लखनऊ

लखनऊ में सैयद सैफ अब्बास बोले- इस्लाम जबरन धर्मांतरण के खिलाफ, शिक्षा संस्थानों की समितियां निष्पक्ष हों

Syed Saif Abbas Love Jihad Debate: लखनऊ में शिया धर्मगुरु सैयद सैफ अब्बास ने कहा कि इस्लाम जबरन धर्मांतरण की अनुमति नहीं देता। शैक्षणिक संस्थानों में बनने वाली समितियां निष्पक्ष, पारदर्शी और न्यायपूर्ण होनी चाहिए।

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Jun 11, 2026
शैक्षणिक संस्थानों में बनने वाली समितियां निष्पक्ष और न्यायपूर्ण हों  (फोटो सोर्स : भाषा संवाद WhatsApp News Group) 
शैक्षणिक संस्थानों में बनने वाली समितियां निष्पक्ष और न्यायपूर्ण हों  (फोटो सोर्स : भाषा संवाद WhatsApp News Group) 


Love Jihad Debate Syed Saif Abbas: उत्तर प्रदेशमें जबरन धर्मांतरण और शैक्षणिक संस्थानों में छात्र-छात्राओं के बीच संबंधों को लेकर चल रही बहस के बीच वरिष्ठ शिया धर्मगुरु सैयद सैफ अब्बास ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि इस्लाम किसी भी प्रकार के जबरन धर्मांतरण की अनुमति नहीं देता। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि धर्म के नाम पर किसी व्यक्ति पर दबाव बनाना या उसकी स्वतंत्र इच्छा के विरुद्ध धर्म परिवर्तन कराना इस्लामी शिक्षाओं के खिलाफ है।

सैयद सैफ अब्बास ने कहा कि वर्तमान समय में समाज को संवेदनशील विषयों पर संतुलित और जिम्मेदार दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कई बार सामाजिक और व्यक्तिगत मामलों को बिना पूरी जांच-पड़ताल के धार्मिक रंग दे दिया जाता है, जिससे समाज में अनावश्यक तनाव पैदा होता है। ऐसे मामलों में तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष निर्णय लेना ही सबसे उचित रास्ता है।

दोस्ती और संबंधों को धर्मांतरण से जोड़ना उचित नहीं

उन्होंने कहा कि विद्यालयों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों जैसे शैक्षणिक संस्थानों में विभिन्न समुदायों और पृष्ठभूमि के छात्र-छात्राएं एक साथ पढ़ते हैं। ऐसे माहौल में मित्रता होना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। युवा एक-दूसरे के संपर्क में आते हैं, विचार साझा करते हैं और कई बार उनके बीच व्यक्तिगत संबंध भी विकसित हो जाते हैं।

सैयद सैफ अब्बास ने कहा कि यदि किसी संबंध में बाद में मतभेद या विवाद उत्पन्न हो जाए तो हर मामले को सीधे धार्मिक परिवर्तन या धर्मांतरण से जोड़कर देखना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक घटना की परिस्थितियां अलग होती हैं और उसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक होती है। बिना पर्याप्त प्रमाण के किसी भी संबंध को धर्मांतरण का मामला घोषित करना सामाजिक सौहार्द के लिए भी उचित नहीं माना जा सकता।

राज्यपाल के प्रस्ताव पर जताई सहमति

शिया धर्मगुरु ने राज्यपाल द्वारा शैक्षणिक संस्थानों में अनुशासन और संभावित अनियमितताओं की रोकथाम के लिए समितियां गठित करने संबंधी प्रस्ताव पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकार की गलत गतिविधियों, उत्पीड़न, धोखाधड़ी या अन्य अनुचित कृत्यों को रोकने के उद्देश्य से कानून या व्यवस्था बनाई जाती है तो उस पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थान शिक्षा और व्यक्तित्व निर्माण के केंद्र होते हैं। ऐसे स्थानों पर छात्रों की सुरक्षा, सम्मान और स्वतंत्रता सुनिश्चित करना प्रशासन और संस्थान दोनों की जिम्मेदारी है। यदि किसी समिति का गठन इस उद्देश्य से किया जाता है कि छात्रों के हितों की रक्षा हो और किसी भी प्रकार की शिकायत का समय पर समाधान हो, तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए।

