अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव की मौत की पूरी कहानी। जानें कैसे 13 दिनों के अंदर दो हार्ट अटैक ने उनकी जान ले ली और मुलायम सिंह के साथ उनका रिश्ता कैसा था। पढ़ें पूरी खबर...
Prateek Yadav Death: उत्तर प्रदेश की सियासत में सबसे बड़ा नाम माने जाने वाले यादव परिवार से एक बहुत दुखद खबर सामने आई है। अखिलेश यादव के भाई और मुलायम सिंह यादव के बेटे प्रतीक यादव का निधन हो गया है। प्रतीक को सिर्फ 13 दिनों के अंदर- अंदर दो बार हार्ट अटैक आया, जिसके बाद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। इस खबर के बाद से पूरे समाजवादी परिवार और समर्थकों में शोक की लहर है।
प्रतीक यादव की सेहत पिछले कुछ दिनों से ठीक नहीं चल रही थी। पहली बार 30 अप्रैल को लखनऊ एयरपोर्ट पर फ्लाइट से उतरते समय उन्हें सीने में तेज दर्द हुआ और वे बेहोश होकर गिर पड़े। उस समय जल्दी- जल्दी में उन्हें मेदांता अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने बताया कि वह एक माइनर अटैक था। उस वक्त तो समय पर इलाज मिलने से उनकी जान बच गई थी, लेकिन समय को कुछ और ही मंजूर था।
अस्पताल में इलाज के दौरान डॉक्टरों ने प्रतीक को हाइपरटेंशन और ब्लड क्लॉटिंग (नसों में खून के थक्के) की गंभीर समस्या बताई थी। डॉक्टरों ने उन्हें पूरी तरह आराम करने की सलाह दी थी, लेकिन प्रतीक 3 मई को अचानक अस्पताल से डिस्चार्ज लेकर घर चले गए। 5 मई को उन्होंने पैर की नसों में क्लॉटिंग के लिए लखनऊ के ही एक प्राइवेट अस्पताल में सर्जरी भी करवाई थी।
सर्जरी के बाद प्रतीक घर पर ही रिकवर कर रहे थे। 13 मई की सुबह करीब 6:30 बजे उन्हें दोबारा दिल का दौरा पड़ा। जब तक उन्हें सिविल अस्पताल ले जाया गया, तब तक उनकी सांसें थम चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। भाई को आखिरी बार देख अखिलेश यादव भी भावुक हो गए और कहा कि उन्होंने प्रतीक को अपनी सेहत का ख्याल रखने की सलाह दी थी।
प्रतीक यादव की जिंदगी से जुड़ी सबसे खास बात उनका और मुलायम सिंह यादव का रिश्ता था। प्रतीक, मुलायम सिंह की पत्नी साधना गुप्ता के पहले पति के बेटे थे, लेकिन नेताजी ने उन्हें कभी सौतेला नहीं समझा। साथ ही मुलायम सिंह चाहते थे कि प्रतीक भी राजनीति में अपना कदम रखें। वे उन्हें पार्टी के बड़े नेताओं से मिलवाते थे और दांव-पेच सिखाते थे, लेकिन प्रतीक अक्सर राजनीति में आने से मना करते रहते थे।
शुरुआत में यादव परिवार में इस बात को लेकर चर्चाएं थी कि प्रतीक के आने से अखिलेश के राजनीतिक उत्तराधिकार पर असर पड़ सकता है। लेकिन मुलायम सिंह ने स्पष्ट कर दिया था कि अखिलेश उनके राजनीतिक वारिस है और वे दोनों बेटों में किसी तरह का भेदभाव नहीं करेंगे।