कोई नाम हस्तांतरण के लिए आवेदन करता है तो उसे भी विक्रय स्वीकृति साथ में ही जारी कर दी जाएगी। निगम में होने वाले विभिन्न कार्यों के लिए समय सीमा भी निर्धारित कर दी गई है।
नगर निगम में पट्टे के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति को अब पट्टा, जी प्लस वन की भवन निर्माण स्वीकृति तथा विक्रय स्वीकृति एक साथ जारी कर दी जाएगी। इसी तरह यदि कोई नाम हस्तांतरण के लिए आवेदन करता है तो उसे भी विक्रय स्वीकृति साथ में ही जारी कर दी जाएगी। निगम में होने वाले विभिन्न कार्यों के लिए समय सीमा भी निर्धारित कर दी गई है। निर्धारित समय सीमा में आवेदन का निस्तारण नहीं करने वाले या अनावश्यक चक्कर लगवाने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।
जनता को राहत देने के लिए संभागीय आयुक्त एवं नगर निगम प्रशासक अनिल कुमार अग्रवाल के निर्देशन में निगम आयुक्त ओमप्रकाश मेहरा ने गुरूवार को नियमों में सरलीकरण करते हुए इसके आदेश जारी किए हैं। आयुक्त मेहरा ने बताया कि पूर्व में आवेदक पहले पट्टे के लिए निगम में आता था, पट्टा जारी होने पर भवन निर्माण स्वीकृति और फिर भविष्य में आवश्यकता होने पर विक्रय स्वीकृति के लिए चक्कर काटता था।
इसी तरह कि प्रक्रिया नाम हस्तांतरण और विक्रय स्वीकृति के मामले में भी होती थी। शहरी समस्या समाधान शिविरों में आए परिवादों की समीक्षा के दौरान आमजन के बार-बार चक्कर काटने तथा विभिन्न कार्यों के समयावधि में पूरे नहीं होने की बात सामने आई।
इसको देखते हुए अब निर्णय लिया गया है कि आवंटी के पक्ष में पट्टा जारी किये जाने पर पट्टा शुल्क के साथ भूतल 01 तल की निर्माण स्वीकृति शुल्क और विक्रय स्वीकृति शुल्क भी जमा कर पट्टे के साथ-साथ निर्माण स्वीकृति व विक्रय स्वीकृति भी जारी कर दी जाएगी।
राज्य सरकार के आदेेशों के अनुसार नाम हस्तान्तरण, उपविभाजन-पुनर्गठन, विक्रय स्वीकृति के प्रकरणों में मौका स्थिति, वॉयलेशन की जांच अपेक्षित नहीं होगी। ऐसे प्रकरणों में निर्धारित प्रक्रिया अनुसार दस्तावेजों की जांच कर नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।
आयुक्त मेहरा ने बताया कि यह भी संज्ञान में आया है कि आवेदन के बाद लम्बे समय तक कार्यवाही रिकॉर्ड रूम से मूल पत्रावली उपलब्ध नहीं होने के कारण रूकी रहती है। अब निगम कार्यालय में आवेदन प्राप्त होने पर रिकार्ड शाखा द्वारा अधिकतम 3 कार्य दिवस में सम्बन्धित मूल पत्रावली अनुभाग के कनिष्ठ/वरिष्ठ सहायक को उपलब्ध करवानी होगी।
आयुक्त ओमप्रकाश मेहरा ने बताया कि उत्तराधिकार व पंजीकृत/अपंजीकृत वसीयत के आधार पर नाम हस्तांतरण आवेदन तथा विक्रय पत्र या दान पत्र के ऐसे मामलों में जहां नगर निगम से पट्टा/नाम हस्तान्तरण होने के बाद बिना अनुमति एक से अधिक बार हस्तान्तरण हुआ हो, 07 दिवस की समयावधि के लिए आवेदक के खर्चे पर समाचार पत्र में विज्ञप्ति प्रकाशित करवाई जाएगी। नाम हस्तांतरण के अन्य मामलों में विज्ञप्ति प्रकाशित कराने की आवश्यकता नहीं होगी।
आयुक्त ओमप्रकाश मेहरा ने निगम में किए जाने वाले विभिन्न कार्यों की अवधि भी तय कर दी है। नाम हस्तांतरण आवेदन 21 दिन, उपविभाजन-पुनर्गठन आवेदन 30 दिन, विक्रय स्वीकृति, भवन निर्माण स्वीकृति, पुनर्ग्रहण शुल्क, ट्रेड लाइसेंस, फायर एनओसी तथा मोबाइल टावर एनओसी 15 दिन, भू-उपयोग परिवर्तन आवेदन 60 दिन तथा सीवरेज कनेक्शन आवेदन 3 दिन में निस्तारित करना होगा।