
मगराहाट। दक्षिण 24 परगना जिले के मगराहाट-2 ब्लॉक के मोहनपुर ग्राम पंचायत स्थित एक प्री प्राइमरी स्कूल की पहली कक्षा में पढ़ने वाली नन्ही छात्रा खुशी कर इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। मिड-डे मील में मिले अंडे को खुद खाने के बजाय छोटे भाई के लिए जेब में रखकर घर ले जाने की उसकी कोशिश ने लोगों का दिल जीत लिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और देखते ही देखते खुशी लोगों के बीच अपनापन और भाई-बहन के प्रेम की मिसाल बन गई।
दरअसल स्कूल में मिड-डे मील में अंडा दिया गया था। सहायक शिक्षक सद्दाम हुसैन ने पहले खुशी को एक अंडा दिया। खुशी मुस्कुराते हुए उसे लेने लगी। तभी शिक्षक ने उसके हाथ में एक और अंडा रखते हुए कहा कि यह उसके छोटे भाई के लिए है। खुशी कुछ पल तक दोनों अंडों को देखती रही और फिर एक अंडा अपनी जेब में रख लिया। शिक्षक ने उसे याद दिलाया कि एक अंडा उसे खुद भी खाना है। खुशी ने बिना कुछ बोले सिर हिला दिया और मुस्कुराती रही।
बता दें कि कुछ दिन पहले भी जब खुशी मिड-डे मील का अंडा घर ले जाने लगी थी, तब शिक्षक ने उससे कारण पूछा था। उसने मासूमियत से जवाब दिया था कि मैं तो रोज खाती हूं, एक दिन मेरा भाई खा ले। यही बात लोगों के दिल को छू गई। शिक्षक ने इस पल का वीडियो बनाया था, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो वायरल होने के बाद स्कूल में खुशी को सम्मानित किया गया। शिक्षकों ने आपस में सहयोग कर उसके लिए नया स्कूल बैग, कलर पेंसिल, चित्रकला की कॉपी, चॉकलेट और एक स्मृति चिह्न भेंट किया। इस अवसर पर खुशी के पिता शंभु कर और दादी भी स्कूल पहुंचे। शिक्षकों ने उनका भी सम्मान किया और मिठाई खिलाई।
खुशी का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। उसके पिता शंभु कर ई-रिक्शा चलाकर परिवार का खर्च चलाते हैं, जबकि मां पल्लवी कर गृहिणी हैं। परिवार टिन की छत वाले छोटे से घर में रहता है। आर्थिक कठिनाइयों के कारण खुशी की पढ़ाई निजी स्कूल में जारी नहीं रह सकी और बाद में उसका दाखिला सरकारी स्कूल में कराया गया। मां पल्लवी कर बताती हैं कि खुशी बचपन से ही अपने छोटे भाई से बहुत प्यार करती है। घर में कोई अच्छी चीज आती है तो वह पहले भाई को देती है, उसके बाद खुद खाती है।
पिता शंभु कर का कहना है कि उनकी बेटी उम्र में छोटी जरूर है, लेकिन सोच में काफी समझदार है। उन्होंने स्कूल के शिक्षकों का आभार जताते हुए कहा कि उनके सहयोग और स्नेह ने परिवार का हौसला बढ़ाया है। सहायक शिक्षक सद्दाम हुसैन ने कहा कि खुशी को सम्मानित करना केवल एक छात्रा का सम्मान नहीं है, बल्कि यह आपसी प्रेम का सम्मान है। उन्होंने कहा कि बच्चों में ऐसे संस्कार समाज के लिए प्रेरणा हैं।