लखनऊ

सवा 2 साल बाद आकाश आनंद की सियासी रण में वापसी, बिखरे वोटबैंक साधने की मिली जिम्मेदारी; क्या दिखा पाएंगे 2024 वाला दम

BSP Leader Akash Anand: बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती के भतीजे आकाश आनंद सवा दो साल बाद यूपी की सियासत में वापसी कर रहे हैं। वह हाथरस के सादाबाद से चुनावी अभियान का शंखनाद करेंगे। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या आकाश आनंद फिर 2024 वाला सियासी दम दिखा पाएंगे?
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Aug 10, 2026
BSP Leader Akash Anand, UP Assembly Election 2027, Mayawati
सवा दो साल बाद यूपी की सियासत में आकाश आनंद की वापसी (फोटो- पत्रिका)

UP Assembly Election 2027: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव का अभी भले ही औपचारिक ऐलान नहीं हुआ हो लेकिन सियासी सरगर्मी पूरी तरह से बढ़ गई है। बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती के भतीजे आकाश आनंद करीब सवा दो साल के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर UP में चुनावी हुंकार भरने जा रहे हैं। हाथरस के सादाबाद से वह अपने चुनावी अभियान की शुरुआत करेंगे। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आकाश आनंद अपने 2024 वाले पुराने आक्रामक तेवर में ही नजर आएंगे या फिर उनका अंदाज कुछ बदला हुआ होगा?

मायावती को भतीजे से हैं उम्मीद

बसपा का सियासी जनाधार लगातार खिसक रहा है। 2012 के बाद से पार्टी यूपी की सत्ता से बाहर है। 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को सिर्फ एक सीट मिली और 2024 के लोकसभा चुनाव में बसपा का खाता तक नहीं खुल सका। ऐसे में 2027 का चुनाव मायावती और बसपा के सियासी वजूद को बचाए रखने के लिए 'करो या मरो' वाला है। इसीलिए मायावती को अपने भतीजे से काफि उम्मीदें है। सादाबाद के बाद आकाश आनंद 25 अगस्त को ग्रेटर नोएडा के जेवर में अपनी दूसरी बड़ी रैली करेंगे।

'हाथरस से बजेगा 2027 का बिगुल'

हाथरस की सादाबाद विधानसभा सीट से आकाश आनंद 2027 के चुनावी अभियान की औपचारिक शुरुआत करने जा रहे हैं। बसपा का यह विशाल कार्यकर्ता सम्मेलन सादाबाद के कूपा मार्ग स्थित उत्सव गार्डन में रखा गया है। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि सोमवार को होने वाली इस जनसभा में आकाश आनंद सादाबाद विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी का नाम घोषित कर सकते हैं। पार्टी के अंदर डॉ. अविन शर्मा का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में बताया जा रहा है। हालांकि, बसपा की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। वहीं, जनसभा को सफल बनाने के लिए बाबू मुनकाद अली ने पूरी ताकत झोंक रखी है। माना जा रहा है कि इस कार्यक्रम में करीब 20 हजार बसपा कार्यकर्ता और समर्थक जुटेंगे।

क्या 2024 वाले तेवर में दिखेंगे आकाश?

आकाश आनंद अब दोबारा से यूपी चुनाव में प्रचार की कमान संभाल रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में आकाश ने अपनी शानदार भाषण शैली से देशभर का ध्यान अपनी ओर खींचा था और BSP समर्थकों में एक गजब का उत्साह भर दिया था। उस समय आकाश आनंद आक्रामक अंदाज में BJP, SP और कांग्रेस तीनों पर जमकर हमलावर थे। उन्होंने मोदी सरकार और बीजेपी को निशाने पर लेते हुए मुफ्त राशन से लेकर पेपर लीक जैसे मुद्दों को जोर-शोर से उठाया था। यहां तक कि उन्होंने बीजेपी सरकार को आतंकवादी सरकार तक कह डाला था।

बयान के बाद हुई थी कार्रवाई

आकाश आनंद यहीं नहीं रुके थे बल्कि उन्होंने मंच से लोगों से कहा था कि ऐसी सरकार और उसके प्रतिनिधियों को जूते मारकर सत्ता से बाहर कर देना चाहिए। इसी विवादित बयान के बाद मायावती ने उन पर कड़ा एक्शन लिया था और उनकी तमाम प्रस्तावित रैलियां रद्द कर दी गई थीं। हालांकि बाद में 9 अक्टूबर, 2025 को कांशीराम के परिनिर्वाण दिवस पर मायावती के साथ लखनऊ में आकाश ने जनसभा को संबोधित किया था तब वे बहुत ही सधे हुए अंदाज में नजर आए थे।

आकाश के सामने हैं चुनौतियों के पहाड़

बसपा के लिए 2027 का यूपी विधानसभा चुनाव बहुत अहम है। 2012 से बसपा उत्तर प्रदेश की सत्ता से बाहर है। 2022 के विधानसभा चुनाव में बीएसपी का केवल एक विधायक जीता और 2024 के लोकसभा चुनाव में तो पार्टी का खाता तक नहीं खुल सका। ऐसे में बसपा के सामने अब सिर्फ सत्ता से दूर होने का ही नहीं बल्कि अपने सियासी अस्तित्व को बचाने का संकट भी खड़ा हो गया है।

चंद्रशेखर आजाद भी बड़ी चुनौती

आजाद समाज पार्टी के नेता चंद्रशेखर आजाद नगीना लोकसभा क्षेत्र से सांसद बनने के बाद खुद को बड़े दलित नेता के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। चंद्रशेखर की इसी सियासत को काउंटर करने के लिए मायावती ने आकाश आनंद को पहले से भी ज्यादा पावरफुल बनाकर मैदान में उतारा है। आकाश की दलित युवाओं के बीच अच्छी खासी लोकप्रियता है जिसे अब पार्टी के पक्ष में मोड़ने की बड़ी चुनौती उनके सामने है। इसके साथ ही पार्टी पर लगे BJP की बी-टीम के टैग को हटाना और छिटके हुए मुस्लिम व दलित मतदाताओं को वापस लाना भी उनके लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सवा दो साल बाद यूपी के चुनावी मंच पर लौट रहे आकाश आनंद किस तरह की राजनीतिक रणनीति पेश करते हैं।

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