदेश में यह भी कहा गया कि उन्हें कई बार चेतावनी दी गई, लेकिन व्यवहार में सुधार न होने पर पार्टी की गरिमा को ध्यान में रखते हुए निष्कासन का फैसला लिया गया।
मायावती के इन फैसलों से संकेत मिल रहे हैं कि बसपा आगामी चुनाव में दोहरी रणनीति पर काम कर रही है—एक तरफ नए चेहरों पर भरोसा, दूसरी ओर संगठन के भीतर अनुशासन पर सख्ती। राजनीतिक जानकार इसे बसपा की चुनावी सक्रियता और संगठनात्मक मजबूती की दिशा में अहम कदम मान रहे हैं।