लखनऊ

पीडीए में ‘पी’ से पंडित करना SP का राजनीतिक छल, अखिलेश के ‘ब्राह्मण प्रेम’ पर मायावती ने पीडीए फॉर्मूले पर कसा तंज

BSP Chief Mayawati: बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने पीडीए फॉर्मूले को लेकर अखिलेश यादव पर तंज कसा है। मायावती ने कहा कि पीडीए में 'पी' का मतलब 'पंडित' करना राजनीतिक छल है और लोगों को ऐसी जातिवादी राजनीति से सावधान रहना चाहिए।
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Aug 08, 2026
BSP chief Mayawati
बसपा सुप्रीमो मायावती (Photo: Patrika)

UP Assembly Elections 2027: बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने समाजवादी पार्टी के 'पीडीए' फॉर्मूले को लेकर अखिलेश यादव पर जोरदार निशाना साधा है। मायावती ने पीडीए में 'पी' शब्द को पिछड़ा से बदलकर 'पंडित' किए जाने को सपा का राजनीतिक छल और चुनावी स्वार्थ करार दिया है। मायावती ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी हमेशा संकीर्ण जातिवादी राजनीति करती है जबकि बसपा सर्वसमाज के हित की बात करती है और जनता को ऐसी स्वार्थी राजनीति से सावधान रहना चाहिए।

'गिरगिट की तरह रंग बदल रही सपा'

मायावती ने अपनी पोस्ट में आगे लिखा कि बहुजन समाज पार्टी "सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय" के सिद्धांत पर चलने वाली पार्टी है। इसी नीति के आधार पर पार्टी ने उत्तर प्रदेश में चार बार अपनी सरकार सफलतापूर्वक चलाई है। वहीं दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी अपनी संकीर्ण जातिवादी राजनीति और चुनावी स्वार्थ के लिए गिरगिट की तरह रंग बदलती रहती है।

क्या है पीडीए फॉर्मूला?

मायावती ने अखिलेश यादव पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि सपा पहले अपने कथित पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक में 'पी' का मतलब सिर्फ पिछड़ा बताती थी। लेकिन अब जब उन्होंने देखा कि अब अपर कास्ट समाज और खासकर ब्राह्मण समाज तेजी से बसपा के साथ जुड़ रहा है और बसपा उन्हें अपना उम्मीदवार भी बना रही है तो सपा विचलित हो गई है। इसी बौखलाहट में सपा ने अब 'पी' का मतलब 'पंडित' प्रचारित करना शुरू कर दिया है जो उनके राजनीतिक छलावे का एक और जीता-जागता प्रमाण है।

सर्वसमाज को किया सावधान

बसपा सुप्रीमो ने जनता को सचेत करते हुए कहा कि ऐसे राजनीतिक छल से किसी एक व्यक्ति को कुछ समय के लिए फायदा जरूर मिल सकता है लेकिन इससे पूरे समाज का कभी भला नहीं हो सकता। मायावती ने अपील की है कि सर्वसमाज के लोगों को ऐसी छलावापूर्ण समाजवादी पार्टी और उसकी संकीर्ण जातिवादी राजनीति से हमेशा सावधान रहना चाहिए। उन्होंने इसे आज के समय की सबसे बड़ी मांग और सर्वसमाज के हित में जरूरी बताया है।

100 सीटों पर है ब्राह्मणों का निर्णायक असर

बता दें कि समाजवादी पार्टी ने 5 अगस्त को जनेश्वर मिश्र की जयंती के मौके पर ब्राह्मण सम्मेलन का आयोजन किया था। इस कार्यक्रम में पार्टी ने अपने पीडीए फॉर्मूले के 'पी' का मतलब 'पंडित' और 'पीड़ित' बताया था। दूसरी तरफ बहुजन समाज पार्टी भी इस बार ब्राह्मण मतदाताओं को अपने साथ जोड़ने पर पूरा फोकस कर रही है। इसे साबित करने के लिए बसपा ने कई ब्राह्मण प्रत्याशियों के नामों की घोषणा भी की है। दरअसल, उत्तर प्रदेश में 12 प्रतिशत से ज्यादा ब्राह्मण आबादी है जो राज्य की लगभग 100 से अधिक विधानसभा सीटों पर हार-जीत का निर्णायक असर रखती है। यही सबसे बड़ी वजह है कि आगामी चुनाव से ठीक पहले हर राजनीतिक दल ब्राह्मणों को अपने पाले में खींचने के लिए अलग अलग तरह के आयोजन कर रहा है।