फतेहपुर रीको औद्योगिक क्षेत्र में आयोजित श्रीराम कथा के तीसरे दिन रविवार को कथा का समापन भावनात्मक माहौल में हुआ।
रामगंजमंडी। उपखंड के फतेहपुर रीको औद्योगिक क्षेत्र में चल रही श्रीराम कथा का तीसरे दिन रविवार को समापन हो गया। अंतिम दिन आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री अपने बचपन के दिनों की गरीबी को याद करते हुए भावुक हो गए। उनका गला रुंधा और आंखों से आंसू भी छलके।
कथा में मौजूद श्रोताओं से उन्होंने कहा कि बालाजी से नाता रखना, वह जरूर रिश्ता निभाएंगे। गौ माता का जिक्र करते हुए शास्त्री ने कहा कि गाय माता कहने वाले बहुत हैं, गौ रक्षक भी बहुतायत में मिल जाएंगे, लेकिन सड़कों पर घूमती गायों की सेवा करने वालों का अभाव है। उन्होंने एक हिंदू, एक गाय का संकल्प लेकर सेवा करने का आह्वान किया।
आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने कथा में अपने 12 वर्ष तक के जीवन का वर्णन करते हुए कहा कि उन्होंने गरीबी देखी है। 12 साल की उम्र तक वह भीख मांगकर घर लाते थे। उनकी बहन की शादी के लिए 20 हजार रुपए उधार नहीं मिले थे। तब उन्होंने प्रण लिया था कि पैसे के कारण किसी बेटी का विवाह नहीं रुकेगा। शास्त्री ने कहा कि उनकी मां की सीख उन्हें आज भी याद है। मां कहती थीं कि घर से निकलते समय मुस्कुराते हुए निकलना और बालाजी के चरण कभी मत छोड़ना।
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पतंजलि पीठ के बाबा रामदेव भी रविवार को अंतिम दिन श्रीराम कथा में पहुंचे। उन्होंने कहा कि कुछ लोग गौ माता के नाम पर देश में अराजकता फैला रहे हैं। उनके यहां प्रतिदिन एक लाख गौ माता का पालन होता है। वह स्वयं गौ माता का गोबर उठाते हैं, जिसमें लक्ष्मी का वास होता है। उन्होंने कहा कि गाय का मूत्र पीने मात्र से दर्जनों बीमारियों से छुटकारा मिलता है।
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