Mithilanchal Traditional Sindoor: जैसे पारंपरिक बिहारी लुक नाक से लेकर मांग तक सिंदूर लगाए बिना अधूरा माना जाता है, वैसे ही पारंपरिक मिथिला लुक धासा सिंदूर के बिना अधूरा माना जाता है। आइए जानते हैं इसे कैसे लगाया जाता है।
Mithilanchal Dhasa Sindoor: बिहार का मिथिलांचल क्षेत्र अपनी खास संस्कृति और परंपरा के लिए जाना जाता है। यहां की मैथिली भाषा, मधुबनी पेंटिंग, पारंपरिक खान-पान, त्योहार और कपड़ों के साथ ही यहां का सिंदूर लगाने का तरीका भी अलग होता है। पहली बार सुनने में आपको छठ पूजा के दौरान या शादी में ट्रेडिशनल बिहारी तरीके से नाक से लेकर मांग तक लगाए जाने वाले सिंदूर की याद दिला रहा होगा, लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह उससे भी अलग तरीके से लगाया जाता है। आइए जानते हैं मिथिलांचल के धासा सिंदूर (Dhasa Sindoor) के बारे में।
मिथिलांचल का प्रसिद्ध धासा सिंदूर लगाने की शुरुआत बिल्कुल आम सिंदूर की तरह ही मांग भरकर होती है, लेकिन इसे बाद में धासा बनाकर सजाया जाता है, जिसके कारण इसे धासा सिंदूर कहते हैं।
धासा सिंदूर लगाने के कई शानदार डिजाइन और तरीके इंटरनेट पर उपलब्ध हैं, जो आपके ट्रेडिशनल मिथिलांचल एथनिक लुक को निखार सकते हैं। लेकिन अगर आप धासा सिंदूर डिजाइन खोज रही हैं, तो आप नीचे दिए गए डिजाइन्स में से एक चुन सकती हैं-
मैथिल परंपरा के अनुसार, इस डिजाइन को ज्यादातर महिलाएं लगाना पसंद करती हैं। इसके लिए सबसे पहले सिंदूर से मांग भर लें। फिर एक पतला छोटा गोला बनाएं, उसके बाद छोटी-छोटी बिंदियां लगाएं। इसके बाद दोबारा एक गोला बनाएं और इससे सटाकर पत्तियां बनाकर इसे पूरा करें। यह ट्रेडिशनल धासा चेहरे को बहुत आकर्षक लुक देता है।
अगर आप एकदम सिंपल और आसानी से बनने वाला धासा डिजाइन खोज रही हैं, तो इसके लिए मांग भरने के बाद माथे के ठीक ऊपर सिंदूर से त्रिकोण या पान के आकार का डिजाइन बनाएं। यह डिजाइन आसान होने के साथ ही एथनिक ड्रेसेस और साड़ी के साथ काफी अच्छा लगता है।