Deforestation Due to Coffee Production: हममें से करोड़ों लोग दिन की शुरुआत गरमा-गरम कॉफी से करते हैं, लेकिन क्या आपने सोचा है कि इसका असर हमारी धरती पर कितना बड़ा है?छोटा सा आनंद बन रहा है पर्यावरण पर भारी बोझ।
Deforestation Due to Coffee Production: हममें से करोड़ों लोगों के लिए दिन की शुरुआत तब तक नहीं होती, जब तक हाथ में एक कप गरमा-गरम कॉफी न होलेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि जिस प्याले से आप ताजगी महसूस करते हैं, उसकी कीमत हमारी धरती कैसे चुका रही है?हकीकत यह है कि हमारा यह छोटा सा आनंद पर्यावरण पर बहुत बड़ा बोझ डाल रहा है।जंगलों की कटाई और रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल इसका मुख्य कारण हैं।अगर हम सचेत न हुए, तो हमारी रोजमर्रा की आदतें प्रकृति के लिए लंबे समय तक खतरा बन सकती हैं।
एक कप कॉफी और प्रदूषण का गणित आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि मात्र एक किलोग्राम रोस्टेड कॉफी तैयार करने में करीब 40 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन होता है। गंभीर बात यह है कि कॉफी के कुल प्रदूषण (कार्बन फुटप्रिंट) का 75 से 91 प्रतिशत हिस्सा सीधे तौर पर खेती के चरण से आता है।कॉफी की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए आज बड़े पैमाने पर जंगलों को साफ किया जा रहा है। नतीजा यह है कि हमारी जैव-विविधता खत्म हो रही है और वे 'कार्बन सिंक' (जंगल) नष्ट हो रहे हैं जो पर्यावरण को संतुलित रखते थे।
स्मार्ट खरीदारी: बाजार से कॉफी खरीदते समय देखें कि वह रेनफॉरेस्ट एलायंस, फेयर ट्रेड या ऑर्गनिक हो। शेड-ग्रोन (छाया में उगाई गई) कॉफी चुनना भी एक बेहतरीन विकल्प है।
बिजली की बचत: सिंगल-सर्व पॉड मशीनों का मोह छोड़ें, क्योंकि ये बहुत बिजली खाती हैं। इसकी जगह पारंपरिक फिल्टर या फ्रेंच प्रेस का इस्तेमाल करना ज्यादा पर्यावरण-अनुकूल है।
बर्बादी पर लगाम: अक्सर हम जरूरत से ज्यादा कॉफी बना लेते हैं। उतनी ही कॉफी बनाएं जितनी पीनी हो। बीन्स को हमेशा नापकर इस्तेमाल करें और बचे हुए कॉफी ग्राउंड्स को फेंकने के बजाय उनकी खाद (Compost) तैयार करें।
पैकेजिंग और ब्रांड: ऐसी कंपनियों को सपोर्ट करें जो अपनी सप्लाई चेन में पारदर्शिता रखती हैं और रिसाइकिल होने वाली या कम प्लास्टिक वाली पैकेजिंग का इस्तेमाल करती हैं।
कॉफी में मौजूद कैफीन दिमाग को अलर्ट रखता है और थकान कम करने में मदद करता है। यह फोकस और एनर्जी बढ़ाने के साथ-साथ मूड बेहतर करने में भी सहायक मानी जाती है। सीमित मात्रा में पी गई कॉफी मेटाबॉलिज्म को तेज कर सकती है और एंटीऑक्सिडेंट्स के जरिए शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाने में मदद करती है।
जरूरत से ज्यादा कॉफी पीने से बेचैनी, नींद न आना और दिल की धड़कन तेज होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अधिक कैफीन पाचन को प्रभावित कर सकता है और एसिडिटी या गैस की परेशानी बढ़ा सकता है। कुछ लोगों में यह ब्लड प्रेशर बढ़ाने और डिहाइड्रेशन का कारण भी बन सकती है, इसलिए संतुलन जरूरी है।