
Waqf Board Controversy: उत्तर प्रदेश वक्फ बोर्ड में बदलाव और इसमें हिंदू सदस्यों को शामिल किए जाने की चर्चाओं पर सियासी बयानबाजी जारी है। अब इसी कड़ी में ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि 'मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, ऐसे में इतनी हड़बड़ी ठीक नहीं है।'
वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्यों की संभावित एंट्री पर सवाल उठाते हुए मौलाना साजिद रशीदी ने एक बड़ा तर्क दिया। उन्होंने कहा कि जब किसी हिंदू कमेटी या मंदिर कमेटी में कोई मुसलमान सदस्य नहीं हो सकता तो फिर, वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्य को क्यों शामिल किया जा रहा है? उन्होंने कहा कि यह अपने आप में एक बहुत बड़ा सवाल है जिसका जवाब दिया जाना चाहिए।
मौलाना रशीदी ने इस पूरे मामले को राजनीति से प्रेरित बताया। उनका मानना है कि सरकार यह सब 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को ध्यान में रखकर कर रही है। उन्होंने सलाह दी कि जब तक सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पूरी नहीं हो जाती और अंतिम फैसला नहीं आ जाता तब तक इस विषय पर कोई भी जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। इसके साथ ही मौलाना रशीदी ने कहा कि इस इस बात में कोई दो राय नहीं है कि सपा और कांग्रेस सरकार के दौरान कुछ मुस्लिम युवा गलत रास्ते पर चले गए थे। उन्होंने यह भी कहा कि अब स्थिति में बदलाव आया है और इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता।
सरकार द्वारा किए जा रहे खर्च पर मौलाना रशीदी ने कहा कि यह कहना बिल्कुल उचित नहीं है कि अब सरकार का पैसा सिर्फ मंदिरों में लगाया जा रहा है और पहले केवल कब्रिस्तानों में लगाया जाता था। अगर सरकार मंदिरों पर खर्च कर रही है तो कब्रिस्तानों पर भी करना चाहिए। इसके साथ ही अगर पहले कब्रिस्तानों पर खर्च होता था तो मंदिरों पर भी होना चाहिए था। आगे उन्होंने कहा कि सरकार को समाज के सभी वर्गों के विकास और बराबरी के लिए संतुलित सोच के साथ काम करना चाहिए।