
Akhilesh Yadav: एफसीआरए बील को लेकर संसद से बाहर भी सियासी घमासान तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए भारतीय धन के विदेश जाने और विदेशी फंड पर लगने वाली पाबंदियों को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि FCRA के जरिए संस्थाओं पर नियंत्रण हासिल करने की कोशिश की जा रही है। इसी दौरान अखिलेश यादव ने BJP को ‘लैंड माफिया’ पार्टी बताया।
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार विदेशी फंडिंग को नियंत्रित करने के नाम पर संस्थाओं पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को पहले यह बताना चाहिए कि देश का कितना पैसा विदेश जा रहा है। अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार को पहले यह बताना चाहिए कि भारत का कितना पैसा विदेश जा रहा है। विदेश से पैसा लाने पर प्रतिबंध हैं, लेकिन भारतीय पैसा कितना बाहर जा रहा है, इस पर कोई रोक नहीं है। जब से बीजेपी सत्ता में आई है, अमीरों के अच्छे दिन आए हैं। बड़े लोग ही फल-फूल रहे हैं। सरकार उन पर प्रतिबंध कब लगाएगी।
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि अगर सरकार भारतीय धन के विदेश जाने पर रोक नहीं लगाती है तो इससे यह संदेश जाता है कि FCRA का इस्तेमाल केवल अल्पसंख्यकों को परेशान करने या आतंकवाद और आतंक के वित्तपोषण के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संदेश देने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह सच्च है कि बड़ी मात्रा में भारतीय पैसा विदेश जा चुका है।
अखिलेश यादव ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि FCRA के जरिए संस्थाओं पर नियंत्रण करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा, हम सरकार से सवाल पूछते हैं कि लाठियां क्यों चलाई गईं, आंसू गैस के गोले क्यों दागे गए और बिजली के झटके क्यों दिए गए। अब वे FCRA ला रहे हैं। जबकि भारत सरकार और बीजेपी ने हमें भरोसा दिलाया था कि भारत का पैसा देश से बाहर नहीं जाएगा। अनगिनत लोगों ने भारत से बड़ी रकम बाहर ले ली है, आधिकारिक और अनौपचारिक दोनों तरीकों से उन्होंने आगे आरोप लगाया कि सरकार की मंशा संस्थाओं को अपने नियंत्रण में लेने की है।
विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक, 2026 को मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में दोबारा पेश किया गया है। सरकार के अनुसार, इस विधेयक का उद्देश्य विदेश से मिलने वाले चंदे और आर्थिक मदद से जुड़े नियमों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है। प्रस्तावित कानून में एक नामित प्राधिकरण बनाने का प्रावधान है। यह प्राधिकरण उन संस्थाओं की विदेशी फंड से खरीदी गई संपत्तियों की निगरानी करेगा, जिनका एफसीआरए पंजीकरण रद्द हो चुका है, समाप्त हो गया है या जिन्होंने अपना पंजीकरण वापस ले लिया है।