
Mayawati Appeal Monsoon Session 2026: संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। सत्र शुरू होने से ठीक पहले बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने सोशल मीडिया X पर पोस्ट कर देश के कई ज्वलंत मुद्दों को उठाते हुए सरकार को घेरा है। उन्होंने चिंता जताई है कि क्या हर बार की तरह यह सत्र भी हंगामे की भेंट चढ़ जाएगा या फिर देश की असली समस्याओं पर गंभीरता से चर्चा होगी। उन्होंने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों से जनहित के मुद्दों पर एकजुट होकर काम करने की अपील की है।
मायावती ने कहा कि देश इस वक्त जबरदस्त महंगाई, गरीबी और बेरोजगारी से जूझ रहा है। महिलाओं की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा बन गया है और महत्वपूर्ण परीक्षाओं के पेपर लीक होने से युवाओं में भारी आक्रोश है। उन्होंने मांग की है कि संसद में इन मुद्दों से उत्पन्न माहौल को शांत करने और इनके संतोषजनक समाधान के लिए सरकार को गंभीरता दिखानी चाहिए।
बसपा सुप्रीमो ने अयोध्या के श्री राम मंदिर का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी हेराफेरी और गबन को लेकर जनता में भारी आक्रोश है। इस घटना ने यूपी समेत पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। मायावती ने धर्म का राजनीतिकरण करने वालों को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि जनता उनसे जवाब मांग रही है जिसकी गूंज सड़कों से लेकर अदालत तक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि संसद में भी यह मुद्दा जरूर गूंजेगा और लोगों की इस पर पैनी नजर है।
मायावती ने कई राज्यों की कानून व्यवस्था और सरकारी रवैये पर भी निशाना साधा। उन्होंने बंगाल में चुनाव के बाद के हालात और राजस्थान में लापरवाही के कारण गर्भवती महिलाओं की मौत पर गहरी चिंता जताई। इसके अलावा उन्होंने चुनावी रेवड़ियों में भारी गड़बड़ी, सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार, पुलिस मुठभेड़ के बढ़ते चलन और वर्षों से बसे लोगों की कॉलोनियों पर बुलडोजर कार्रवाई को संविधान की जनकल्याणकारी व्यवस्था के खिलाफ बताया।
वैश्विक मुद्दों का जिक्र करते हुए मायावती ने कहा कि अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे तनाव और रुपये की गिरती कीमत ने भारत की अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि, "अगर राजनीतिक द्वेष और आरोप प्रत्यारोप को छोड़कर सत्ता और विपक्ष ने मिलकर ठोस उपाय नहीं खोजे तो देश के करोड़ों लोगों का भविष्य अधर में लटक जाएगा।"
आखिर में उन्होंने सभी संस्थाओं और नेताओं से अपील की कि वे देशवासियों की मुश्किलें कम करने का प्रयास करें। संसद के मानसून सत्र को बिना किसी रोष के शांतिपूर्ण और स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा के अनुसार चलाया जाना चाहिए क्योंकि जनहितैषी सुशासन के लिए संसद का प्रभावी होना बहुत जरूरी है।