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Vivo ने IPL के बाद Pro Kabaddi League और Big Boss की Title Sponsorship छोड़ी

Vivo ने Pro Kabaddi League के लिए 5 साल के लिए Star India के साथ की थी 300 करोड़ की डील सााइन Colors Channel पर आने वाले Reality Show Big Boss की Title Sponsorship के लिए 60 करोड़ में हुई थी डील
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Aug 07, 2020
Vivo Title Sponsorship
Vivo leave Pro Kabaddi League and Big Boss title sponsorship after IPL

नई दिल्ली। चीनी स्मार्टफोन कंपनी वीवो ( Vivo ) ने भारत में जहां-जहां पांव पसारे हुए थे, वहां-वहां से अपने आपको समेटना शुरू कर दिया है। जानकारी के अनुसार वीवो अब प्रो कबड्डी लीग ( Pro Kabaddi League ) के अलावा कलर्स चैनल पर आने वाले बिग बॉस ( Big Boss ) से अपने आप को हटा लिया है। दोनों ही इवेंट में वीवो टाइटल स्पांसर था। जहां बिग बॉस के लिए वीवो दो सालों के लिए जुड़ी थी। वहीं प्रो कबड्डी के लिए स्टार इंडिया ( Star India ) के पांच सालों के लिए 2022 तक के लिए अनुबंध था।

प्रो कबड्डी के लिए थी 300 करोड़ की डील
प्रो कबड्डी के लिए वीवो की स्टार इंडिया के साथ 300 करोड़ रुपए की थी। यानी हर साल वीवो को 60 करोड़ रुपए खर्च करने पड़ते थे। दोनों के बीच 2017 में यह डील हुई थी, जो 2022 को खत्म होने वाली थी। जानकारी के अनुसार कोरोना वायरस की वजह से प्रो कबड्डी को 2020 में कैंसल कर दिया गया है। ऐसे में कंपनी की ओर से डील टर्मिनेशन के लिए बोल दिया है।

बिग बॉस से भी अपने आप को दूर
वहीं दूसरी ओर वीवो ने अपने आपको कलर्स चैनल पर आने वाले बिग बॉस के टाइटल स्पांसरशिप से भी दूर कर लिया है। कंपनी का चैनल के साथ 2019 में अनुबंध हुआ। यह अनुबंध 60 करोड़ रुपए का था। कंपनी को प्रत्येक साल 30 करोड़ रुपए का भुगतान चैनल को करना था। अब यहां से भी कंपनी ने जाने का फैसला कर लिया है।

हर साल 1000 करोड़ प्रमोशन पर खर्च
वीवो अपने प्रमोशन पर भारत में एक हजार करोड़ रुपए का खर्च करती है। कंपनी कर ओर से बीसीसीआई के साथ 2018-2022 तक के लिए 2190 करोड़ रुपए की मेगा डील की थी। यानी प्रत्येक वर्ष 440 करोड़ बीसीसीआई को जाता है। वहीं आईपीएल के मैचों के दौरान कंपनी 120-150 करोड़ रुपए खर्च करती है।

आखिर क्या है वीवो की प्लानिंग
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार भारत और चीन टेंशन की वजह से कंपनी मैनेजमेंट यह डिसाइड किया है कि वो इस ब्रांडिंग और प्रमोशन पर ज्यादा खर्च नहीं करने वाली है। इस साल कंपनी का फोकस रीटेल डिस्काउंट के जरिए प्रॉडक्ट बेचने पर लगाया जाएगा। जब तक दोनों देशों के बीच रिश्ते सामान्य या यूं कहें कि पहले जैसे नहीं हो जाते हैं, तब तक कंपनी इसी रणनीति के साथ आगे बढऩे वाली है।

Updated on:
07 Aug 2020 02:07 pm
Published on:
07 Aug 2020 02:04 pm