
Allahabad High Court Order: उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेश में किए जा रहे कथित तौर पर हाफ एनकाउंटर को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने हैरानी जताई है। कोर्ट ने कहा है कि पुलिस इस मामले में मुकदमा दर्ज करती है और गिरफ्तारी के दौरान अभियुक्त को पकड़े जाने पर अभियुक्त पुलिस पर अंधाधुंध फायरिंग करता है और पुलिस द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई में अभियुक्त के घुटने के ठीक नीचे गोली लग जाती है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि ऐसे मामलों में अभियुक्त द्वारा चलाई गई गोली पुलिसकर्मियों के वर्दी को भी नहीं छु पाती जबकि पुलिसकर्मियों का निशाना इतना सटीक होता है कि आरोपी के घुटने के ठीक नीचे गोली लग जाती है।
कोर्ट ने कहा है कि इससे प्रतीत होता है कि संबंधित पुलिसकर्मी अपने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को खुश करने, आउट ऑफ टर्न प्रमोशन पाने और सोशल मीडिया पर वाहवाही लूटने के लिए आरोपियों का पैर में गोली मारने की खतरनाक और मनगढ़ंत कहानी रच रहे हैं। कोर्ट ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि सजा देने का अधिकार न्यायपालिका को है, ऐसे में पुलिसकर्मी अब खुद से ही अभियुक्त को सजा देने लगे हैं। कोर्ट ने श्रावस्ती में कथित तौर पर की गई एक मुठभेड़ की सुनवाई करते हुए यह तल्ख टिप्पणी की है। वहीं, पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी है।
हाईकोर्ट ने कहा है कि पुलिस की ओर से दर्ज की गई एफआईआर में कई कमियां देखने को मिली हैं, इसके साथ ही थाना अध्यक्ष ने भी घटना का जो विवरण दिया है, वह संदिग्ध लग रहा है। कोर्ट ने सीबीआई को जांच पूरी कर तीन माह के भीतर रिपोर्ट को न्यायालय के समक्ष पेश करने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने छोटकउ उर्फ अलाउद्दीन की ओर से दाखिल पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
दरअसल, 9 मई 2025 को श्रावस्ती का थाना इकौना में एक एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसमें सफीक नाम के व्यक्ति और दो अज्ञात लोगों के खिलाफ 7 वर्ष की बच्ची के अपहरण का मुकदमा दर्ज हुआ था। इस मामले में सफीक को पकड़ कर पीड़ित पक्ष ने पुलिस को सौंप दिया। वहीं, 12 मई को अलाउद्दीन को इस मामले में मुख्य अभियुक्त बताते हुए पुलिस ने पैर में गोली मारकर गिरफ्तार किया जाना दिखाया था। अभियुक्त के दोनों पैर में गोली लगी थी। इसके बाद पुलिस ने इस मामले में एक अलग से एफआईआर दर्ज की कर ली थी।
इस दौरान थाना अध्यक्ष अश्वनी कुमार दुबे, पांच दरोगा, एक मुख्य आरक्षी और 6 आरक्षी समेत कुल 13 पुलिसकर्मियों की भूमिका सामने आई थी और बताया गया था कि यही पुलिसकर्मी गस्त पर थे। कोर्ट ने कहा कि एक जीप में इतने पुलिसकर्मी का गस्त करना संदिग्ध लग रहा है। पुलिस ने बताया था कि सूचना मिलने के बाद स्वाट टीम के 10 और सदस्य भी अधिक को पकड़ने में शामिल हुए थे। न्यायालय ने सवाल उठाया कि एक देशी तमंचे और दो कारतूस से लैस अभियुक्त को पकड़ने में इतने पुलिसकर्मी नाकाम रहे और बचाव में अभियुक्त के ऊपर पुलिस को गोली चलानी पड़ी।
कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि 23 पुलिसकर्मी मिलकर एक अभियुक्त का हाफ एनकाउंटर करते हैं और अभियुक्त द्वारा चलाई गई गोली पुलिसकर्मियों के वर्दी तक को नहीं छु पाती है। कोर्ट ने दाखिल की गई इस याचिका पर आदेश दिया है कि थाना अध्यक्ष अश्वनी कुमार दुबे की निशानेबाजी की क्षमता की भी जांच की जाए। हाईकोर्ट ने कहा है कि रात में करीब 15 मीटर की दूरी से केवल हथियार को लोड किए जाने के बाद आवाज सुनकर 9 एमएम के सर्विस पिस्टल से सटीक निशाना लगाया जा सकता है कि नहीं इसकी भी जांच की जाएगी। हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले में सुनवाई के लिए 23 नवंबर की तारीख मुकर्रर की है।