
Kanker Bear Shifting: कांकेर के 30 भालुओं की होगी ‘घर वापसी’! (photo-patrika)
Kanker Bear Shifting: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले और आसपास के क्षेत्रों में रिहायशी इलाकों की ओर भालुओं के बढ़ते मूवमेंट को देखते हुए वन विभाग ने शिफ्टिंग की तैयारी शुरू कर दी है। विभाग ने भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), देहरादून को पत्र भेजकर अनुमति मांगी है। अनुमति मिलने के बाद बारिश का मौसम खत्म होने पर करीब 30 भालुओं को नारायणपुर, भानुप्रतापपुर और अबूझमाड़ के जंगलों में छोड़ने की योजना है। WII और विशेषज्ञों की टीम भालुओं के रहवास, मूवमेंट और भोजन की उपलब्धता का अध्ययन कर शिफ्टिंग का स्थान, समय और प्रक्रिया तय करेगी।
वन विभाग की योजना के मुताबिक अनुमति मिलने के बाद बारिश का मौसम खत्म होने पर करीब 30 भालुओं को नारायणपुर, भानुप्रतापपुर और अबूझमाड़ के जंगलों में शिफ्ट किया जा सकता है। हालांकि, किन भालुओं को शिफ्ट किया जाएगा और इसके लिए कौन-सा स्थान उपयुक्त होगा, इसका अंतिम निर्णय विशेषज्ञों की रिपोर्ट के बाद लिया जाएगा।
वन विभाग ने तैयारियों को लेकर सीसीएफ और डीएफओ से सुझाव सहित रिपोर्ट भी मांगी है। यह पहली बार है जब कांकेर क्षेत्र में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष को देखते हुए भालुओं की शिफ्टिंग की योजना बनाई जा रही है।
शिफ्टिंग से पहले वन विभाग के अधिकारियों के साथ विशेषज्ञों की टीम संबंधित क्षेत्रों का निरीक्षण करेगी। टीम भालुओं के रहवास स्थल, मूवमेंट वाले क्षेत्र और भोजन की उपलब्धता का अध्ययन करेगी। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल बारिश के दौरान जंगल में भालुओं के लिए भोजन की उपलब्धता पर्याप्त है। लेकिन मौसम बदलने के बाद भोजन की तलाश में बड़ी संख्या में भालुओं के आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आने की आशंका है।
कांकेर जिले में पिछले कुछ समय से भालुओं के रिहायशी इलाकों में पहुंचने की घटनाएं सामने आती रही हैं। खेतों, गांवों और शहरी क्षेत्रों में आसानी से भोजन मिलने के कारण भालू जंगल से बाहर निकल रहे हैं। वन्यजीव प्रेमी नितिन सिंघवी के मुताबिक, पहाड़ी इलाकों में भोजन की कमी के कारण भालू आबादी की ओर आ रहे हैं। कचरे और खुले में फेंके गए खाद्य पदार्थों के कारण उन्हें आसानी से भोजन मिल जाता है, जिससे उनके व्यवहार में भी बदलाव देखने को मिल रहा है।
भालुओं को आबादी की ओर आने से रोकने के लिए केवल शिफ्टिंग ही नहीं, बल्कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट पर भी ध्यान दिया जा रहा है। वन विभाग की ओर से कांकेर कलेक्टर को पत्र लिखकर ठोस कचरे को व्यवस्थित तरीके से एकत्र करने, अलग करने, उपचार करने और सुरक्षित निपटान की व्यवस्था मजबूत करने की बात कही गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि रिहायशी क्षेत्रों में भोजन की उपलब्धता कम होने से भालुओं का मानव बस्तियों की ओर आना नियंत्रित किया जा सकता है।
पीसीसीएफ एवं वनबल प्रमुख अरुण कुमार पाण्डेय के अनुसार, विशेषज्ञ टीम की रिपोर्ट आने के बाद भालुओं की शिफ्टिंग की जगह, समय और बचाव के उपाय तय किए जाएंगे। साथ ही स्थानीय लोगों को जागरूक करने पर भी जोर दिया जाएगा। वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि भालू दिखाई देने पर उसके करीब जाने या उसे परेशान करने के बजाय तुरंत वन विभाग को सूचना दें। इसके अलावा जंगल में अकेले जाने से बचने की सलाह भी दी गई है।
Updated on:
31 Aug 2026 01:04 pm
Published on:
31 Aug 2026 01:04 pm
