लखनऊ

UP Election: महिलाओं के बाद अब दलित वोट की बारी, आखिर 3 राज्यों की 156 सीटों पर BJP-कांग्रेस में किसकी बढ़ेगी पकड़?

Assembly Election: साल 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दलित वोटों को लेकर BJP और कांग्रेस की सक्रियता बढ़ गई है। उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पंजाब की 156 आरक्षित सीटों पर दलित वोट चुनावी समीकरण बदल सकते हैं।
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Sep 07, 2026
BJP Congress
राहुल गांधी और सीएम योगी ( IANS Photo)

Uttar Pradesh Election 2027: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले BJP और कांग्रेस की सियासत में अब दलित वोट बड़ा मुद्दा बनता दिख रहा है। हल्द्वानी के शुद्धीकरण हवन विवाद ने इस बहस को और हवा दे दी है। कांग्रेस इसे दलित सम्मान से जोड़कर भाजपा पर निशाना साध रही है, वहीं भाजपा भी कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति का आरोप लगा रही है। उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पंजाब में दलित मतदाता चुनावी समीकरण बदलने की ताकत रखते हैं। तीनों राज्यों की 156 आरक्षित सीटों के साथ कई सामान्य सीटों पर भी दलित वोट निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

दलित समाज के वोटों से तय होगा सत्ता का खेल

70 विधानसभा सीटों वाले उत्तराखंड में अनुसूचित जाति के लिए 13 सीटें आरक्षित हैं, जबकि दो सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए हैं। राज्य में सरकार बनाने के लिए 36 विधायकों का आंकड़ा चाहिए। ऐसे में आरक्षित सीटों की एक-एक जीत सत्ता के समीकरण को प्रभावित कर सकती है।उत्तराखंड में पिछले चुनावों के दौरान एससी आरक्षित सीटों का गणित भी लगातार बदला है। 2012 में भाजपा और कांग्रेस के बीच इन सीटों पर मुकाबला काफी करीबी रहा था। उस चुनाव में बसपा ने भी दो सीटों पर जीत दर्ज की थी।

इसके बाद साल 2017 में तस्वीर पूरी तरह बदल गई। भाजपा ने 13 में से 11 एससी आरक्षित सीटें जीतकर राज्य में प्रचंड बहुमत की सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई। 2022 में भाजपा की संख्या घटकर नौ रह गई। अब 2027 में कांग्रेस और भाजपा एक बार फिर आमने-सामने हैं।

सामान्य सीटों पर दलित वोटों का प्रभाव

दलित वोट का असर केवल आरक्षित सीटों तक सीमित नहीं है। हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और देहरादून की कुछ सामान्य सीटों पर भी एससी मतदाता जीत-हार का समीकरण बदल सकते हैं। राज्य में दलित मतदाताओं की संख्या करीब 17 से 19 फीसदी बताई जाती है। यही वजह है कि हल्द्वानी विवाद को लेकर दोनों दलों की सक्रियता को 2027 की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है।

यूपी में 22 फीसदी दलित मतदाता

उत्तर प्रदेश में दलित मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 22 फीसदी है। राज्य की 403 विधानसभा सीटों में 86 सीटें अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित हैं। साल 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सिर्फ दो सीटों पर जीत मिली थी और इनमें कोई भी आरक्षित सीट नहीं थी। हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस बाराबंकी सुरक्षित सीट जीतने में कामयाब रही। ऐसे में यूपी में भी दलित वोट कांग्रेस के लिए अपनी पकड़ मजबूत करने का अहम रास्ता हो सकता है।

पंजाब में 34 आरक्षित सीटें

पंजाब में विधानसभा की 34 सीटें एससी वर्ग के लिए आरक्षित हैं, लेकिन दलित मतदाताओं का असर करीब 50 सीटों पर माना जाता है। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने आरक्षित 34 सीटों में से 21 पर जीत दर्ज की थी। 2022 में उसका प्रदर्शन काफी कमजोर रहा और पार्टी सिर्फ तीन आरक्षित सीट जीत सकी। इस वजह से पंजाब में भी 2027 से पहले दलित वोटों पर राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है।

कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने

कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के उत्तराखंड अध्यक्ष मदन लाल का कहना है कि यह प्रकरण भाजपा की संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है। इस मामले में दोषियों पर कार्रवाई होने तक कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी। पूरे प्रदेश में सरकार के खिलाफ विरेाध प्रदर्शन किए जाएंगे। वहीं, भाजपा अनु मोर्चा के उत्तराखंड अध्यक्ष बलबीर घुनियाल का कहना है कि कांग्रेस तुष्टीकरण और वोट बैंक की राजनीति कर रही है। उसे चाहिए कि ऐसी राजनीति से ऊपर उठकर भाईचारे, शांति, एकता और सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने की दिशा में काम करें।

Updated on:
07 Sept 2026 03:54 pm
Published on:
07 Sept 2026 03:54 pm