
फाइल फोटो पत्रिका
Rajasthan Education Department : साबला. मनोविज्ञान कहता है कि "बच्चे जो देखते हैं, वही सीखते हैं।" इसी सिद्धांत को आधार मानकर शिक्षा विभाग ने अब सरकारी स्कूलों व कार्यालयों को व्यसन और अश्लीलता से पूरी तरह मुक्त करने के लिए कमर कस ली है। विभाग ने प्रदेश के सभी सरकारी विद्यालयों और कार्यालयों में कार्यरत कार्मिकों की 'प्रोफाइल' तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इस प्रोफाइल में एक कॉलम में नशे या अन्य अशोभनीय गतिविधियों से जुड़ी जानकारी को लेकर भी िस्थति स्पष्ट करनी होगी।
शिक्षा विभाग ने एक विशेष प्रारूप तैयार किया है, जिसमें कार्मिकों की पूरी डिटेल भरनी होगी। इसमें कार्मिक का नाम व पद, एम्प्लॉई आईडी, वर्तमान पदस्थापन स्थान, नशे/व्यसन का प्रकार और उसका विवरण एवं प्रकरण में अब तक की गई कार्रवाई का ब्यौरा दर्ज करना होगा।
इस मामले में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ.ऋषिन चौबीसा एवं जिला उपाध्यक्ष राजेन्द्र सिंह चौहान सहित अन्य पदाधिकारियों ने इस पहल का स्वागत किया है।उन्होंने कहा कि विद्यालयों की गरिमा बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। यदि कोई कार्मिक वास्तव में अनुशासनहीनता करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी ही चाहिए। लेकिन यह भी सुनिश्चित किया जाए कि किसी के साथ बिना ठोस प्रमाण के अन्याय न हो। जांच प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए।
सरकारी स्कूलों में अब अंग्रेजी सिर्फ पढ़ाई नहीं जाएगी, बल्कि बच्चों के बोलने और पढ़ने की क्षमता का भी सटीक आकलन होगा। इसके लिए कक्षा 3 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए अंग्रेजी मौखिक पठन प्रवाह (ओरल रीडिंग फ्लूएंसी) कार्यक्रम 4 से 7 मई तक आयोजित किया जाएगा। इस पहल के तहत विद्यार्थियों की रीडिंग स्किल का आकलन शाला दर्पण शिक्षक ऐप के ओआरएफ मॉड्यूल के माध्यम से किया जाएगा। इससे पूर्व 2 मई को ऐप के माध्यम से इसका ट्रायल रन किया जाएगा, जिसके लिए समस्त कक्षाओं के पांच-पांच विद्यार्थियों का चयन कर परीक्षण करवाया जाएगा।
यह कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और 'मुख्यमंत्री शिक्षित राजस्थान अभियान' का हिस्सा है, जिसकी शुरुआत मुख्यमंत्री ने 29 मार्च 2025 को की थी। अंग्रेजी विषय में पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद अब इसे पूरे प्रदेश के राजकीय विद्यालयों में लागू किया जा रहा है।
प्रदेश के समस्त संयुक्त निदेशकों को निर्देश जारी
निदेशक, माध्यमिक शिक्षा राजस्थान, बीकानेर एवं पदेन अति राज्य परि निदेशक (वरिष्ठ) समग्र शिक्षा अभियान सीताराम जाट ने प्रदेश के समस्त संयुक्त निदेशकों को कार्यक्रम के सफल संचालन के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि विषय शिक्षक मैपिंग 1 मई तक हर हाल में पूरी हो जानी चाहिए, मैपिंग नहीं होने पर ओआरएफ मॉड्यूल काम नहीं करेगा, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित पीईईओ और यूसीईईओ की होगी।
पूरी व्यवस्था ऑनलाइन
सीताराम जाट ने कहा कि आकलन प्रक्रिया को निर्बाध और पारदर्शी बनाने के लिए पूरी व्यवस्था ऑनलाइन है। वाधवानी एआई फाउंडेशन के सहयोग से संचालित यह कार्यक्रम बच्चों की वास्तविक क्षमता का आकलन कर शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में मददगार होगा।
Published on:
01 May 2026 01:50 pm
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