कुपोषित बच्चों का इलाज कराने के लिए अब छुट्टी आड़े नहीं आएगी। छुट्टी के बदले सरकार अभिभावकों को पुनर्भरण भत्ता देगी।
निर्धन और मजदूर परिवारों के कुपोषित बच्चे को अब आसानी से इलाज मुहैया हो सकेगा। अब तक मजदूरी छूटने की मजबूरी के चलते अभिभावक अपने बच्चों को पूरा इलाज नहीं करा पाते थे। सरकार ने कुपोषित बच्चों के उपचार के लिए छूटी मजदूरी के पुर्नभरण का फैसला किया है। कुपोषण उपचार केन्द्र (एमटीसी) पर आने वाले बच्चों के परिजनों को प्रतिदिन की मजदूरी के बदले पुनर्भरण भत्ते के तौर पर 160 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान किया जाएगा।
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महिला एवं बाल विकास विभाग की उपनिदेशक रमा गौतम ने बताया कि कुपोषित बच्चों के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा सहयोगिनी व एएनएम की भूमिका निर्धारित कर दी गई है। पहले की बजाए अब कुपोषण प्रबंधन ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। झालरापाटन में सीएमएएम केन्द्र खोला जा रहा है। झालावाड़ जिले में झालरापाटन सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र का चयन सामुदायिक आधारित कुपोषण प्रबंधन कार्यक्रम (सीएमएएम) में हुआ है। यह योजना डूंगरपुर, बांसवाड़ा जैसे आदिवासी जिलों में खासी सफल रही हैं।
इनकी होगी जिम्मेदारी
कुपोषित बच्चों को स्वास्थ्य केंद्र तक लाने और अभिभावकों को पुनर्भरण भत्ता दिलाने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा सहयोगिनी व एएनएम की भूमिका निर्धारित कर दी गई है। इसके बाद ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में कहीं भी कुपोषित बच्चों की पहचान शीघ्र हो सकेगी। पहचान के बाद अतिकुपोषित बच्चों को तुरंत कुपोषण उपचार केन्द्र (एमटीसी) पर भेजा जाएगा। विभाग की यह पहल बच्चों के पोषण, स्वस्थ जीवन एवं विकास में मददगार साबित होगी।
आशा और एएनएम को भी मिलेगा इंसेटिव
आशा और एएनएम कुपोषित बच्चों के घर पर लगातार उनका फॉलोअप भी लेने जाएंगी, ताकि पता चल सके कि बच्चे की सेहत में कितना सुधार हुआ है। इसके लिए आशा व एएनएम को प्रति बच्चा इंसेन्टिव के रूप में 750 रुपए दिए जाएंगे। इसमें झालरापाटन व भवानीमंडी दो पंचायत समिति की नौ पीएचसी शामिल की जाएगी। उन्होंने बताया कि अक्टूबर व नवम्बर में प्रशिक्षण दिया जाएगा, केन्द्र पूरी तरह से दिसम्बर माह में शुरू हो जाएगा।