
Uttar Pradesh Supplementary Budget: उत्तर प्रदेश सरकार मंगलवार को विधानसभा में अनुपूरक बजट पेश करने जा रही है, जिसमें 7.50 लाख से अधिक मानदेय कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत का ऐलान हो सकता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा वर्करों, ग्राम चौकीदारों और मिड-डे मील रसोइयों के मानदेय में बढ़ोतरी की व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही आउटसोर्स सेवा निगम भी जल्द काम शुरू करेगा, जिससे आउटसोर्स कर्मचारियों के न्यूनतम मानदेय को सुनिश्चित करने की दिशा में नई व्यवस्था लागू होने की उम्मीद है।
प्रदेश में करीब 1.80 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, 1.60 लाख से अधिक आशा वर्कर, लगभग 60 हजार ग्राम चौकीदार और 3.53 लाख रसोइए विभिन्न सरकारी योजनाओं में सेवाएं दे रहे हैं। लंबे समय से ये सभी मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे थे। अब सरकार ने अनुपूरक बजट के जरिए इनके सम्मानजनक मानदेय की व्यवस्था करने की तैयारी कर ली है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 9 सालों में 6 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से बाहर लाया गया है। महिलाओं की सुरक्षा और युवाओं के रोजगार की दिशा में सरकार ने प्रभावी कदम उठाए है। महिला कार्यबल की भागीदारी 12 प्रतिशत से बढ़कर 38 प्रतिशत हो चुकी है। सरकार हर बड़े शहर में महिलाओं के लिए वर्किंग हॉस्टल बनवा रही है। सरकारी नौकरियों में महिलाओं की भागीदारी का नया रेकॉर्ड बना है।
विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मीडिया से बातचीत में कहा, सरकार आंगनबाड़ी वर्कर, आशा, ग्राम चौकीदारों और रसोइयों के सम्मानजनक मानदेय की व्यवस्था अनुपूरक बजट के जरिए करेगी। सरकार मंगलवार को विधानसभा में अनुपूरक बजट पेश करेगी।
मुख्यमंत्री ने आउटसोर्स कर्मचारियों को लेकर भी बड़ा संकेत दिया। उन्होंने कहा कि अगले एक से डेढ़ हफ्ते में आउटसोर्स सेवा निगम भी अपना कामकाज शुरू कर देगा, जिसके जरिए आउटसोर्स कर्मियों का न्यूनतम मानदेय सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह महीना किसानों की खेती, युवाओं के प्रवेश और आस्थावानों के लिए कांवड़ यात्रा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है और सभी को इसकी शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सदन आमजन की आवाज को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का माध्यम होता है। गरीब, युवा, किसान और महिलाओं के मुद्दे उठाने और उन्हें परिणाम तक पहुंचाने की प्रक्रिया विधायिका है। इस प्लैटफॉर्म का बेहतर उपयोग हो, यही भाजपा-नीत एनडीए की प्राथमिकता रही है। पिछले 9 सालों से इस संवाद और जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए मुद्दों की समीक्षा के आधार पर बनी योजनाओं से ही प्रदेश में आमूल-चूल परिवर्तन हो पाया है।