Raju Manjhu Arrested: पश्चिमी राजस्थान की कुख्यात 007 गैंग के सरगना राजू मांझू को एएनटीएफ ने फिल्मी अंदाज में जयपुर से गिरफ्तार किया। हथियार खरीदने के बहाने बिछाए जाल में फंसा गैंगस्टर अब पुलिस की गिरफ्त में है और उसके नेटवर्क की जांच जारी है।
जोधपुर। पश्चिमी राजस्थान में आतंक का पर्याय बन चुके 007 गैंग के सरगना राजाराम उर्फ राजू मांझू को आखिरकार एएनटीएफ ने फिल्मी अंदाज में गिरफ्तार कर लिया। 75 हजार रुपए के इनामी इस कुख्यात गैंगस्टर को जयपुर के मानसरोवर इलाके से उस वक्त दबोचा गया, जब वह खुद ही अपनी बनाई चाल में फंस गया।
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महानिरीक्षक विकास कुमार (एएनटीएफ) ने बताया कि अतिरिक्त महानिदेशक दिनेश एमएन के निर्देशन में चलाए जा रहे अभियान के तहत यह बड़ी सफलता मिली है। करीब 13 साल से अपराध की दुनिया में सक्रिय जंभेश्वर नगर, लोहावट निवासी राजू मांझू पर हत्या, लूट, अपहरण, फायरिंग, मादक पदार्थ तस्करी और पुलिस पर हमले जैसे 36 से अधिक संगीन मामले दर्ज हैं।
पुलिस की यह कार्रवाई किसी क्राइम थ्रिलर से कम नहीं रही। हथियार खरीदने की फिराक में जयपुर आए राजू तक पहुंचने के लिए एएनटीएफ टीम ने खुद को हथियार सप्लायर के रूप में पेश किया। कई दिनों की बातचीत के बाद भी जब राजू सामने नहीं आया तो टीम ने धैर्य बनाए रखा।
आखिरकार मानसरोवर के एक पार्क में मिलने की योजना बनी। तीन दिन तक पुलिस टीम मौके पर डटी रही। एक जवान ने चाय की थड़ी लगाकर निगरानी शुरू की। तय समय पर लाल टोपी और काले चश्मे में बैठे संदिग्ध को घेरकर पूछताछ की गई तो वह राजू मांझू निकला। उसने खुलासा किया कि हाल ही में देखी एक गैंगस्टर फिल्म से प्रेरित होकर वह खुद का एजेंट बनकर मिलने आया था।
राजू मांझू ने 2013 में मामूली झगड़ों से अपराध की दुनिया में कदम रखा, लेकिन जल्द ही उसने गैंगस्टर बनने का रास्ता अपना लिया। 2017-18 में उसने अपने गुरु श्याम पुनिया के साथ मिलकर 007 गैंग बनाई और उसके जेल जाने के बाद खुद सरगना बन गया। उसकी गैंग का मुकाबला 0029, सरपंच और उजाराम गैंग से रहा, जहां सड़कों पर खुलेआम फायरिंग और गैंगवार आम बात बन गई। राजू का तरीका बेहद खतरनाक था, जिसमें वाहनों से पीछा करना, टक्कर मारना और फिर गोलियां चलाना शामिल था।
राजू ने टोल ठेकों और सड़क निर्माण कंपनियों से वसूली कर अपना नेटवर्क खड़ा किया। बाद में वह हथियारों की सप्लाई और मादक पदार्थों की तस्करी में भी सक्रिय हो गया। सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ फोटो डालकर वह खुद को डॉन की तरह पेश करता था। इंस्टाग्राम पर उसके लाखों फॉलोअर्स हैं, जिससे वह युवाओं के बीच प्रभाव बनाता था। जेल में रहते हुए उसके संबंध कुख्यात गैंगों से जुड़े। सूत्रों के अनुसार उसका संपर्क लॉरेंस बिश्नोई गैंग और रोहित गोदारा जैसे गैंगस्टरों से भी रहा है, जिससे उसका नेटवर्क और मजबूत हुआ।
पुलिस ने इस ऑपरेशन का नाम ‘मद-मार्जार’ रखा। राजू की चालाकी (बिल्ली जैसी प्रवृत्ति) और उसके घमंड (मद) को ध्यान में रखते हुए यह नाम दिया गया। यही चालाकी आखिरकार उसकी गिरफ्तारी का कारण बनी। पुलिस अब उससे जुड़े नेटवर्क, हथियार सप्लायर्स और हाल के मामलों की गहन जांच में जुटी है। पश्चिमी राजस्थान में लंबे समय से खौफ का पर्याय बना यह नाम अब कानून के शिकंजे में है।