लखनऊ

पंचायत चुनाव: ग्राम प्रधानों, ब्लॉक प्रमुखों, जिला पंचायत अध्यक्षों का बढ़ेगा कार्यकाल! पंचायती राज मंत्री ओपी राजभर ने लखनऊ में दिया बड़ा बयान

Panchayat Chunav Update: पंचायत चुनाव को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। पंचायती राज मंत्री ओपी राजभर का कहना है कि ग्राम प्रधानों, ब्लॉक प्रमुखों, जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है।

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Apr 29, 2026
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जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुखों का बढ़ सकता है कार्यकाल। फोटो सोर्स-पत्रिका न्यूज

Panchayat Chunav Update: उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से पहले पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को लेकर हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने आयोग के गठन में देरी को गंभीरता से लेते हुए पंचायती राज विभाग के अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव अनिल कुमार से जवाब तलब किया है।

न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया की एकल पीठ ने यह आदेश स्थानीय अधिवक्ता मोतीलाल यादव की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 19 मई तय की है।

अवमानना याचिका में सरकार के आश्वासन का हवाला

याचिका में कहा गया है कि 4 फरवरी 2026 को हाईकोर्ट के समक्ष राज्य सरकार ने भरोसा दिया था कि पंचायत चुनाव से पहले पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन कर लिया जाएगा। साथ ही आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही ओबीसी आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसी सरकारी आश्वासन के आधार पर कोर्ट ने उस समय संबंधित याचिका निस्तारित कर दी थी, लेकिन अब तक आयोग का गठन नहीं होने पर इसे कोर्ट के आदेश की अवहेलना बताते हुए अवमानना कार्रवाई की मांग की गई है।

OBC आरक्षण और पंचायत चुनाव पर नजर

यह मामला सिर्फ आयोग गठन तक सीमित नहीं है, बल्कि पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण की प्रक्रिया से भी जुड़ा हुआ है। माना जा रहा है कि आयोग की रिपोर्ट के बिना आरक्षण व्यवस्था और चुनाव कार्यक्रम दोनों प्रभावित हो सकते हैं। इसी वजह से यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर अहम माना जा रहा है।

पंचायत चुनाव टलने पर कार्यकाल बढ़ाने के संकेत

इधर पंचायत चुनाव को लेकर अनिश्चितता के बीच पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर (Om Prakash Rajbhar) ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर समय पर पंचायत चुनाव नहीं होते हैं तो ग्राम प्रधानों, ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार इस प्रस्ताव के समर्थन में है और जरूरत पड़ने पर इसे मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाएगा।

‘पदेन पदाधिकारियों को बनाया जा सकता है प्रशासक’

राजभर ने कहा कि अगर चुनाव नहीं होते, तो वर्तमान निर्वाचित पदाधिकारियों को ही प्रशासक बनाकर उनका कार्यकाल बढ़ाने का प्रस्ताव लाया जा सकता है। उन्होंने तर्क दिया कि राजस्थान (Rajasthan), मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) और उत्तराखंड (Uttarakhand) में भी इस तरह की व्यवस्था अपनाई गई है, ऐसे में उत्तर प्रदेश में भी मजबूत प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।

कार्यशाला में ब्लॉक प्रमुखों ने की नारेबाजी

पंचायती राज निदेशालय में आयोजित राज्य स्तरीय विशेष कार्यशाला के दौरान यह मुद्दा और गर्माता दिखा। कुछ ब्लॉक प्रमुखों ने चुनाव टलने की स्थिति में कार्यकाल बढ़ाने की मांग को लेकर नारेबाजी भी की। ब्लॉक प्रमुख संघ के अध्यक्ष धीरेन्द्र प्रताप सिंह और संरक्षक जगमोहन सिंह यादव ने पदेन पदाधिकारियों को प्रशासक बनाए जाने की मांग उठाई।

चुनाव बनाम प्रशासक नियुक्ति पर बहस तेज

पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्ति की ओर बढ़ रहा है, ऐसे में चुनाव समय पर होंगे या प्रशासक नियुक्त होंगे, यह बड़ा सवाल बना हुआ है। प्रशासनिक हलकों में भी इस पर चर्चाएं तेज हैं। एक तरफ हाईकोर्ट ओबीसी आयोग गठन को लेकर जवाब मांग रहा है, तो दूसरी ओर चुनाव न होने की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था पर सरकार विचार करती दिख रही है।

19 मई की सुनवाई पर टिकी नजर

अब इस पूरे मामले में सबकी नजर 19 मई की अगली सुनवाई पर टिकी है। माना जा रहा है कि हाईकोर्ट की अगली टिप्पणी पंचायत चुनाव, ओबीसी आरक्षण और पंचायत प्रतिनिधियों के भविष्य पर बड़ा असर डाल सकती है। बता दें कि ग्राम प्रधानों का 5 साल का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है, लेकिन पंचायत चुनाव समय पर कराना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में सरकार वैकल्पिक व्यवस्था लागू कर सकती है।

समय पर चुनाव कराना क्यों मुश्किल?

बताया जा रहा है कि पंचायत चुनाव समय पर ना कराने की सबसे बड़ी वजह समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन ना होना है। इसके अलावा मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो पाई है। इन परिस्थितियों में तय समय पर पंचायत चुनाव कराना मुश्किल माना जा रहा है। इसी वजह से सरकार वैकल्पिक व्यवस्था पर मंथन कर रही है, जिससे ग्राम पंचायतों का कामकाज प्रभावित ना हो।

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