अमित शाह ने कहा कि 85 वर्ष की उम्र में भी एक युवा की तरह सुशीला बोहरा समाजसेवा कर रही हैं। जब सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता और अनिल बोहरा निमंत्रण देने आए थे। तब उन्हें मालूम नहीं था कि वो कितने बड़े काम में सम्मिलित होने जा रहे हैं।
जब समाज में दिव्यांगों को दया की जगह दिव्यता का प्रतीक माना जाएगा तो सार्थक काम होगा। मोदी सरकार ने 2015 में पूरे देश के लिए विकलांग की जगह दिव्यांग शब्द का प्रयोग शुरू किया। एक फैसले से दिव्यांगजनों को देखने का नजरिया बदला। यह बात केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने रविवार को जोधपुर के चौखा क्षेत्र में पारसमल बोहरा स्मृति महाविद्यालय भवन के शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही।
शाह ने कहा कि ईश्वर किसी को भी कुछ नहीं देता तो उसको सर्वाइव करने के लिए कुछ विशेष चीज देता है, वह दिव्य होती है। उस दिव्यता को ढूंढ सके और जीवन राष्ट्र निर्माण में जोड़ना सके, यह जिम्मेदारी हमारे समाज की है। राजस्थान के पैरा खिलाड़ी देवेंद्र झाझडिया का उदाहरण देते हुए कहा कि जिसकी मां के गहने भी बिक जाते हैं, लेकिन बाद में देश के लिए एक वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाता है।
उन्होंने कहा कि पैरालंपिक में दो-दो मैडल लेकर आता है। पैरालंपिक की विश्व में शुरुआत 1960 में हुई। तब से लेकर 2012 तक भारत को केवल आठ पदक मिले थे, लेकिन पिछले तीन पैरालंपिक खेलों में भारत 52 पदक जीत कर हमारे खिलाड़ियों को आगे बढ़ा रहा है। समाज, सरकार और स्वयंसेवी संस्थाएं तीनों मिलकर यदि दिव्यांगजनों के लिए काम करें तो कुछ भी असंभव नहीं है।
शाह ने आगे कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने दिव्यजन सशक्तिकरण बजट जो 2014 में 338 करोड़ का था, उसे बढ़ाकर 1313 करोड़ कर दिया है। 35 अंतरराष्ट्रीय, 55 घरेलू हवाई अड्डों को दिव्यांगजनों के लिए सुगम्य बनाने का काम किया। पहले 75 साल में सिर्फ 7 लाख लोगों को भारत सरकार ने कृत्रिम अंग और यंत्र दिए थे, लेकिन जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने तब से अब तक 31 लाख लोगों को 18 हजार शिविर लगाकर कृत्रिम सहायता दी गई है।
शाह ने कहा कि 85 वर्ष की उम्र में भी एक युवा की तरह सुशीला बोहरा समाजसेवा कर रही हैं। जब सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता और अनिल बोहरा निमंत्रण देने आए थे। तब उन्हें मालूम नहीं था कि वो कितने बड़े काम में सम्मिलित होने जा रहे हैं। दो दिन पहले कार्यक्रम की डिटेल देखी, बोहरा के सेवा कार्यों को पढ़ा तो पता चला मैंने यहां आने में इतनी देर कर दी। इस महाविद्यालय में तीन भवन बनाए जाएंगे। इसके निर्माण में सहयोग देने वाले भामाशाह मोतीलाल ओसवाल, विजेंद्र चौधरी का सम्मान किया गया।
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कार्यक्रम में संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि यह भवन मानसिक रूप से शिक्षित करने के साथ दिव्यांगों को सम्मानजनक स्थान दिलाएंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कहते हैं अंतिम पायदान के लोगों के लिए काम करना चहिए और नेत्रहीन विकास संस्थान यही काम कर रही है। उन्होंने कहा कि बोहरा ने जिस जीवटता के साथ जीवन जिया, अंतिम पायदान के लोगो को ज्योति देने का काम किया है, उसके लिए बधाई की पात्र हैं।