कांकेर

18 साल बाद खुला मनरेगा घोटाले का पिटारा, पूर्व CEO समेत 8 अधिकारियों के खिलाफ EOW का बड़ा एक्शन

Kanker MGNREGA Scam: छत्तीसगढ़ के 18 साल पुराने मनरेगा घोटाले में EOW ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ₹1.69 करोड़ की कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में पूर्व जिला पंचायत CEO समेत आठ अधिकारियों के खिलाफ 6,000 पन्नों का चालान विशेष न्यायालय में पेश किया है
2 min read
Jul 27, 2026
MGNREGA Scam
MGNREGA Scam: 18 साल बाद खुला मनरेगा घोटाले का पिटारा(photo-patrika)

MGNREGA Scam: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) से जुड़े 18 साल पुराने आर्थिक अनियमितता मामले में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने ₹1.69 करोड़ से अधिक की कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में आठ पूर्व अधिकारियों के खिलाफ विशेष न्यायालय में 6,000 पृष्ठों का चालान पेश किया है। मामला वर्ष 2006-07 और 2007-08 के दौरान मनरेगा के तहत विभिन्न सामग्रियों की खरीदी में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है।

MGNREGA Corruption Case: सामग्री खरीदी में नियमों के उल्लंघन का आरोप

जांच के दौरान सामने आया कि फ्लेक्स बोर्ड, मस्टर रोल, रोजगार गारंटी मार्गदर्शिका, पंजी, फाइल कवर समेत अन्य सामग्री की खरीदी में निर्धारित निविदा प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। आरोप है कि खरीद प्रक्रिया को जिला स्तर पर केंद्रीकृत कर दिया गया, जबकि नियमों के अनुसार यह अधिकार जनपद पंचायतों और ग्राम पंचायतों के पास था। EOW का दावा है कि सरकारी खरीद नियमों की अनदेखी कर वित्तीय अनियमितताओं को अंजाम दिया गया।

₹1.69 करोड़ से अधिक की अनियमितता के साक्ष्य

विवेचना के दौरान जिला पंचायत कांकेर और जिले की सात जनपद पंचायतों में कुल ₹1,69,14,247 की कथित अनियमितता, अपव्यय और शासकीय राशि के दुरुपयोग के साक्ष्य मिले हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, संबंधित अधिकारियों ने आपसी सांठगांठ और षड्यंत्र के तहत सरकारी धन के उपयोग में गंभीर अनियमितताएं कीं।

इन अधिकारियों के खिलाफ पेश हुआ चालान

EOW ने जिन अधिकारियों के खिलाफ चालान पेश किया है, उनमें तत्कालीन जिला पंचायत कांकेर के बर्खास्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) के.पी. देवांगन सहित सात जनपद पंचायतों के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी शामिल हैं। इनमें कांकेर, नरहरपुर, चारामा, अंतागढ़, कोयलीबेड़ा, भानुप्रतापपुर और दुर्गकोंदल जनपद पंचायतों के पूर्व अधिकारी शामिल हैं।

किस पंचायत में कितनी राशि की अनियमितता?

जिला पंचायत कांकेर – ₹39.90 लाख
जनपद पंचायत कोयलीबेड़ा – ₹51.98 लाख
जनपद पंचायत चारामा – ₹22.92 लाख
जनपद पंचायत नरहरपुर – ₹20.62 लाख
जनपद पंचायत अंतागढ़ – ₹19.91 लाख
जनपद पंचायत कांकेर – ₹7.55 लाख
जनपद पंचायत भानुप्रतापपुर – ₹4.51 लाख
जनपद पंचायत दुर्गकोंदल – ₹1.72 लाख

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज है मामला

यह प्रकरण अपराध क्रमांक 31/2008 के तहत दर्ज किया गया था। मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120-बी, 409 और 420 के अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत जांच की गई। जांच पूरी होने के बाद 27 जुलाई 2026 को विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), कांकेर की अदालत में चालान प्रस्तुत किया गया।

मुख्य आरोपी पर पहले से दर्ज हैं अन्य मामले

EOW के मुताबिक, मुख्य आरोपी के.पी. देवांगन के खिलाफ भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग से जुड़े दो अन्य मामले भी लंबित हैं। इनमें एक मामला कथित फर्जी दस्तावेजों के जरिए अपात्र अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाने और दूसरा ₹8.44 करोड़ से अधिक की वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित है। इन दोनों मामलों में भी पूर्व में न्यायालय में अंतिम प्रतिवेदन अथवा चालान प्रस्तुत किया जा चुका है।

अब अदालत में होगी आगे की सुनवाई

18 वर्षों तक चली जांच के बाद EOW ने 6,000 पृष्ठों के दस्तावेज और अन्य साक्ष्य विशेष न्यायालय में प्रस्तुत कर दिए हैं। अब इस बहुचर्चित मनरेगा घोटाले की सुनवाई अदालत में होगी, जहां आरोपों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी।

Updated on:
27 Jul 2026 06:47 pm
Published on:
27 Jul 2026 06:46 pm