UP News: ईरान-इजराइल युद्ध के बीच बढ़ते ऊर्जा संकट को लेकर यूपी की योगी सरकार ने बड़े फैसले लिए हैं। मंत्रियों और अफसरों के काफिले 50% घटाए जाएंगे, जबकि सांसद-विधायक हफ्ते में एक दिन बस और मेट्रो से सफर करेंगे।
CM Yogi on Energy Crisis: देश में गहराते ऊर्जा संकट और अंतरराष्ट्रीय हालात के बीच उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बड़ा प्रशासनिक और सामाजिक अभियान शुरू करने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को लखनऊ स्थित सरकारी आवास पर उच्चस्तरीय बैठक में कई बड़े निर्णय लिए। इन फैसलों का उद्देश्य पेट्रोल-डीजल की खपत कम करना, बिजली बचाना और आर्थिक दबाव को नियंत्रित करना बताया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि वैश्विक हालात बेहद संवेदनशील हैं और ऐसे समय में जनता से लेकर सरकार तक सभी को जिम्मेदारी निभानी होगी।
सरकार ने सबसे बड़ा फैसला मंत्रियों, विधायकों और वरिष्ठ अधिकारियों के काफिलों को लेकर लिया है। अब मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद, विधायक और बड़े अफसरों के काफिले में वाहनों की संख्या 50 प्रतिशत तक घटाई जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे सरकारी ईंधन खर्च में बड़ी कमी आएगी और जनता के बीच सकारात्मक संदेश जाएगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस फैसले को तुरंत प्रभाव से लागू किया जाए।
योगी सरकार ने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के लिए एक और अहम नियम बनाया है। अब सप्ताह में एक दिन मंत्री, विधायक, सांसद और अधिकारी सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करेंगे। जिन शहरों में मेट्रो सुविधा उपलब्ध है, वहां मेट्रो का इस्तेमाल किया जाएगा, जबकि अन्य जगहों पर बस और सार्वजनिक साधनों से यात्रा करने पर जोर दिया जाएगा। सरकार इसे जन सहभागिता अभियान के रूप में पेश कर रही है ताकि आम लोग भी ऊर्जा बचत के इस अभियान से जुड़ सकें।
ऊर्जा बचत के लिए सरकारी दफ्तरों में भी बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि अधिकांश सरकारी बैठकें, सेमिनार, कॉन्फ्रेंस और वर्कशॉप अब ऑनलाइन माध्यम से आयोजित किए जाएं। राज्य सचिवालय की 50 प्रतिशत बैठकों को भी वर्चुअल मोड में करने का निर्णय लिया गया है। सरकार का कहना है कि इससे न केवल ईंधन और बिजली की बचत होगी बल्कि समय और संसाधनों का भी बेहतर उपयोग हो सकेगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन निजी कंपनियों में बड़ी संख्या में कर्मचारी काम करते हैं, उनके लिए सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम की एडवाइजरी जारी की जाए। सरकार का मानना है कि इससे ट्रैफिक कम होगा, पेट्रोल-डीजल की खपत घटेगी और प्रदूषण में भी कमी आएगी। आईटी सेक्टर और कॉर्पोरेट कंपनियों को इस व्यवस्था को प्राथमिकता देने के लिए कहा जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने आम जनता से भी कई महत्वपूर्ण अपीलें की हैं। उन्होंने कहा कि सप्ताह में एक दिन नो व्हीकल डे मनाया जाए। लोग अनावश्यक रूप से निजी वाहन न निकालें और संभव हो तो साइकिल या सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें। इसके अलावा पेट्रोल-डीजल और बिजली की बचत करने, सजावटी लाइटों का कम इस्तेमाल करने और जरूरत न होने पर सोने की खरीदारी से बचने की भी अपील की गई है। सरकार का कहना है कि इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और आर्थिक दबाव कम होगा।
बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्तमान समय में पूरी दुनिया अस्थिरता और आर्थिक दबाव के दौर से गुजर रही है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संकटों का असर भारत पर भी पड़ रहा है, इसलिए हर नागरिक को जिम्मेदारी निभानी होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो आह्वान किया है, उसका पालन करना देशहित में जरूरी है। उन्होंने निर्देश दिए कि सरकारी कर्मचारियों, स्कूल-कॉलेजों के छात्रों और समाज के विभिन्न वर्गों को इस अभियान से जोड़ा जाए।
सरकार की इस सक्रियता के पीछे ईरान-इजराइल युद्ध को बड़ा कारण माना जा रहा है। युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है और कई देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है। भारत जैसे तेल आयात पर निर्भर देश पर इसका असर ज्यादा दिखाई दे रहा है। इसी वजह से केंद्र सरकार लगातार ईंधन बचाने और खर्च नियंत्रित करने की अपील कर रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 और 11 मई को अलग-अलग कार्यक्रमों में जनता से पेट्रोल, डीजल और गैस के सीमित उपयोग की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि भारत के पास तेल के बड़े भंडार नहीं हैं और वैश्विक संकट के बीच देश को आत्मसंयम की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने लोगों से मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करने, वर्क फ्रॉम होम अपनाने और अगले एक साल तक सोने की खरीदारी कम करने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा था कि इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा।
प्रधानमंत्री की अपील के बाद विपक्ष ने केंद्र सरकार पर तीखे सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि जनता को लगातार त्याग और संयम का संदेश देना सरकार की नाकामी का संकेत है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि सरकार जनता से पेट्रोल कम इस्तेमाल करने, सोना न खरीदने और विदेश यात्रा कम करने को कह रही है, लेकिन महंगाई और आर्थिक संकट से राहत देने के ठोस कदम नहीं उठा रही।
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार अर्थव्यवस्था और विदेश नीति दोनों संभालने में विफल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव खत्म होते ही सरकार को अचानक संकट दिखाई देने लगा। वहीं बसपा प्रमुख मायावती ने भी केंद्र सरकार से गरीबों और मध्यम वर्ग को राहत देने के लिए ठोस आर्थिक पैकेज की मांग की।
आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने भी प्रधानमंत्री की अपील पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान सरकार जनता को राहत देती रही, लेकिन चुनाव खत्म होते ही लोगों से पेट्रोल-डीजल और गैस कम इस्तेमाल करने को कहा जा रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार को यह बातें चुनाव के समय क्यों याद नहीं आईं।