
रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा। फोटो सोर्स-पत्रिका न्यूज
Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust CEO: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नए सीईओ के रूप में एयर मार्शल (रिटायर्ड) जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति पर प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। विपक्षी दलों के नेताओं ने पुराने आरोपों को दोहराते हुए नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं। आरजेडी सांसद मनोज झा ने कहा कि सबसे जरूरी बात यह है कि जो चोरी और डकैती हुई, उस पर पर्दा क्यों डाला गया। उन्होंने आरोप लगाया कि शार्क को बचाया जा रहा है और आस्था के मजाक पर प्रभावशाली लोग चुप रहे। दिल्ली से लेकर लखनऊ तक की चुप्पी में असली कहानी छिपी है।
मुंबई के कांग्रेस विधायक विजय नामदेवराव वडेट्टीवार ने कहा कि पहले कथित लूट हुई और अब सिर्फ सीईओ बदल देने से आरोपों का दाग नहीं मिटेगा। आम लोगों ने श्रद्धा से दान दिया था। उस धन के कथित दुरुपयोग और राजनीतिक इस्तेमाल के आरोपों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वडेट्टीवार ने आगे कहा कि राजनीतिक दल बदलने से भ्रष्टाचार के आरोप खत्म नहीं होते। उसी तरह राम मंदिर ट्रस्ट का सीईओ बदलने से पूरा मामला समाप्त नहीं माना जा सकता। आरोपों का निपटारा सही जांच से ही संभव है।
शिमला में एआईसीसी राष्ट्रीय प्रवक्ता कुलदीप सिंह राठौर ने कहा कि नई नियुक्ति पर टिप्पणी से पहले पुराने विवाद को समझना जरूरी है। चंदे की कथित चोरी सामने आने के बाद तत्कालीन सीईओ और सदस्यों की भूमिका पर देशभर में नाराजगी फैली थी। राठौर ने दावा किया कि सरकार ने एसआईटी जांच कराई, लेकिन अपेक्षित नतीजा नहीं निकला और संबंधित लोगों को क्लीन चिट मिल गई। इसके बावजूद पुराने सदस्यों को हटाकर नए लोगों की नियुक्ति की गई। उन्होंने रिटायर्ड सैन्य अधिकारी को धार्मिक संस्था का सीईओ बनाने पर भी सवाल उठाया।
लखनऊ में समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि सिर्फ एक व्यक्ति को सीईओ बनाने से पुराने सवाल खत्म नहीं होंगे। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शुरू से ही ‘चंदा चोरी’ का मुद्दा उठाया है। यह राष्ट्रीय महत्व का विषय है। अवधेश प्रसाद ने दावा किया कि विवाद के बाद मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं और चढ़ावे में कमी आई है। विपक्ष कोर्ट की निगरानी में कमेटी बनाकर जांच की मांग करता रहा, लेकिन वह नहीं हुई। उन्होंने कोषाध्यक्ष से जुड़े कथित बयानों पर भी सवाल उठाए।
मुंबई में मौलाना हलीमुल्लाह कासमी ने कहा कि राम मंदिर का प्रबंधन ट्रस्ट का आंतरिक मामला है। ट्रस्ट जिसे चाहे सीईओ नियुक्त कर सकता है, रख सकता है या हटा सकता है। कथित चोरी के विवाद पर उन्होंने कहा कि इसे मंदिर से जुड़े लोगों ने ही ‘लूट’ बताया था।
Updated on:
03 Sept 2026 07:51 pm
Published on:
03 Sept 2026 07:51 pm
