हैगिंग ब्रिज के लोकार्पण के साथ ही पीएम मोदी कोटा के पर्यटन उद्योग को संजीवनी भी दे गए। उन्होंने पर्यटकों के ठहराव को बढ़ाने पर जोर दिया।
उदयपुर के खेल गांव से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ना सिर्फ राजस्थान के विकास का खाका खींचा, बल्कि कोटा के दम तोड़ते पर्यटन उद्योग में नई जान भी भर दी। हैगिंग ब्रिज के उदघाटन अवसर पर पीएम मोदी कोटा में पर्यटकों का ठहराव ना होने से खासे व्यथित दिखे और उन्होंने पर्यटक स्थलों तक टूरिस्ट की आसान पहुंच बनाने के साथ ही वहां जरूरी सुविधाएं विकसित करने पर खासा जोर दिया। कोटा के पर्यटन विकास से जुड़े लोगों ने उम्मीद जताई है कि पीएम की चिंताओ का असर नए सुधार का सूरज लेकर आएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैगिंग ब्रिज के साथ ही राजस्थान के विकास के लिए 15 हजार करोड़ रुपए की विकास योजनाओं की सौगातें दी। इतना ही नहीं पीएम मोदी ने चाय वाले से लेकर गांव-ढ़ाणी में ढ़ाबा चला रहे आम आदमी से लेकर जल-जंगल से जुड़े व्यक्ति को पर्यटन से जोड़ने की बात कह उज्जवल भविष्य का उपहार भी सौंप दिया। पीएम मोदी ने कहा कि राजस्थानी टूरिज्म दुनिया में देश का प्रतिनिधित्व करता है और इसे सजाने-संवारने में हर एक राजस्थानी जुटा है। इसलिए इसे और विकसित करने की जरूरत है जिस पर सरकार पूरा ध्यान दे रही है।
जेब खाली करने आते हैं पर्यटक
पीएम मोदी ने कहा कि पर्यटक सुकून और खुशी की तलाश में अपनी जेब खाली करने आता है, लेकिन जब उसे जाम मिलेगा, ट्रेफिक व्यवस्था नहीं मिलेगी, ठहरने के उचित स्थान नहीं मिलेंगे और सबसे बड़ी चीज जानकारी नहीं मिलेगी तो वापस लौटने के लिए भागेगा। पीएम मोदी ने इस पर चिंता जताते हुए कहा कि जब अच्छी सड़कें और समुचित सुविधाएं नहीं होंगी तो पर्यटक एक बार आ तो जाएगा, लेकिन ज्यादा देर नहीं ठहरेगा। इतना ही नहीं वह दोबारा लौटने की तो कभी सोचेगा भी नहीं। इसलिए इन व्यवस्थाओं को सुधारना होगा। केंद्र सरकार इसके लिए पैसे की कोई कमी नहीं छोड़ रही इसलिए जितना हो सके व्यवस्था सुधार लें, ताकि राजस्थान के लोगों को ज्यादा से ज्यादा रोजगार मिल सके।
कोटा की चिंता से पीएम भी हुए परेशान
कोटा विश्वविद्यालय की एसोसिएट प्रोफेसर और यूजीसी की रिसर्च अवार्डी डॉ. अनुकृति शर्मा कहती हैं कि पीएम मोदी कोटा के पर्यटन उद्योग की परेशानियों से पूरी तरह वाकिफ थे, इसलिए यहां की हर समस्या पर उन्होंने चिंता जाहिर की है। डॉ. अनुकृति शर्मा कहती हैं कि कोटा के अधिकांश पर्यटन स्थलों तक पहुंचने के लिए सड़कें नहीं है। जैसे-तैसे पर्यटक वहां तक पहुंच भी जाएं तो सुरक्षा से लेकर जरूरी सुविधाएं तक नहीं मिलती। प्राकृतिक छटाओं से लबरेज तमाम ऐसी जगहें जिनका ना तो सरकार कभी प्रमोशन करती है और ना ही पर्यटन विभाग। 'माउथ कन्वेंसिंग' के जरिए लोगों को इनकी जानकारी होती है और जब वह कोटा आते हैं तो गरड़िया महादेव से लेकर गेपरनाथ, भैंसरोड़गढ़, भंवरकुज से लेकर कंसुआ महादेव जैसे ऐतिहासिक और खूबसूरत पर्यटक स्थलों तक की कहीं कोई जानकारी नहीं मिलती। डॉ. शर्मा के मुताबिक पीएम के चिंता जाहिर करने के बाद उम्मीद जगी है कि कोटा के पर्यटन की मूलभूत समस्याओं का समाधान हो सकेगा। डॉ. अनुकृति शर्मा की मानें तो पीएम मोदी कोटा के पर्यटन की उखड़ती सांसों को आक्सीजन दे गए।