Third Language In Class 6th: सीबीएसई ने नई शिक्षा नीति के तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 से छठवीं कक्षा में तीसरी भाषा को अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश जारी किए हैं। बोर्ड ने सभी स्कूलों को 31 मई तक ओएसिस पोर्टल पर भाषा विकल्प अपडेट करने के लिए कहा है।
CBSE New Curriculum: केंद्रीय शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने छठवीं कक्षा में तीसरी भाषा (आर-3) लागू करने पर सख्ती दिखाई है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 से यह व्यवस्था अनिवार्य रूप से लागू होगी। सभी स्कूलों को 31 मई तक ओएसिस पोर्टल पर अपनी तीसरी भाषा का चयन अपलोड या संशोधित करना होगा। सीबीएसई ने तीन-भाषा फार्मूला (आर-1, आर-2, आर-3) को अनिवार्य बताया है।
बोर्ड का कहना है कि इनमें से कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना आवश्यक है। जिन स्कूलों ने निर्धारित समय सीमा तक अपनी जानकारी अपडेट नहीं की है, उन्हें 1 जुलाई, 2026 से यह व्यवस्था शुरू करनी होगी। बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालयों को इस प्रक्रिया की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जो स्कूल इस प्रक्रिया को पूरा नहीं कर पाए हैं, उनके खिलाफ क्षेत्रीय कार्यालयों के जरिए कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
बोर्ड ने यह भी बताया है कि भारतीय भाषाओं के लिए एनसीईआरटी स्वीकृत पुस्तकें 1 जुलाई, 2026 तक उपलब्ध करा दी जाएंगी। यदि कोई स्कूल राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा-स्कूली शिक्षा (एनसीएफ-एसई) 2023 से बाहर की भाषा चुनता है, तो उसे सीखने के परिणाम (लर्निंग आउटकम) का पालन करना होगा। यह निर्देश अप्रेल 2026 को जारी सर्कुलर के बाद आया है। कुछ स्कूलों ने तीसरी भाषा का विकल्प पहले ही पोर्टल पर अपलोड कर दिया है, जबकि कुछ अभी भी प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए हैं।
सीबीएसई ने यह भी स्पष्ट किया है कि चयनित तीसरी भाषा पाठ्यक्रम का एक अभिन्न हिस्सा होगी और इसके लिए निर्धारित मूल्यांकन प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। यह कदम छात्रों को अपनी पसंद की एक अतिरिक्त भाषा सीखने का अवसर प्रदान करेगा, जिससे उनकी भाषाई दक्षता और सांस्कृतिक समझ में वृद्धि होगी।
स्कूल प्राचार्यों को निर्देश दिया गया है कि वे अभिभावकों और छात्रों को इस संबंध में पूरी जानकारी प्रदान करें ताकि चयन प्रक्रिया सुचारु रूप से संपन्न हो सके। बोर्ड ने सभी संबद्ध विद्यालयों से इन निर्देशों का सख्ती से पालन करने का आग्रह किया है। यह सुनिश्चित किया जाना है कि सभी छात्र समय पर अपनी तीसरी भाषा का विकल्प चुन लें, जिससे उन्हें शिक्षा नीति के लाभ मिल सकें। यह पहल भारतीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन में भी सहायक सिद्ध होगी।
तृतीय भाषा को सीबीएसई ने अनिवार्य कर दिया है। इससे भारतीय भााषाओं का संरक्षण और संवर्धन होगा। हमने पोर्टल पर सूचना अपडेट कर दी है। नई एज्युकेशन पॉलिसी के हिसाब से इसे लागू करना अनिवार्य है।
वेद प्रकाश मीणा, प्राचार्य, केन्द्रीय विद्यालय, झालावाड़