Kanpur Ward Boy Murder Case: कानपुर में 37 वर्षीय वार्ड बॉय अंकित त्रिवेदी हत्याकांड का खुलासा।यूपी पुलिस ने 250 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे खंगालकर मुंबई भागे तीन आरोपियों को दबोचा।
Kanpur Ward Boy Murder Case: उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। बाराबंकी पीएचसी में काम करने वाले 37 साल के वार्ड बॉय अंकित त्रिवेदी की पैसों और कार के लालच में उनके ही दोस्त और उसके साथियों ने मिलकर हत्या कर दी। हत्या करने के बाद आरोपियों ने शव को गंगा में फेंक दिया और मुंबई भाग गए। पुलिस ने 250 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की मदद से कड़ी मशक्कत के बाद तीनों आरोपियों को कानपुर से गिरफ्तार कर लिया है।
अंकित त्रिवेदी कानपुर के चकेरी इलाके के रहने वाले थे। अंकित के पिता विष्णुचंद्र ने 17 अप्रैल को उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने पुलिस को बताया था कि अंकित 16 अप्रैल की शाम को अपनी कार से मलवां जाने की बात कहकर घर से निकला थे। 18 अप्रैल को फतेहपुर के सुल्तानपुर घोष इलाके में अंकित की कार लावारिस हालत में मिली, जिसके बाद पुलिस का शक गहरा हो गया और उन्होंने अपहरण व हत्या का मामला दर्ज कर लिया।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि अंकित का दोस्त सत्यम मिश्रा जानता था कि अंकित सरकारी नौकरी करता है और साथ ही किराये पर अपनी कार भी चलाता है। उसे यह भी पता था कि अंकित के पास अच्छी रकम है और वह एक और नई गाड़ी खरीदने की सोच रहा है। इसी लालच में आकर सत्यम ने अंकित को लूटने की योजना बनाई और अपने परिचितों रेहान, शादाब और अल्तमस को भी इसमें शामिल कर लिया।
घटना की शुरुआत 16 अप्रैल को हुई, जब रेहान ने अंकित को फोन करके मलवां चलने के लिए कार बुक की। इसके बाद रामादेवी चौराहे पर रेहान, शादाब और अल्तमस कार में बैठ गए, जबकि मुख्य आरोपी सत्यम अपनी बाइक से उनका पीछा कर रहा था। रास्ते में फतेहपुर के पास आरोपियों ने पेशाब करने के बहाने कार रुकवाई और अंकित से मोबाइल बैंकिंग ऐप का पासवर्ड मांगकर ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाने लगे। जब अंकित ने इसका विरोध किया, तो आरोपियों ने गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद वे अंकित का शव कार में डालकर नौबस्ता गंगा पुल ले गए और नदी में फेंक दिया।
जांच के दौरान पुलिस टीम ने रामादेवी से लेकर फतेहपुर तक के करीब 120 किलोमीटर के दायरे में 250 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे खंगाले। महाराजपुर के एक पेट्रोल पंप पर आरोपियों को कार से उतरते हुए देखा गया, जिससे उनकी पहचान पक्की हो गई। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगाए, जिससे पता चला कि वे मुंबई भाग गए हैं। जैसे ही वे दो दिन पहले वापस कानपुर लौटे, पुलिस ने उन्हें सनिगवां के गोल चौराहे से दबोच लिया।
डीसीपी ने बताया कि वारदात को अंजाम देने के बाद शादाब ने अपनी बहन अफसाना को फोन कर घटना की जानकारी दी थी। अफसाना ने ही घटना को छिपाने में मदद की और तीनों आरोपियों को खागा रेलवे स्टेशन तक ई-रिक्शा से पहुंचाने की व्यवस्था की, जिससे वे मुंबई भाग सके। पुलिस अब अफसाना की भी तलाश कर रही है। वहीं, अंकित के शव को खोजने के लिए एसडीआरएफ की टीम को गंगा नदी में लगाया गया है।