
उत्तर प्रदेश के बिजली विभाग में चल रहा विवाद अब दिल्ली दरबार तक पहुंच गया है। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने इस पूरे मामले में सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर तत्काल दखल देने की मांग की है। राज्य में बिजली बिल पर लगाए गए दस परसेंट पावर परचेज सरचार्ज के बाद ऊर्जा मंत्री और पावर कॉर्पोरेशन के बीच खुली जंग छिड़ गई है। इसी घमासान को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार से उच्च स्तरीय जांच कराने की अपील की है।
बिजली महकमे के इस भारी घमासान पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखा है। अजय राय ने अपने पत्र में कहा है कि उत्तर प्रदेश की जनता पहले से ही भयंकर बेरोजगारी और महंगाई का दंश झेल रही है। अब प्रशासनिक मतभेद और संस्थागत टकराव के कारण जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के भीतर चल रहे इस आपसी टकराव का सीधा खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने अपने पत्र में हमला बोलते हुए कहा कि जब विभाग का राजनीतिक प्रमुख यानी कैबिनेट मंत्री खुद यह कह रहा है कि उसकी जानकारी के बिना फैसले लिए जा रहे हैं तो यह कोई सामान्य प्रशासनिक मतभेद नहीं है। अजय राय ने इसे सरकार की शासन व्यवस्था की गंभीर विफलता का संकेत बताया है। उन्होंने प्रधानमंत्री से मांग की है कि वह उत्तर प्रदेश की जनता के हितों की रक्षा के लिए इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करें।
बीते दिनों प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं पर दस परसेंट पावर परचेज सरचार्ज लगा दिया गया। इस फैसले के खिलाफ उपभोक्ता परिषद ने विद्युत् नियामक आयोग का दरवाजा खटखटाया। वहीं इस फैसले से यूपी के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा भी UPPCL के चेयरमैन आशीष गोयल पर भड़क गए। ऊर्जा मंत्री ने सीधे चेयरमैन को पत्र लिखकर पूछा कि बिना उनकी जानकारी और अनुमति के इतना बड़ा फैसला कैसे ले लिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके बार-बार मना करने के बावजूद कुशल कर्मचारियों को हटाया जा रहा है और मनमाने ढंग से अकुशल लोगों की भर्ती की जा रही है। जिसका खामियाजा अब विभाग को भुगतना पड़ रहा है।