खंडवा

khandwa election result: भाजपा के गढ़ में कांग्रेस दे रही है चुनौती, क्या इस बार होगा कोई ‘खेल’

khandwa news: खंडवा-बुरहानपुर लोकसभा सीट भाजपा का गढ़ मानी जाती है, इस बार कांग्रेस ने इस सीट पर सेंध लगाने के भरसक प्रयास किए हैं। भाजपा की ओर से ज्ञानेश्वर पाटिल दोबारा मैदान में है, वहीं कांग्रेस ने नरेंद्र पटेल को चुनाव मैदान में उतारा है।

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May 24, 2024

khandwa lok sabha seat: मध्यप्रदेश में 29 लोकसभा सीटों पर चार चरणों में चुनाव हो चुके हैं, 4 जून को रिजल्ट का इंतजार है। मध्यप्रदेश के निमाड़ क्षेत्र की खंडवा-बुरहानपुर लोकसभा सीट भाजपा का गढ़ मानी जाती है, इस बार कांग्रेस ने इस सीट पर सेंध लगाने के भरसक प्रयास किए हैं। भाजपा की ओर से ज्ञानेश्वर पाटिल दोबारा मैदान में है, वहीं कांग्रेस ने नरेंद्र पटेल को चुनाव मैदान में उतारा है। 13 मई को हुए मतदान में खंडवा में 71.52 फीसदी मतदान हुआ था। जबकि पूरे मध्यप्रदेश में चारों चरणों को मिलाकर 66.87 फीसदी मतदान हुआ था।

पूर्वी निमाड़ क्षेत्र की खंडवा लोकसभा क्षेत्र में इस बार घमासान देखने को मिल रहा है। भाजपा के बड़े स्टार प्रचारक भी प्रचार कर चुके हैं। भाजपा ने यहां से ज्ञानेश्वर पाटिल को मैदान में उतारा है। ज्ञानेश्वर पाटिल पहले भी सांसद थे, वे भाजपा के दिवंगत नेता नंदकुमार सिंह चौहान के निधन के बाद उपचुनाव में जीते थे। ज्ञानेश्वर पाटिल उपचुनाव में 80 हजार वोटों से चुनाव जीते थे। लोकसभा चुनाव 2024 में 13 मई को यहां मतदान हुआ था।

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कांग्रेस ने काफी मशक्कत के बाद कांग्रेस नेता नेरंद्र पटेल को मैदान में उतारा है। पहले यहां पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव भी प्रयास कर रहे थे, क्योंकि इस सीट पर अरुण यादव का ज्यादा प्रभाव माना जाता है, लेकिन पार्टी ने नरेंद्र पटेल को चुना।

खंडवा लोकसभा में 8 विधानसभा सीटे हैं

खंडवा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत 8 विधानसभा सीटें आती हैं। जो चार जिलों में फैली हुई हैं। देवास जिले की बागली और मांधाता सीट, कंडवा जिले की खंडवा, पंधाना सीट, बुरहानपुर जिले की बुरहानपुर और नेपानगर सीट और खरगोन जिले की भीकनगांव और बड़वाह सीट आती हैं। इन सभी सीटों में से भीकनगांव सीट पर एकमात्र कांग्रेस का कब्जा है। यहां से झूमा सोलंकी विधायक हैं। जबकि सभी सीटों पर भाजपा का कब्जा है। इसलिए खंडवा-बुरहानपुर लोकसभा सीट पर भाजपा का ज्यादा प्रभाव नजर आता है।

यह है जातिगत समीकरण

खंडवा लोकसभा सीट पर जातीय समीकरणों की बात की जाए तो यहां सबसे ज्यादा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का दबदबा है। खंडवा लोकसभा सीट में एससी-एसटी वर्ग के 8 लाख मतदाता हैं। जबकि ओबीसी वर्ग की संख्या पांच लाख है, वहीं मुस्लिम वर्ग की संख्या 3 लाख से अधिक है। इसके अलावा सामान्य वर्ग के वोटर्स 4 लाख के करीब हैं। इस सीट की खास बात यह है कि आदिवासी वोटर्स यहां निर्णायक भूमिका निभाता है।

2021 में उपचुनाव हुआ था

खंडवा लोकसभा सीट पर पिछले 28 वर्षों से भाजपा का दबदबा है। 2019 में 1909055 मतदाता थे। बीजेपी उम्मीदवार नंदकुमार सिंह चौहान को 838909 वोट मिले थे। जबकि कांग्रेस के अरुण यादव को 565566 वोट मिले थे। नंदकुमार सिंह चौहान 273 हजार 343 वोटों से हार गए थे। इसके बाद नंदकुमार सिंह के निधन के बाद 2021 में उपचुनाव हुआ था और भाजपा के ज्ञानेश्वर पाटिल चुनाव जीते थे।

2014 की बात करें तो 1759417 मतदाता थे। बीजेपी के नंद कुमार सिंह चौहान 717357 वोट हासिल कर के चुनाव जीते थे, जबकि कांग्रेस के अरुण यादव को 457643 वोट मिले थे। नंद कुमार सिंह चौहान 259714 वोटों के अंतर से चुनाव जीत गए थे।

इससे पहले 2009 की बात करें तो 1355325 मतदाता थे। कांग्रेस उम्मीदवार अरुण यादव को 394,241 वोट मिले थे। भाजपा के नंद कुमार सिंह चौहान को 345160 वोट मिले थे। अरुण यादव 49 हजार 081 वोटों के अंतर से चुनाव जीत गए थे।

क्यों चर्चित है खंडवा

खंडवा लोकसभा सीट नर्मदा क्षेत्र से लगी है। 1957 में इस सीट का गठन हुआ था। प्राकृतिक सुंदरता वाले इस क्षेत्र में कई धार्मिक स्थल हैं। नर्मदा और ताप्ती जैसी पवित्र नदियां हैं। भगवान राम के वनवास काल में खंडवा को खांडव कहा जाता था। यहां भी कुछ चिन्हन हैं, जो वनवास काल के भगवान राम के मौजूद हैं। रामेश्वर कुंड है, जिसे स्वयं लक्ष्मण ने माता सीता के लिए तीर चलाकर खोदा था। 12 ज्योतिर्लिंग में से एक ओंकारेश्वर भी इसी जिले में हैं। यहां हाल ही में शंकराचार्य की अतिविशाल प्रतिमा बनाई गई है।

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