Horse Gram Benefits: आज के समय में फिट रहने के लिए लोग तरह-तरह के प्रोटीन पाउडर और सप्लीमेंट्स का सहारा ले रहे हैं, जबकि हमारी रसोई में ही एक ऐसी देसी दाल मौजूद है जो सेहत का पूरा खजाना है। हम बात कर रहे हैं कुलथी की दाल की, जिसे कई जगह हॉर्स ग्राम भी कहा जाता है।
Horse Gram Benefits: आज के समय में फिट बॉडी और मजबूत मांसपेशियों के लिए लोग महंगे प्रोटीन सप्लीमेंट्स और डाइट प्लान पर निर्भर हो गए हैं, जबकि असली ताकत हमारी देसी थाली में ही छुपी है। सद्गुरु के अनुसार, प्रोटीन पाने के लिए अंडा या सप्लीमेंट ही एकमात्र विकल्प नहीं हैं। उन्होंने एक ऐसी पारंपरिक दाल का जिक्र किया है, जिसे सही मायनों में “प्रोटीन का पावरहाउस” कहा जा सकता है। यह दाल न सिर्फ शरीर को अंदर से मज़बूत बनाती है, बल्कि प्राकृतिक तरीके से ताकत और ऊर्जा भी देती है। हम बात कर रहे हैं कुलथी की दाल की, जिसके फायदे जानकर आप भी इसे अपनी डाइट में शामिल करना चाहेंगे।
कुलथी की दाल प्रोटीन, फाइबर और कई जरूरी मिनरल्स से भरपूर होती है। सद्गुरु भी मानते हैं कि शरीर को ताकत देने के लिए महंगे और प्रोसेस्ड सप्लीमेंट्स की जरूरत नहीं होती। अगर सही देसी आहार को रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल कर लिया जाए, तो शरीर खुद को संतुलित रखना सीख लेता है। खासकर शाकाहारी लोगों के लिए कुलथी की दाल एक बेहतरीन विकल्प मानी जाती है।
कुलथी की दाल को आयुर्वेद में गुर्दे की पथरी के लिए काफी उपयोगी माना गया है। यह एक नेचुरल मूत्रवर्धक की तरह काम करती है, जिससे पेशाब की मात्रा बढ़ती है और पथरी के छोटे टुकड़े बाहर निकलने में मदद मिलती है। नियमित सेवन से भविष्य में पथरी की आशंका भी कम हो सकती है।
इस दाल के नियमित सेवन से खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) कम हो सकता है और अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बढ़ावा मिलता है। इससे दिल की सेहत बेहतर रहती है और नसों में ब्लॉकेज का खतरा कम होता है।
अगर आप वजन कम करना चाहते हैं तो कुलथी की दाल को डाइट में शामिल कर सकते हैं। इसमें मौजूद फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा रखता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती। साथ ही यह शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी को कम करने में भी सहायक मानी जाती है।
शोध बताते हैं कि कुलथी की दाल ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ने से रोकने में मदद करती है। यह इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करने में भी फायदेमंद हो सकती है, जिससे डायबिटीज के मरीजों को लाभ मिलता है।
सद्गुरु के अनुसार, प्रकृति ने हमारे आसपास ही हर समस्या का समाधान रखा है। कुलथी की दाल न सिर्फ शरीर को ताकत देती है, बल्कि मेटाबॉलिज्म को भी सपोर्ट करती है। जिम जाने वाले या ज्यादा शारीरिक मेहनत करने वाले लोगों के लिए यह दाल मांसपेशियों को मजबूत बनाने में सहायक हो सकती है।
आयुर्वेद के अनुसार कुलथी की दाल की तासीर गर्म होती है, इसलिए इसे सीमित मात्रा में और सही तरीके से ही खाना चाहिए। बेहतर पाचन के लिए इसे भिगोकर या अच्छी तरह उबालकर सेवन करना उचित माना जाता है। सर्दियों में इसे रोजाना एक बार और गर्मियों में हफ्ते में 2–3 बार खाने की सलाह दी जाती है। सही मात्रा और सही तरीके से सेवन करने पर कुलथी की दाल सेहत के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।