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झालावाड़ में कर्ज के बदले गिरवी रखे 400 से अधिक वाहन जब्त, सूदखोर ने गरीबों की मजबूरी का उठाया फायदा

झालावाड़ जिले में गरीबों की मजबूरी का फायदा उठाकर चल रहे सूदखोरी के बड़े खेल का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। अकलेरा के बाद अब डग क्षेत्र में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक ब्याज माफिया के कब्जे से 400 से अधिक वाहन और कृषि यंत्र जब्त किए हैं।

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Jhalawar news

जब्त वाहन (पत्रिका फोटो)

झालावाड़: मजबूरी का फायदा उठाकर उधार दिए पैसे पर अवैध रूप से भारी ब्याज वसूली को लेकर झालावााड़ पुलिस ने शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन कार्रवाई की। इस बार डग पुलिस ने ब्याज माफिया पर कार्रवाई करते हुए उसके पास से 400 से ज्यादा वाहन और कृषि यंत्र जब्त किए।

पुलिस इस मामले में सूदखोर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। एसपी अमित कुमार ने बताया कि डग क्षेत्र में हस्ताक्षर किए खाली चेक और स्टॉम्प के जरिए गरीबों की मजबूरी का फायदा उठाकर भारी भरकम ब्याज वसूली का खेल किया जा रहा था।

इस सूचना पर डग, गंगधार, पगारिया और उन्हेल थाने की फोर्स के साथ जिला स्पेशल और साइबर टीम ने डग निवासी सुनील गोयल के मकान, नवनिर्मित गोदाम और आजाद कॉलोनी में कृषि फार्म पर छापे मारे।

यहां पुलिस को चार सौ से ज्यादा दोपहिया और चारपहिया वाहन तथा कृषि उपकरण व मशीनें मिली। इसके साथ ही बड़ी संख्या में गिरवी रखे पट्टे और अन्य कागजात मिले। मामले की जांच गंगधार पुलिस उप अधीक्षक हेमंत गौतम को दी गई है।

ये वाहन बरामद

पुलिस ने सुनील गोयल के कब्जे से 70 ट्रैक्टर, 61 मोटरसाइकिल, 7 कार, 3 पिकअप, 1 ट्रक, 2 टेम्पो, 107 थ्रेसर मशीन, 29 ट्रॉलियां, 89 कृषि पंजा, 54 सीडल, 9 लहसुन सीडल, 9 रोटावेटर, 3 कुआं खोदने की मशीन, 2 गेहूं काटने की मशीन, 5 भूसा मशीन और 1 मसाला यूनिट बरामद किए।

इसके अलावा 47 हस्ताक्षरित खाली स्टॉम्प पेपर, 147 साइन किए हुए खाली चेक, 60 अन्य खाली चेक, 39 मकानों के पट्टे, 9 वाहनों की आरसी, 3 किरायानामा स्टाम्प, 4 इकरारनामा और 4 जमीन रजिस्ट्रियां भी बरामद हुई हैं।

ऐसे करता था ब्लैकमेल

पुलिस के अनुसार, गोयल ग्रामीणों को कर्ज देने के नाम पर उनसे खाली चेक और स्टॉम्प पेपर पर हस्ताक्षर करवा लेता था। बाद में मनमानी रकम भरकर उन्हें कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित करता था।

वह लोगों के गिरवी रखे फाइनेंसशुदा वाहनों को अपने बाड़े में छुपाकर रखता था, जिससे बैंक और रिकवरी एजेंसियां उन तक नहीं पहुंच पाती थीं। उचित देखभाल के अभाव में करोड़ों की संपत्ति खराब हो रही थी। उसने कई लोगों के खिलाफ कोर्ट में चेक अनादरण के केस भी कर रखे हैं।