निष्पक्षता और पारदर्शिता सबसे जरूरी

हालांकि सैयद सैफ अब्बास ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी समिति या निगरानी तंत्र की सफलता उसकी निष्पक्षता पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि यदि समितियां केवल एक पक्ष को ध्यान में रखकर कार्य करेंगी तो उनका उद्देश्य पूरा नहीं हो सकेगा। इसलिए जरूरी है कि ऐसे सभी निकाय न्यायपूर्ण, पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से काम करें।

उन्होंने कहा कि समिति में ऐसे लोगों को शामिल किया जाना चाहिए जिनकी सामाजिक प्रतिष्ठा अच्छी हो और जो बिना किसी पूर्वाग्रह के मामलों की समीक्षा कर सकें। किसी भी छात्र या छात्रा के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए और हर शिकायत को समान गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की जरूरत

सैयद सैफ अब्बास ने कहा कि वर्तमान समय में समाज के सामने सबसे बड़ी चुनौती आपसी विश्वास और सामाजिक सौहार्द को बनाए रखने की है। उन्होंने कहा कि धर्म, जाति या समुदाय के आधार पर विभाजन की मानसिकता समाज को कमजोर करती है। इसलिए ऐसे मुद्दों पर राजनीतिकया सामाजिक बयानबाजी के बजाय संवेदनशील और जिम्मेदार दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी विविधता और बहुलतावादी संस्कृति से है। यहां विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग सदियों से मिल-जुलकर रहते आए हैं। इस परंपरा को मजबूत बनाए रखने के लिए सभी वर्गों को संयम और समझदारी का परिचय देना होगा।

संवाद और जागरूकता से निकलेगा समाधान

शिया धर्मगुरु ने कहा कि समाज में उत्पन्न होने वाले अधिकांश विवाद संवाद और जागरूकता के माध्यम से सुलझाए जा सकते हैं। युवाओं को नैतिक मूल्यों, संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करना समय की आवश्यकता है। इसके साथ ही अभिभावकों, शिक्षकों और सामाजिक संगठनों को भी सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की समस्या का समाधान कानून के दायरे में रहकर और न्यायसंगत तरीके से किया जाना चाहिए। समाज में शांति, भाईचारे और पारस्परिक सम्मान की भावना को मजबूत करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

सैयद सैफ अब्बास के इस बयान को प्रदेश में चल रही बहस के बीच एक संतुलित और महत्वपूर्ण हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने जहां जबरन धर्मांतरण को स्पष्ट रूप से इस्लाम विरोधी बताया, वहीं शैक्षणिक संस्थानों में बनने वाली समितियों की आवश्यकता को स्वीकार करते हुए उनकी निष्पक्षता और पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया। उनके इस बयान ने सामाजिक सौहार्द, न्याय और संवैधानिक मूल्यों के महत्व को एक बार फिर रेखांकित किया है।

सोशल पर शिया धर्मगुरु बोले

शिया धर्मगुरु सैयद सैफ अब्बास ने कहा, "जबरन धर्म परिवर्तन के बारे में, मेरा मानना ​​है कि इस्लाम खुद इसकी बुराई करता है और ऐसी प्रथाओं की इजाज़त नहीं देता। हमें यह भी समझने की ज़रूरत है कि एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन में दोस्ती अपने आप होती है। अगर उन रिश्तों में मतभेद होते हैं, तो इसे अपने आप धर्म परिवर्तन का मामला नहीं कह देना चाहिए। जहाँ तक गवर्नर के प्रस्ताव की बात है, अगर एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन में किसी भी तरह के गलत काम को रोकने के लिए ऐसा कोई कानून लाया जाता है, तो उस मकसद के लिए कमेटियाँ ज़रूर बनाई जा सकती हैं, और इस पर कोई एतराज़ नहीं है। हालाँकि, ऐसी किसी भी कमिटी को निष्पक्ष और बिना भेदभाव के काम करना चाहिए..."

Updated on:
11 Jun 2026 09:45 am
Published on:
11 Jun 2026 09:41 am