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SRS Report: भारत में अकेले जिंदगी गुजार रहीं महिलाओं की संख्या पुरुषों से ढाई गुना ज्यादा

India Divorce And Separation Trends: भारत में पुरुषों की तुलना में अब महिलाएं अधिक स्वतंत्र होकर अकेले रहना पसंद कर रही हैं। आइए जानते हैं कि हालिया आंकड़े इस बढ़ते ट्रेंड के बारे में क्या कहते हैं।
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Jun 04, 2026
India Divorce and Separation Ratio
अकेली रहने वाली महिलाओं को घर-परिवार संभालते हुए और बच्चों की जिम्मेदारी उठाते हुए बहुत सारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।(representative image) image credit gemini

Marital Status Statistics in India: देश में बिना जीवनसाथी के अकेले रहने वाली महिलाओं की संख्या पुरुषों की तुलना में ढाई गुना अधिक हो गई है। हाल ही में जारी हुई सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (Sample Registration System 2024) की सांख्यिकीय रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इस रिपोर्ट के अनुसार, देश में तलाक (Divorce), अलगाव (Separation) या जीवनसाथी की मृत्यु के बाद अकेले रह रहे लोगों में महिलाओं का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। भागदौड़ भरी जिंदगी और बदलते सामाजिक परिवेश के बीच इस रिपोर्ट ने देश में वैवाहिक स्थिति और अकेले रह रहे लोगों के सामाजिक ताने-बाने पर एक नई बहस छेड़ दी है।

तलाक और अलगाव का नया ट्रेंड (Trend of Divorced or Separated People)

Sample Registration System (SRS) Statistical Report के आंकड़ों के हिसाब से, 2024 में देश में लगभग 3.5% लोग ऐसे हैं जो अपना जीवनसाथी खो चुके हैं, तलाकशुदा हैं या फिर अलग रह रहे हैं। ऐसे पुरुषों (1.6%) के मुकाबले महिलाओं (5.4%) की संख्या काफी ज्यादा है।

दक्षिण भारत के राज्यों में सबसे ज्यादा असर (State-wise Situation)

अलग-अलग राज्यों की बात करें, तो तमिलनाडु में सबसे ज्यादा लोग ऐसे हैं जो इस कैटेगरी में आते हैं (7.2%), जबकि बिहार में इनकी संख्या सबसे कम (1.5%) है। अगर सिर्फ महिलाओं की बात करें, तो दक्षिण भारत के राज्यों जैसे तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में इनका प्रतिशत सबसे ज्यादा है। वहीं पुरुषों के मामले में तमिलनाडु, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश टॉप पर हैं।

बुजुर्ग होती आबादी और महिलाओं की लंबी उम्र (Rising Elderly Population)

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि हमारी कुल आबादी का 9.7% हिस्सा 60 साल से ऊपर के बुजुर्गों का है। महिलाओं की उम्र पुरुषों के मुकाबले थोड़ी ज्यादा होती है, इसलिए बुजुर्ग महिलाओं का प्रतिशत (10.1%) बुजुर्ग पुरुषों (9.3%) से थोड़ा ज्यादा है। हालांकि, असम, जम्मू-कश्मीर और पश्चिम बंगाल जैसे कुछ जगहों पर बुजुर्ग पुरुषों की संख्या महिलाओं से ज्यादा है।

अकेलेपन का आर्थिक और सामाजिक असर

अकेले रहने वाली महिलाओं, विशेषकर बुजुर्ग और एकल माताओं (Single Mothers) के सामने केवल सामाजिक ही नहीं, बल्कि गंभीर आर्थिक चुनौतियाँ भी आ रही हैं। भारत में संपत्ति के अधिकारों पर पुरुषों का वर्चस्व और रोजगार के सीमित अवसरों के चलते एकल महिलाओं के लिए जीवनयापन करना बेहद संघर्षपूर्ण साबित हो रहा है। इसके अलावा, महानगरीय संस्कृतियों में 'लिव-अलोन' (Live Alone) ट्रेंड बढ़ने से अब युवा महिलाओं में भी आत्मनिर्भरता के साथ अकेले रहने का चलन बढ़ा है, जो इस आंकड़े को भविष्य में और प्रभावित कर सकता है।

हेल्थ पॉलिसी और सरकारी स्तर पर जरूरी कदम (Health and Necessary Steps)

बुजुर्गों के लिए काम करने वाली संस्थाएं अब सरकार से यह मांग कर रही हैं कि बुजुर्ग महिलाओं की सेहत को लेकर और बेहतर पॉलिसी और प्रोग्राम बनाए जाएं। केरल में बुजुर्ग पुरुषों और महिलाओं, दोनों का प्रतिशत सबसे ज्यादा है। वहीं दिल्ली और झारखंड जैसे इलाकों में बुजुर्ग पुरुषों की संख्या कम है, जबकि असम, बिहार और झारखंड में बुजुर्ग महिलाओं की संख्या सबसे कम देखने को मिली है।

Updated on:
04 Jun 2026 04:02 pm
Published on:
04 Jun 2026 09:37 am