Alvida 2025,Bye Bye 2025 Shayari: वक्त की रेत हाथों से फिसलती जा रही है और 2025 अब यादों का हिस्सा बनने लगा है।जरा सोचिए, इस साल के साथ क्या-क्या छूट रहा है इन्हीं एहसासों को शायरी में पिरोकर दें 2025 को विदाई।
Alvida 2025: साल 2025 अब यादों के पन्नों में सिमटने जा रहा है। कुछ सपने पूरे हुए, कुछ अधूरे रह गए और कुछ लम्हें ऐसे थे जो हमेशा दिल के करीब रहेंगे। वक्त की रफ्तार के आगे सब ठहर सा गया और अब वो पल आ गया है जब “लो साथ छोड़ने लगा आखिर ये साल भी…” (Bye Bye 2025)जैसे अशआर खुद-ब-खुद जुबां पर आ जाते हैं। आइए, शायरी के इन एहसासों के साथ 2025 को एक भावुक अलविदा कहें और नए साल का स्वागत उम्मीदों के साथ करें।
इक अजनबी के हाथ में दे कर हमारा हाथ
लो साथ छोड़ने लगा आखिर ये साल भी -Alvida 2025
-हफीज मेरठी
इक साल गया इक साल नया है आने को
पर वक्त का अब भी होश नहीं दीवाने को
-इब्न-ए-इंशा
वो जो साल था, अब तकरीबों का हिसाब कर गया,
अब कहां से लाऊं वो फिजा, जो जख्म भर गया।"
-मुमताज मोइन
"सालों की उमर, बदलते हैं जो लम्हें,
अलविदा 2025, अब देखेंगे नए ख्वाबों के सपने।"
-जिगर मुरादाबादी
"हवाओं में वो ताजगी अब कहां रही,
रुखसत हो गया वो साल, जो पास था कभी।"
-फिराक गोरखपुरी
"हर साल की तरह इस साल को भी अलविदा कहते हैं,
समझे नहीं हम कभी, ये पल क्यों गुजरते हैं।"
-आशाराम शर्मा
"वक्त के तूफान में क्या कुछ छूट गया,
गम और खुशी दोनों अब साथ छोड़ गए।"
-नसीम हिजाजी
"जिन्दगी की राहों पर यूं ही साया न था,
कभी आया ये साल, अब अलविदा कर गया।"
-फिराक गोरखपुरी
"एक और साल खत्म हुआ, लेकिन क्या पाया,
बगैर तुझसे कुछ कहे, 2026 चला आया।"
-मीर तकी मीर
"कुछ न था बाकी दिल में अब इस साल के बाद,
2025 को रुखसत करते हुए ये मन उदास।"
-गालिब