कोटा

Rajasthan: यहां नवरात्र में 3 दिन चामुंडा माता मंदिर में पानी से जलते हैं दीपक, चमत्कार देखने उमड़ती है भीड़

Navratri 2025: राजस्थान के कोटसुवा गांव का चामुंडा माता मंदिर आस्था का केंद्र है। यहां नवरात्रि में आज भी तीन दिन तक पानी से दीपक जलते हैं।
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Sep 29, 2025
chamunda mata mandir kotsuwan
Photo- Patrika

Navratri 2025: सुल्तानपुर. क्षेत्र के कोटसुवा गांव का चामुंडा माता मंदिर आस्था का केंद्र है। यहां नवरात्रि में आज भी तीन दिन तक पानी से दीपक जलते हैं, और यह चमत्कार हजारों लोगों के सामने प्रतिवर्ष होता है। मंदिर में माता के दर्शनों एवं पूजा अर्चना के लिए नवरात्र में सुबह चार बजे से भक्तों की आवाजाही शुरू हो जाती है और यह क्रम देर रात्रि तक जारी रहता है।

गांव के बुजुर्गों और मंदिर समिति के अनुसार, चामुंडा माता की स्थापना लगभग 900 वर्ष पूर्व विक्रम संवत 1169 में हुई थी। गांव निवासी वरिष्ठ अध्यापक नरेश कुमार मीणा ने बताया कि मन्दिर में नवरात्र में यहां वर्षों से माता का जस गीत गाया जाता है।

इसमें मान्यता है कि कोटसुआ गांव में चम्बल नदी के दूसरी ओर एक दिव्य कन्या ने कालू कीर नामक नाविक को नाव से पार करवाने के लिए बुलाया। जहां दिव्य कन्या ने इन्द्रासन से आने की बात कही। नदी के बीच नाविक के मन में पाप आ गया। इसे जान दिव्य कन्या ने उसे नाव में ही गोंद रूप में चिपका दिया।

इसके बाद गांववासी एकत्रित हुए तो दिव्य कन्या ने अपना परिचय दिया और कहा 14 साल बाद वापस नाविक सही सलामत मिलेगा। आप मंदिर बनवाइए। इसके बाद ठीक वैसा ही हुआ। इसके बाद गांव के आचार्य आखाराम पटेल ने मंदिर की स्थापना करवाई। तब से आज तक उसी कालू कीर की वंशावली ही माता की पूजा-अर्चना करती आ रही है।

नवरात्र में पानी से जलते हैं दीपक

मंदिर में नवरात्र की पंचमी, षष्ठी और सप्तमी को यह अद्भुत चमत्कार देखने को मिलता है। जिसमे खुद माता रानी पानी प्रज्वलित करती है। प्राचीन परंपरा मुताबिक यहां नवरात्र से प्रथम दिन माता के भोपे के शरीर में माता का प्रवेश होता है और फिर भोपे को ढोल नगाड़ों से चंबल नदी ले जाया जाता है। जहां नदी के बीचों बीच से दो घड़े भरकर पानी लाया जाता है।

जिसे मंदिर में रखा जाता है। अब यही से भोपा का शुद्धिकरण तप शुरू होता है। भोपा नवरात्र में निराहार रहकर मंदिर में ही माता का ध्यान लगाता है। सिर्फ एक गिलास दूध के सहारे ही नो दिन व्यतीत होते है।

इसमें पंचमी को शाम के समय महाआरती के बाद भोपा के शरीर में माता का प्रवेश होता है और फिर जिस घड़े में पानी भरकर लाया गया था उसमे से माता को पानी दिया जाता है, जो मां ज्योत में वो पानी डालती है और फिर 24 घंटों तक उसी पानी से माता का दीपक जलता रहता है। यह क्रम सप्तमी तक चलता है।

आस्था का केंद्र है मन्दिर

इन तीन दिनों में कोटसुवा गांव के चामुंडा माता मंदिर में हजारों श्रद्धालु दूर-दूर से दर्शन के लिए पहुंचते हैं। सुबह 4 बजे से लेकर देर रात तक भक्तों की आवाजाही बनी रहती है। आरती के समय मंदिरगगनभेदी स्वर से गूंज उठता है।

Updated on:
29 Sept 2025 03:23 pm
Published on:
29 Sept 2025 03:23 pm