जोधपुर

अधिवक्ता की हत्या का मामला, राज्य सरकार की अपील खारिज, SC ने आरोपियों को बरी करने का फैसला कायम रखा

न्यायाधीश संदीप मेहता व न्यायाधीश जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में नाकाम रहा और सबूतों में गंभीर खामियां थीं।
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Sep 29, 2025
Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट (फाइल - फोटो)

जोधपुर। सुप्रीम कोर्ट ने जोधपुर के अधिवक्ता सुरेश शर्मा की वर्ष 2006 में हुई हत्या के मामले में राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी है। शीर्ष कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के 2011 के फैसले को सही ठहराते हुए तीनों आरोपियों बरी करने के फैसले को बरकरार रखा है।

अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में नाकाम

न्यायाधीश संदीप मेहता व न्यायाधीश जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में नाकाम रहा और सबूतों में गंभीर खामियां थीं। खंडपीठ ने विशेष रूप से एक चुन्नी की कथित बरामदगी का उल्लेख करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष ने दावा किया था कि चुन्नी का इस्तेमाल शर्मा का गला घोंटने के लिए किया गया था, जबकि चुन्नी की बरामदगी मनगढ़ंत थी।

पूरा मामला संदेहों पर आधारित

खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि गेस्ट हाउस रजिस्टर की प्रविष्टियां प्रमाणित नहीं हैं और कॉल डिटेल रिकॉर्ड साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-बी के तहत प्रमाण पत्र के अभाव में पेश किए गए, इसलिए उन्हें भरोसेमंद नहीं माना जा सकता। पीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष का पूरा मामला संदेहों पर आधारित था और दोष सिद्ध करने के लिए आवश्यक ठोस सबूत उपलब्ध नहीं थे।

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कोर्ट ने दोहराया कि अपीलीय अदालत की ओर से बरी करने के फैसले में हस्तक्षेप तभी हो सकता है जब उसमें स्पष्ट विकृति हो या महत्वपूर्ण साक्ष्य की अनदेखी की गई हो। लगभग दो दशक पुराने इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने 2008 में तीनों आरोपियों हेमलता, उसके पति नरपत चौधरी तथा भंवरसिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जिसे राजस्थान हाईकोर्ट ने 2011 में निरस्त कर दिया था।

Updated on:
29 Sept 2025 09:41 pm
Published on:
29 Sept 2025 09:41 pm