करौली

Kaila Devi Mela 2026: कैलादेवी मेले में आज से भंडारे शुरू, लेकिन गैस सिलेंडर की किल्लत ने बढ़ाई आयोजकों की टेंशन

Kaila Devi Mela Bhandara: कैलादेवी चैत्र नवरात्र लक्खी मेले के लिए श्रद्धालुओं की पदयात्रा शुरू हो चुकी है। शुक्रवार से भंडारे प्रारंभ होने वाले हैं, लेकिन इस बार भंडारा संचालकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती रसोई गैस की किल्लत बन गई है।
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Mar 13, 2026
Karauli Kaila Devi Mela 2026 (1)
कैलादेवी के दरबार में पहुंचने लगे श्रद्धालु। पत्रिका फाइल फोटो

हिण्डौनसिटी। कैलादेवी चैत्र नवरात्र लक्खी मेले के लिए श्रद्धालुओं की पदयात्रा शुरू हो चुकी है। शुक्रवार से भंडारे प्रारंभ होने वाले हैं, लेकिन इस बार भंडारा संचालकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती रसोई गैस की किल्लत बन गई है। भण्डारों के लिए रसोई गैस सिलेण्डर नहीं मिलने से अब दशकों पुरानी व्यवस्था लकड़ी की भट्टियों पर भोजन-प्रसादी तैयार की जाएगी। इसके लिए भंडारा समितियों द्वारा लकड़ियों का इंतजाम किया जा रहा है।

दरअसल, गैस किल्लत के चलते रसोई गैस एजेंसियों पर कॉमर्शियल सिलेंडर उपलब्ध नहीं हैं और घरेलू सिलेंडरों की मांग के मुकाबले आधी ही आपूर्ति हो रही है। आम उपभोक्ता को मुश्किल से सिलेण्डर मिल पा रहा है। ऐसे में भंडारों को रसोई गैस नहीं मिल पा रही है।

आयोजन समिति के सदस्यों न बताया कि लोगों ने भण्डारा के लिए पांडाल लगाने के अन्य तैयारियों पूरी कर ली है, लेकिन रसोई गैस बिना पदयात्रियों के लिए भोजन तैयार करना कठिन हो रहा है। गैस की कमी को देखते हुए समितियों ने अब लकड़ी की भट्टियों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। गुरुवार को राममंदिर परिसर में दो लकड़ी की दो भट्टियोंं पर प्रसादी बनाना शुरू कर दिया गया।

बनकी गांव के पास एक गैस एजेंसी के गोदाम पर सिलेण्डर लेने पहुंचे लोग।

आयोजकों ने बताया कि प्रत्येक भंडारे में प्रतिदिन 5 से 7 हजार श्रद्धालु भोजन करते हैं। ऐसे में भोजन की व्यवस्था सुचारू रखना बड़ी जिम्मेदारी है। भंडारा समितियों ने प्रशासन से मेले के दौरान गैस सिलेंडरों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि पदयात्रियों को भोजन की सुविधा में कोई बाधा न आए। भंडारे भोजन सेवा और आस्था का प्रतीक है। जिनमें क्षेत्र के लोग देवी मां के भक्तों के लिए उत्साह से आवभगत करते हैं।

हिण्डौनसिटी. राम मंदिर में पदयात्रियों के भण्डारे में लकड़ी की भट्टियों पर प्रसादी बनाने की शुरुआत करते लोग।

भण्डारों में खपते हैं 700 सिलेण्डर

हिण्डौन क्षेत्र के सभी भंडारों में लगभग 700 सिलेंडरों की आवश्यकता पड़ती है। जिसकी आपूर्ति क्षेत्र की रसोई गैस एजेंसियों से होती थी।बयाना मार्ग पर लगने वाले एक भंडारे में ही तीन दिन में रसोई गैस के करीब 90 से 100 सिलेंडर की खपत होती है। शहर के गैस वितरक ने बताया कि प्रति वर्ष भण्डारों में उनके यहां से 200 सिलेण्डर जाते थे। अन्य शहरी व ग्रामीण एजेंसियों से भी भण्डारों के लिए रसोई गैस की आपूर्ति दी जाती थी। इस बार किल्लत के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा है।

रोटी मशीन लौटाकर मंगवाए तंदूर

युवा भोले भक्त मंडल के मुकेश गर्ग व प्रदीप गर्ग ने बताया कि आगरा से मंगवाई गैस और बिजली संचालित 5 रोटी मशीनों को लौटाया दिया है। अब भण्डारा में 12-15 तंदूर लगा का भक्तों को फुलकी की बजाय तंदूरी रोटी खिलाई जाएगी। सब्जी व अन्य पकवान तैयार करने के लिए लकड़ी ईधन की 5भट्टियां तैयार की गई हैं।

इधर सर्वर ठप, संकट बरकरार

एलपीजी सिलेण्डर बुकिंग के लिए दूसरे दिन गुरुवार को भी सर्वर ठप रहने का संकट बना रहा। लोग सिलेण्डर बुक नहीं करवा पाए। ऐसे में लोग कभी एजेंसी कार्यालय तो कभी गैस गोदाम पर चक्कर काटते नहीं आए। हालांकि एजेसी संचालकों ने डेढ-दो माह समय वाले उपभोक्ताओं को डायरी में मेन्युअल बुकिंग कर सिलेण्डर दे कर राहत दी। शेष को डीएसी कोड पर सिलेण्डर दिया गया।

Updated on:
13 Mar 2026 10:26 am
Published on:
13 Mar 2026 10:26 am