लखनऊ

परिवहन निगम कर्मचारियों को बढ़े दर से होगा महंगाई भत्ते का भुगतान

परिवहन निगम ने अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ा तोहफा दिया है।

2 min read
Apr 13, 2018
upsrtc

लखनऊ. परिवहन निगम ने अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ा तोहफा दिया है। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के पूर्णकालिक और पेंशनेबुल कार्मिकों को 132 की दर से महंगाई भत्ता देने की स्वीकृति मिल गई है। इस सम्बन्ध में पूर्व में स्वीकृत 125 प्रतिशत महंगाई भत्ते की दर में 07 प्रतिशत की वृद्धि करते हुये कुल 132 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ते का भुगतान करने की स्वीकृति शुक्रवार को प्रदान की गई है ।

प्रबंध निदेशक ने जारी किये आदेश

महंगाई भत्ते का भुगतान दिनांक 01.07.2016 से किये जाने के आदेश परिवहन निगम के प्रबन्ध निदेशक पी गुरू प्रसाद ने जारी किये हैं । इस आदेश के मुताबिक माह अप्रैल 2018 देय मई 2018 का वेतन 132 प्रतिशत मंहगाई भत्ते की दर स्वीकृत करते हुए आहरित करने की अनुमति प्रदान की गई है । इस आदेश के अलावा परिवहन निगम के सेवानिवृत्त कार्मिको को भी यह लाभ मिलेगा ।

22 हज़ार कर्मचारियों और पेंशनरों को मिलेगा लाभ

जिन पेंशनभोगियों को निगम स्तर से पेंशन का भुगतान किया जा रहा है, उन्हें इसी आदेश के अनुसार 132 प्रतिशत की दर से महंगाई राहत का भुगतान दिनांक 01.07.2016 से पेंशन पर राहत के रूप में किया जायेगा । इससे निगम के लगभग 22 हजार नियमित और पेंशन कर्मी लाभान्वित होगें ।

यह भी पढें - हेल्थकेयर, ड्रग एंड फार्मास्युटिकल सेक्टर में रोजगार के लिए इन पाठ्यक्रमों में लें प्रवेश, जानिए पूरी प्रक्रिया

Published on:
13 Apr 2018 06:46 pm
Also Read
View All
समाजवादी पार्टी में बड़ी बगावत? रामगोपाल यादव ने गृहमंत्री अमित शाह को सौंपी चिट्ठी, ओपी राजभर ने दिए बड़े संकेत

मुहर्रम पर शक्ति प्रदर्शन नहीं चलेगा! 12 फीट से ऊंचे ताजिया की नहीं मिलेगी अनुमति, योगी सरकार का बड़ा फैसला

UP में ओला-ऊबर जैसी कंपनियों नहीं चलेगी मनमानी; ड्राइवर ने बुकिंग कैंसिल की तो लगेगा जुर्माना, नई एग्रीगेटर पॉलिसी में सरकार ने बनाए सख्त नियम

‘जो कभी राम मंदिर के पक्ष में नहीं थे, वे राजनीति कर रहे’, चढ़ावा चोरी मामले पर अनुराग ठाकुर ने विपक्ष को घेरा, कांग्रेस बोली- इस लूट के जिम्मेदार PM मोदी

अयोध्या राम मंदिर दान मामले में SIT गठन पर अखिलेश यादव ने उठाए सवाल, कहा- संतों की जांच होगी, अफसरों की नहीं?